बिछड़ गया हर साथी बिजनेसमैन विजय पथ सिंघानिया इस दुनिया में नहीं रहे। 87 की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली और कल उन्हें पंचतत्व में विलीन कर दिया गया। विजयपत सिंघानिया की जिंदगी से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। कैसे उन्होंने रेमंड्स को बहुत बड़ा बनाया।
कैसे बिजनेस संभालते हुए अपने फ्लाइंग के पैशन को भी उन्होंने फॉलो किया और लंदन से इंडिया तक वह माइक्रो लाइट फ्लाइट में ट्रैवल करके आए 23 डेज में 69000 की फीट पर हॉट एयर बलून में उड़कर उन्होंने रिकॉर्ड बनाया और भारत ने भी माना कि विजयपथ सिंघानिया हमारे लिए एक एसेट है।
उन्हें पद्म भूषण से नवाजा गया और उनके एिएशन करियर के लिए टजिंग नर्ग नेशनल एिएशन अवार्ड से सम्मानित किया गया। विजय पत सिंघानिया की जिंदगी जहां सीख देती है कि इंसान क्या कुछ नहीं कर सकता वहीं उनका बुढ़ापा एक सबक देता है कि मरने से पहले कभी भी अपने बच्चों को अपनी पूरी जायदाद हैंडओवर मत करो।
अपने पास रखो और ऐसी विल बनाओ कि आपकी कड़ी मेहनत की कमाई, आपकी प्रॉपर्टी, आपके बच्चों को मिले तो सही लेकिन आपके मरने के बाद जीते जी अपने हाथों से अपने बच्चों को मत दो। विजय पत सिंघानिया को धोखा दिया उनके छोटे बेटे गौतम सिंघानिया ने। यह कहानियां तो मीडिया में बहुत वायरल है।
लेकिन सिर्फ उनके छोटे बेटे ने ही उनके साथ गलत नहीं किया बल्कि बड़े बेटे के साथ विवाद की वजह से ही उन्हें सब कुछ छोटे बेटे को देना पड़ा और छोटे बेटे ने उनके साथ धोखा कर दिया। इसकी शुरुआत होती है ईयर 1998 से। रेमंड्स में सब कुछ ठीक चल रहा था। विजय पथ सिंघानिया के दोनों बेटे मधुपति और गौतम दोनों बड़े हो गए थे और मीडिया में खबरें थी कि अब रेमंड्स का बंटवारा हो रहा है। विजय पथ सिंघानिया दोनों बेटों के बीच में अपनी प्रॉपर्टी का बंटवारा कर रहे हैं। बड़े बेटे को ओवरसीज का बिजनेस संभालने के लिए और एक्सपेंड करने का काम दिया जाएगा।
वहीं गौतम सिंघानिया भारत में रहकर सारा रेमंड्स का धंधा संभालेंगे। लेकिन सेम ईयर दिसंबर में खबर आती है कि मधुपत सिंघानिया जो है वह रेमंड से बिल्कुल अलग हो गए हैं। उन्होंने रेमंड्स की प्रॉपर्टी उनका जो हक है उन सब से त्याग ले लिया है। यानी कि वह अपने पिता की प्रॉपर्टी से ही बाहर निकल गए हैं और वह सिंगापुर जाकर सेटल हो गए हैं। वह अपने चारों बच्चे और बीवी को लेकर सिंगापुर चले जाते हैं। बड़े बेटे के जाने के बाद विजय पथ सिंघानिया की कंपनी में गौतम सिंघानिया काफी एक्टिव हो गए क्योंकि ज्यादातर काम उन्हें ही करना पड़ रहा था। यह 2001 200 के आसपास इस तरह की चीजें होने लगी कि मैनेजिंग को लेकर दोनों बाप बेटे के बीच भी खींचतान होने लगी। इसी बीच विजयपत सिंघानिया को एक बार जब वो लंदन में थे तब उन्हें थॉट आया कि उन्हें अपनी जगह से रिजाइन कर देना चाहिए और गौतम सिंघानिया पर छोड़ देना चाहिए कंपनी का सारा काम।
