औरत की छाती पकड़कर दरिंदगी नालंदा में नीतीश की नाक काट गई!

बधाई हो मुख्यमंत्री जी आपके सपनों का सुशासन अब नालंदा की सड़कों पर नग्न होकर नाच रहा है। बहुत-बहुत मुबारक हो उस तंत्र को जो दावे तो महिला सुरक्षा के करता है। लेकिन जिसकी नाक के नीचे एक मां, एक पत्नी और एक बेबस औरत की अस्मिता को सरेआम बाजार बना दिया जाता है। यह बिहार के उस गृह जिले की कहानी है जहां से सत्ता की धमक निकलती है।

लेकिन अफसोस की उसी की गूंज में एक औरत की चीखें दब कर रह गई। नालंदा जिसे कभी ज्ञान की धरती कहा जाता था। आज वह दुराचारियों की प्रयोगशाला बन चुका है। जहां सरे राह एक महिला के साथ दरिंदगी की कोशिश होती है और इस न्यू इंडिया के डिजिटल बिहार के शूरवीर उसका वीडियो बनाकर उसे मनोरंजन की वस्तु बना देते हैं। गजब की क्रूरता है इस समाज में और उससे भी गजब की बेशर्मी है इस सरकार में।

एक महिला घर से राशन लेने निकलती है। शायद उसके बच्चों को भूख लगी होगी या पति के दूर नासिक में रहने के बाद घर की जिम्मेदारी उसके कंधों पर होगी। लेकिन उसे क्या पता था कि अंधेरे का फायदा उठाकर गांव के ही कुछ भेड़िए उसका इंतजार कर रहे थे। उन बदमाशों ने ना केवल उसे गलत तरीके से पकड़ा बल्कि उसकी गरिमा को तार-तार करने की हर संभव कोशिश की। हद तो तब हो गई जब जुल्म की नुमाइश करने के लिए उन्होंने वीडियो भी बनाया। वाह रे समाज और वाह रे कानून का डर।

जब पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर थाने की दहलीज रांगी तो इन दरिंदों ने उस वीडियो को वायरल कर दिया जैसे वह कोई वीरता का पदक हो। इस घटना का 42 सेकंड का वो वीडियो हमारे मुंह पर करारा तमाचा है। वीडियो में दिख रहा है कि कैसे वे आरोपी महिला को घसीट रहे हैं, गालियां दे रहे हैं और उनके पीछे लोगों का एक हुजूम तमाशाबीन बना हुआ चल रहा है। उन लोगों की आंखों का पानी मर चुका है जो एक महिला को लूटते देख रहे थे और हाथ में मोबाइल थामे फिल्म बना रहे थे। मुख्यमंत्री जी क्या यही है आपका वो न्याय के साथ विकास?

जिस जिले ने आपको मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया, उसी जिले में आपकी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। रोहिणी आचार्य ने ठीक ही कहा कि यह दुशासनी राज है। यहां द्रोपदी का चीरहरण करने वाले दुशासन अब महल में नहीं बल्कि सड़क पर बेखौफ घूम रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि पुलिस की फाइलें देर से खुलती हैं और रसूख के गलियारे बहुत लंबे होते हैं। दो गिरफ्तारियां हो गई। शायद तीसरा भी पकड़ा जाए।

लेकिन क्या इससे उस महिला की रूह पर लगे घाव भर जाएंगे? क्या वह समाज में फिर उसी सिर उठाकर चल पाएगी जिसके सामने उसे सरेआम अपमानित किया गया। सत्ता के गलियारों में बैठे लोग शायद आंकड़ों का खेल खेलेंगे। लेकिन हकीकत यह है कि आज बिहार में कानून का राज नहीं बल्कि अपराधियों का लाइव टेलीकास्ट चल रहा है। जिस राज्य में सरेआम की कोशिश हो और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे।

समझ लीजिए कि वहां की मानवता वेंटिलेटर पर है। यह सिर्फ एक महिला पर हमला नहीं है बल्कि उस भरोसे पर हमला है जो एक आम नागरिक सरकार पर करता है। लानत है ऐसे खोखले दावों पर जहां अंधेरा होते ही औरतें शिकार बन जाती हैं और उजाला होने पर अपराधी वीडियो वायरल कर सिस्टम को चुनौती देते हैं। शर्म आनी चाहिए उस व्यवस्था को जिसे अपनी साख से ज्यादा अपनी कुर्सी की चिंता है।

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