कौन है वो 8 महिलाएं, जिसे आजाद करवाना चाहते है ट्रंप ?

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरी दुनिया को ठहर कर देखने पर मजबूर कर दिया है। यह मामला ईरान की जेल में बंद उन आठ महिलाओं का है जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई है। इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बहस दोनों को तेज कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम में डोनाल्ड ट्रंप का एक कदम अचानक सुर्खियों में आ गया।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर इन महिलाओं की तस्वीरें शेयर करते हुए ईरानी नेताओं से सीधी और इमोशनल रिक्वेस्ट की। कृपया इन्हें नुकसान मत पहुंचाइए। यह सिर्फ एक पोस्ट नहीं था बल्कि एक ऐसा संदेश था जिसने इस मुद्दे को ग्लोबल डिस्कशन के सेंटर में ला दिया। ट्रंप ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि अगर ईरान इन महिलाओं को रिहा करता है तो यह दोनों देशों के बीच बातचीत की एक पॉजिटिव शुरुआत हो सकती है।

यानी यह अपील केवल मानवीय नहीं बल्कि कूटनीतिक भी थी। हालांकि बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के अटर्नी जनरल ने इन महिलाओं को फांसी दिए जाने की खबरों से इंकार किया है। इससे मामला और उलझ गया है क्योंकि सच्चाई अभी भी पूरी तरह सामने नहीं आई है। इन आठ महिलाओं की पहचान और उन पर लगे आरोपों को लेकर ऑफिशियल नॉलेज फिलहाल लिमिट है।

जो भी जानकारी सामने आई है, वह मेनली ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट और कुछ रिपोर्ट्स के थ्रू आई है। इन महिलाओं में बीता हेमती का नाम सामने आया है। जिन्हें कथित तौर पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किया गया।

डायना ताहिर आबादी जो केवल 16 साल की बताई जा रही है। उस पर भी प्रदर्शन में शामिल होने का आरोप है। महबूबे शबानी पर आरोप है कि उन्होंने विरोध प्रदर्शनों में घायल लोगों की मदद की। जबकि एनसीए निजाती को एक महिला अधिकारी कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है। गोलनाज नरागी जो पेशे से इमरजेंसी डॉक्टर है उन्हें भी इसी दौरान हिरासत में लिया गया। वीनस हुसैन निजात के बारे में दावा है कि उनसे जबरन कबूलनामा दिलवाया गया। जबकि गजल गरंदरी और पनाह मुआहेदी के बारे में जानकारी अभी भी अधूरी है।

अगर हम आरोपों की बात करें तो एक्टिविस्ट ग्रुप का कहना है कि इन महिलाओं पर सरकार विरोधी प्रदर्शन करने, उन्हें संगठित करने और यहां तक कि राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बीता हिमती पर तो इस्तेमाल करने जैसे आरोप भी बताए जा रहे हैं। लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है। सबसे बड़ी समस्या यही है कि इस पूरे मामले में स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी की कमी है। ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से इन नामों या मामलों की पुष्टि नहीं की है।

जो कुछ भी सामने आया है, वह एक्टिविस्ट एंड ह्यूमन राइट्स नेटवर्क के जरिए सामने आया है। जिसकी सच्चाई साबित होनी अभी बाकी है। इस मुद्दे को सबसे पहले उठाने वालों में एएल याकूबी का नाम सामने आता है।

जिन्होंने दावा किया कि ईरान इन महिलाओं को देने की प्लानिंग कर रहा है और दुनिया इस पर खामोश है। यह मामला अब सिर्फ आठ महिलाओं तक सीमित नहीं रह गया है। यह एक बड़ा सवाल बन चुका है। क्या यह न्याय है या शक्ति का प्रदर्शन? एक तरफ अंतरराष्ट्रीय दबाव है।

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