तो उन्होंने अपनी पोजीशन से रिजाइन किया। लंदन से ही उन्होंने रेिग्नेशन लेटर भेजा। उन्हें अचंभा तब हुआ जब उनके बिना ही कंपनी में एक बोर्ड मीटिंग बुलाई गई। उसमें उनके रेिग्नेशन को एक्सेप्ट कर दिया गया और गौतम सिंघानिया ने मैनेजिंग डायरेक्टर की पोस्ट एक्टिवली संभालनी शुरू कर दी और पिता को एक सम्मानित पोस्ट दे दी क्योंकि उन्होंने कंपनी को इतना आगे बढ़ाया था। लेकिन अब जो काम से रिलेटेड डिसीजंस थे वो सारे गौतम सिंघानिया के पास ही थे। हालांकि यह डिसीजंस काम से रिलेटेड थे। पैसों का पावर अभी भी विजयपत सिंघानिया के पास ही था। इसके बाद आता है ईयर 2007।
विजयपत सिंघानिया अपने पूरे परिवार के साथ जेके हाउस में रहा करते थे। यह 14 मंजिला बिल्डिंग थी जिसके अंदर विजय पत सिंघानिया, उनकी पत्नी, उनके छोटे भाई की पत्नी और उनके बच्चे रहा करते थे और खुद गौतम सिंघानिया भी रहा करते थे।
यह बिल्डिंग रीडेवलपमेंट में जाती है और उस टाइम एक एग्रीमेंट किया जाता है कि जब भी यह बिल्डिंग बनेगी तो इस बिल्डिंग में एक डुप्लेक्स विजयपत सिंघानिया का होगा। एक डुप्लेक्स उनके भाई की पत्नी जो उनके बच्चों के साथ रहती है उन्हें दिया जाएगा और एक डुप्लेक्स खुद गौतम सिंघानिया लेंगे। इस तरह का एग्रीमेंट साइन किया जाता है। तो जब उनका घर रीडेवलपमेंट में जाता है तो विजय पथ संघानिया अपने परिवार के साथ जूहू में उनका कमला कॉटेज करके एक प्रॉपर्टी है वहां पर रहने के लिए आ जाते हैं। लेकिन यह प्रॉपर्टी उनके बड़े बेटे मधुपति के नाम पर होती है।
जब उन्हें पता चलता है कि पिता मेरी प्रॉपर्टी यूज़ कर रहे हैं तो वह पिता को नोटिस भेजते हैं इस प्रॉपर्टी को खाली करने के लिए। इस नोटिस की मानना करनी पड़ती है। अपने बड़े बेटे का वह जूह वाला घर खाली करना पड़ता है और उसके बाद वह मुंबई के ब्रिज कैंडी में ही एक अपार्टमेंट किराए पर लेते हैं और वहां पर वह अपनी पत्नी के साथ रहते हैं।
अभी तक सारी चीजें मैनेज हो रही थी और विजय पत सिंघानिया बैकफुट पर आ गए थे। गौतम आगे से कंपनी को संभाल रहे थे और इस दौरान उन्होंने कंपनी को लेकर बहुत अहम डिसीजन लिए थे कि रेमंड्स पर ही उन्होंने फोकस डाला। रेमंड्स गारमेंट, रेमंड्स टेक्सटाइल, रेमंड्स रेडीमेड, रेमंड्स सूट ये सारी चीजों पर उन्होंने ध्यान देना शुरू किया और रेमंड से रिलेटेड बाकी जो दूसरी सिस्टर कंसर्न कंपनीज़ थी जिसमें स्टील भी बनाया जा रहा था जिसमें सीमेंट में भी डील किया जा रहा था। उन सभी बिनेसेस को बंद किया क्योंकि रेमंड्स पर कर्जा भी था।
उन्होंने सिर्फ और सिर्फ रेमंड जो मेन ब्रांड थी उस पर उन्होंने फोकस किया और कंपनी को नेक्स्ट लेवल पर पहुंचाया। रेमंड्स में सब ठीक चल रहा था। लेकिन फिर आता है ईयर 2015। जनवरी के महीने में विजय पथ सिंघानिया का बड़ा बेटा जो सिंगापुर जाकर सेटल हो गया था वह अचानक से एक्टिव होता है और वो यहां इंडियन कोर्ट में एक पिटीशन फाइल करता है अपने बच्चों के नाम से और उस पिटीशन में वो कहता है कि मैंने तो अपने पिता का हक छोड़ दिया। लेकिन मेरे बच्चे जो इधर-उधर नौकरी करने को मजबूर हैं, वह अपने दादा की प्रॉपर्टी में अपना हिस्सा मांगना चाहते हैं और इसी के लिए उन्होंने यह पिटीशन फाइल की है। मधुपति के इस केस फाइल करने के एक ही महीने के अंदर विजयपत सिंघानिया अपना पूरा शेयर जो रेमंड्स में था 37.7% वो अपने बेटे गौतम सिंघानिया को ट्रांसफर कर देते हैं। ₹1000 करोड़ उस वक्त उन शेयर्स की कीमत थी। इसके अलावा जितनी भी उनकी मूवेबल इमूवेबल प्रॉपर्टी थी वह सारी भी वह गौतम सिंघानिया को ट्रांसफर कर देते हैं और फिर कोर्ट में यह मामला शुरू होता है। मधुपति ने कहा कि मेरे पिता से मेरी बनती नहीं थी क्योंकि वो मेरे भाई गौतम सिंघानिया को ही सपोर्ट करते थे। इसीलिए मेरा उनसे मनमुटाव रहा। इसके अलावा वो मेरी मर के साथ गलत बर्ताव करते थे।
