‘मैं डरता नहीं…! ट्रंप को पोप ने दे दिया करारा जवाब ! धर्मग्रंथ का दिया हवाला !

ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता फेल हो चुकी है। इससे ट्रंप की बौखलाहट दुनिया पर जाहिर हो रही है। पहले चीन रूस को वहां तक तो बात ठीक थी लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोप को भी नहीं छोड़ा।

अब ट्रंप ने उसी हमले का पोल ने जोरदार जवाब दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे हमले का जवाब देते हुए पोप लियो 14 ने सोमवार को कहा कि उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप प्रशासन से कोई डर नहीं है। पोप ने मीडिया से कहा कि शांति और सुलह के लिए वेटिकन की अपीलें गोस्पल यानी धर्म ग्रंथपर आधारित है। अल्जीरिया जाते समय पोप ने कहा मेरे संदेश को उस चीज के बराबर समझना जो राष्ट्रपति ने यहां करने की कोशिश की है। मुझे लगता है कि गोस्फेल के संदेश को ना समझना मुझे यह सुनकर दुख हुआ।

लेकिन मैं उस काम को जारी रखूंगा जिसे मैं आज की दुनिया में चर्च का मिशन मानता हूं। पोप ने सबसे [संगीत] तीखा हमला यह कहते हुए किया कि मुझे ट्रंप प्रशासन से कोई डर नहीं है। मैं किसी बहस में नहीं पड़ूंगा। जो बातें मैं करता हूं उसका मतलब निश्चित रूप से किसी पर हमला करना नहीं है। गॉसल का संदेश बहुत स्पष्ट है।

धन्य है कि वह शांति स्थापित करते हैं। दरअसल रविवार रात को ट्रंप ने पॉप लियो 14 पर जबरदस्त हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि कैथोलिक चर्च के अमेरिकी मूल के इस वैश्विक नेता का काम बहुत अच्छा है और वह बहुत ही उदारवादी व्यक्ति हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पोप को कट्टर वामपंथी का पक्ष लेना बंद करना चाहिए। ट्रंप ने अपने एक और पोस्ट में लिखा था अगर मैं वाइट हाउस में नहीं होता तो लियो वेटिकन में नहीं होते।

लियो को पॉप के तौर पर आपका काम ठीकसे करना चाहिए। साझेदारी से काम लेना चाहिए। कट्टर वामपंथियों का साथ देना बंद करना चाहिए। एक और महान पॉप बनने पर ध्यान देना चाहिए ना कि एक राजनेता बनने पर। इससे उन्हें बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है और इससे भी ज्यादा जरूरी बात यह कि इससे कैथोलिक चर्च को नुकसान हो रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की यह टिप्पणी तबआई जब पोप लियो ने शनिवार को सेंट पीटर्स बेसिलिका में प्रार्थना सभा की अध्यक्षता की थी।

उसी दिन अमेरिका और ईरान ने एक नाजुक युद्ध विराम के दौरान पाकिस्तान में अपने आमने-सामने बातचीत शुरू की थी। पोप ने अमेरिका या ट्रंप का नाम लेकर जिक्र नहीं किया था। लेकिन उनका लहजा और संदेश ट्रंप और अमेरिकी अधिकारियों की ओर ही लग रहा था।

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