उसके खिलाफ मैंने आवाज उठाई और इसीलिए वो मुझे पसंद नहीं करते। वहीं से उन्होंने मुझे बिजनेस में साइड लाइन करना शुरू कर दिया और हर जगह गौतम को ही आगे रखते। मेरी इंसल्ट, मेरी बेइज्जती हर दिन होती थी। इसीलिए मैंने अपने आप को इस बिजनेस से अलग कर दिया। लेकिन मेरे बच्चे अपना हक चाहते हैं। हम सिंगापुर में बहुत मुश्किल से जी रहे हैं। बच्चों को इधर-उधर काम करना पड़ रहा है। इसके जवाब में विजय पथ सिंघानिया जवाब देते हुए कहते हैं कि पहली बात तो आप सिंगापुर में रह रहे हैं। एक कंफर्टेबल जिंदगी जी रहे हैं।
वहां पर आपके पास एक यट है जिसकी कीमत $5,000 है। आपके पास स्पोर्ट्स कार है। और जहां तक बात है आपके बच्चों के कंपनी में काम करने की तो कोई भी काम बड़ा या छोटा नहीं होता है। वह यहां भी होते तो भी उन्हें काम करना पड़ता। तो काम का हवाला तो आप ना ही दें। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा मधुपत सिंघानिया को कि जब यह एग्रीमेंट आप ईयर 1998 में करके गए थे तो उसके एक दो साल के अंदर ही आपने यह बात क्यों नहीं कही। आप अब क्यों आ रहे हैं यह सब कहने के लिए? तो इस पर उनका जवाब था कि मेरे चारों बच्चे 18 साल के हो गए उसके बाद मैंने उन्हें यह बात बताई और उसके बाद ही उन्होंने अपने दादा की प्रॉपर्टी में हक मांगा है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि जब 18 साल के हो रहे थे तभी क्यों नहीं आए? इतना लेट क्यों आए? इस तरह से यह केस तो रद्द हो गया। यानी कि मधुपति सिंघानिया तो यही सीन से आउट हो गए। लेकिन अब गौतम सिंघानिया अपनी पारी खेल गए। हुआ यह कि जेके बिल्डिंग जो रिडेवलपमेंट में गई थी वो अब बनकर तैयार हो गई थी। और अब बारी थी डुप्लेक्स फ्लैट्स के पोजीशन की जिसकी हामी गौतम ने भरी थी कि हां जब यह बिल्डिंग बन जाएगी तो एक फ्लैट मेरे माता-पिता को मिलेगा और एक फ्लैट मेरी चाची और उनके बच्चों को मिलेगा। गौतम सिंघानिया ने यह फ्लैट देने से मना कर दिया। उन्होंने यह प्रॉपर्टी का जो मामला है यह अपनी कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से डिस्कस किया और फिर शेयर होल्डर्स को भी बीच में लिया और फिर उनके सामने प्रेजेंट किया कि यह बिल्डिंग जब रीडेवलपमेंट में गई थी तब इस जगह की कीमत पर स्क्वायर फीट 9000 थी।
लेकिन अब इस जगह की कीमत ₹1 लाख पर स्क्वायर फीट है। अगर ऐसे में यह प्रॉपर्टी मैं अपने पिता और अपने बाकी फैमिली मेंबर्स को देता हूं तो कंपनी का बड़ा पैसा लगेगा। तो आप शेयर होल्डर्स अगर मुझे परमिशन देते हैं तो ही मैं यह करूंगा। नहीं तो मैं यह नहीं करूंगा। शेयर होल्डर्स ने इसके खिलाफ वोट किया और कंपनी ने कहा कि हम इसके लिए तैयार नहीं है। गौतम सिंघानिया ने तब कंपनी और शेयर होल्डर्स का हवाला देते हुए अपने पिता और अपने परिवार वालों को घर देने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर घर वाले और शेयरहोल्डर्स के बीच में मुझे किसी के बारे में पहले सोचना है तो मैं शेयर होल्डर्स के बारे में सोचूंगा क्योंकि उन्हीं से मैं हूं। इतना ही नहीं एग्रीमेंट के मुताबिक गौतम सिंघानिया को अपने पिता को हर महीने ₹7 लाख खर्चे के देने थे। वह पैसा भी उन्होंने नहीं दिया। अपने वन ऑफ द इंटरव्यू में विजयपत सिंघानिया कहते हैं कि किसी भी बाप को यह नहीं देखना पड़े और उन्होंने यही कहा कि कभी भी अपने बच्चों को मरने से पहले अपनी प्रॉपर्टी मत देना। मैं सड़क पर आ जाता मैं हैंड टू माउथ आ जाता अगर मेरे पास कुछ पैसे नहीं रखे होते। वो तो मेरे पास कुछ पैसे रखे थे जिन्हें मैं रखकर भूल गया था। उसी पैसे से मैंने अपना यह बुढ़ापा चलाया है। वरना मेरा क्या ही होता। कई इंटरव्यूज में विजयपत सिंघानिया ने यह भी कहा कि गौतम उन्हें गाली गलौज करता था। उनके साथ मारपीट भी की गई। अपनी इसी एक्सपीरियंस के बारे में उन्होंने एक किताब लिखी जिसका नाम था एन इनकंप्लीट लाइफ।
इस किताब पर भी गौतम सिंघानिया ने रोक लगवाने की कोशिश की। उनका कहना था कि रेमंड्स की जो टैगलाइन है द कंप्लीट मैन उसी पर तंज कसते हुए यह किताब लिखी गई है। हालांकि इस किताब में विजयपत सिंघानिया ने बेटे से कैसे उनका झगड़ा हुआ, कहां से मिसअंडरस्टैंडिंग्स शुरू हुई? कैसे गौतम सिंघानिया ने उनके साथ धोखा किया यह सारी चीजें उन्होंने मेंशन की। विजय पत सिंघानिया को उनके बेटे ने घर से आउट कर दिया है और उनका बिजनेस एंपायर भी हथिया लिया है और पिता को घर में भी नहीं घुसने दे रहा है। यह कहानी लोगों तक तब पहुंची जब विजय पत सिंघानिया ने अपनी पत्नी के साथ एक होटल रूम से एक गाना गाया। बिछड़ गया हर साथी देके पल दो पल का साथ। यह गाना इमोशनल करने वाला था, रुलाने वाला था और सब समझ गए थे।
और इस गाने के थ्रू उन्होंने बता दिया कि उनके साथ उनके हर साथी ने उन लोगों ने जिन पर उनको विश्वास था उन्होंने क्या किया। बिछड़ गया [गाना गाने की आवाज़] हर साथी। कुछ ही सालों पहले विजयपत सिंघानिया की गौतम सिंघानिया के साथ एक तस्वीर बहुत वायरल हुई जिसमें गौतम सिंघानिया ने लिखा कि पिता के साथ अच्छा टाइम स्पेंड किया मैंने मेरे घर पर और तब मीडिया में खबरें आई कि बाप बेटे के बीच जो प्रॉब्लम्स थी वो सॉल्व हो गई है और दोनों साथ है। लेकिन बाद में विजय पत सिंघानिया ने क्लियर किया और कहा कि उनके लोग मुझे बुला रहे थे। काम को लेकर मीटिंग करने बुला रहे ।
लेकिन मुझे नहीं पता था कि उन्होंने मुझे बुलाया सिर्फ इसलिए था ताकि एक तस्वीर मेरे साथ उन्हें मिल जाए और वह मीडिया में अपनी इमेज ठीक कर पाए। एंड तक गौतम के लिए उनके वही शब्द थे जो शब्द उन्होंने कई इंटरव्यूज में रिपीट किए और कहा कि मुझे मेरे बेटे ने ही धोखा दिया वो वर्स्ट दिन था जब मैंने मेरे बेटे को अपने सारे शेयर्स दिए। विजय पत सिंघानिया की मृत्यु पर उनके दोनों ही बेटे मौजूद रहे। सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि जीते जी विजय पत सिंघानिया को ना बड़े बेटे ने रखा ना छोटे बेटे गौतम ने रखा। लेकिन जब विजय पत सिंघानिया की कल डेथ हुई तो दोनों बेटे अंतिम संस्कार के लिए पहुंच गए।
