हवा मे घूमता रहा ममता बनर्जी का प्लेन, पायलट ने बचाई जान।

70 मिनट से ज्यादा वक्त हवा में चक्कर लगता प्लेन प्लेन में बैठी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्लेन के आसपास गरजते बादल काला घना आसमान नीचे शहर कोलकाता इस माहौल के बीच वह प्लेन 1 घंटे से ज्यादा वक्त तक चक्कर लगाता रहा।

रनवे सामने जरूर आ रहा था, लेकिन लैंडिंग की परमिशन नहीं मिलती। अंदर बैठे लोगों के लिए यह इंतजार बहुत मुश्किल था। हर मिनट लंबा होता जा रहा था। पायलट लैंडिंग की कोशिश करता है, फिर छोड़ देता है। बांग्ला मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह पूरा वाकया 26 मार्च शाम का है।

जब चुनावी रैलियों के बाद ममता बनर्जी अंडाल एयरपोर्ट से कोलकाता लौट रही थी। समय तय था फ्लाइट 3:39 पर उड़ी। कोलकाता पहुंचना था करीब 4:00 बजे लेकिन मौसम ने बीच रास्ते में कहानी बदल दी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास अचानक मौसम बिगड़ गया। पहले बादल फिर तेज बारिश और फिर आंधी के साथ ओलेदे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि हवा की रफ्तार करीब 57 कि.मी./ घंटे तक पहुंच गई थी। विजिबिलिटी घटकर सिर्फ 800 मीटर रह गई। इसी की वजह से पायलट को रनवे दिख ही नहीं रहा था। वो लैंडिंग की कोशिश करता है मगर हर बार मौसम रास्ता रोक देता है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक प्लेन ने कम से कम तीन बार लैंडिंग की कोशिश की।

यहां तक कि बेहाला फ्लाइंग क्लब पर उतरने का भी ट्राई किया गया। मगर हर बार प्लान अबोर्ट करना पड़ा, रोकना पड़ा। इसी बीच एयरपोर्ट पर फ्लाइट ऑपरेशन करीब 20 मिनट के लिए पूरी तरह रोक दिए गए। जिसके चलते 16 फ्लाइट्स लेट हो गई। एक को डायवर्ट करना पड़ा और ऊपर मुख्यमंत्री का प्लेन करीब 70 मिनट तक आसमान में चक्कर काटता रहा। यह एक ऐसा वक्त था जब हर फैसला सेकंड्स में लिया जा रहा था और हर फैसला जिंदगी से जुड़ा था। एटीसी यानी एयर ट्रैफिक कंट्रोल लगातार पायलट के साथ कांटेक्ट में था।

जमीन से अपडेट्स मिल रहे थे। ऊपर फ्लाइट इंतजार कर रही थी उस एक सही मौके का कि जब मौसम थोड़ा थमे और लैंडिंग संभव हो सके। फिर करीब 5:00 बजे मौसम में हल्का सा सुधार आया। लेकिन तभी एक और दिक्कत आ गई। हवा की दिशा अचानक बदल जाती है। रनवे बदलने की जरूरत पड़ गई। फिर आखिरकार 5:19 पर यानी तय समय से 72 के डिले के साथ प्लेन बाहिफाज़त उतर गया। इस पूरी घटना के बाद जब ममता बनर्जी अगले दिन दमदम एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करती हैं, तो उनका पहला रिएक्शन क्या होता है? पायलट बहुत अच्छा था। उसने जान बचा ली। यह उस पूरे तनाव भरे 1 घंटे की कहानी का निष्कर्ष है। इसे समझने के लिए अब जरा घटना को एक कदम पीछे जाकर देखते हैं।

आप जानते ही हैं कि इन दिनों प्लेन या उससे जुड़ी कितनी खबरें आ रही हैं। पिछले साल अहमदाबाद प्लेन में गुजरात के पूर्व सीएम विजय रूपाणी की हो गई थी और इसी साल जनवरी में हुए एक प्लेन में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार की जान चली गई। पिछले महीने 23 फरवरी को झारखंड में भी एक एयर एंबुलेंस क्रैश हो गई थी जो एक चार्टर्ड प्लेन था। ऐसे में इन हादसों की खबरों को देखते हुए सरकार ने सख्ती बढ़ाई है। खासतौर पर इस तरह के चार्टर्ड प्लेन के लिए ये सख्ती आई है खासकर वीवीआईपी फ्लाइट्स के लिए।

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक इंडिया की एिएशन रेगुलेटर डायरेक्टरी जनरल ऑफ सिविल एिएशन। डीजीसीए ने साफ निर्देश दिए हैं कि वीवीआईपी फ्लाइट्स में पायलट पर कोई दबाव नहीं होना चाहिए। अगर मौसम खराब है तो पायलट को उड़ान रोकने, मोड़ने या लैंडिंग टालने का पूरा अधिकार है। उस पर कोई दबाव नहीं बनाया जा सकता। इससे समझ आता है कि कई बार वीवीआईपी फ्लाइट्स में जब पायलट्स कुछ रीजंस के चलते उड़ान भरने से मना कर देते हैं तो उन पर दबाव बनाया जाता है। प्रेशर बनाया जाता है कि फ्लाइट लेकर जानी ही है। इस तरह की प्रेशराइज्ड और मजबूरन भरी गई उड़ानों में बाय नेचर रिस्क बढ़ ही जाता है।

इसी वजह से डीजीसीए ने साफ-साफ शब्दों में यह निर्देश जारी किए हैं ताकि एक पायलट के सोचे समझे फैसले को सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और शायद इसीलिए अब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ऐसी जोखिम भरी घड़ी से बाहिफाज़त बाहर आती हैं तो यही एक लाइन होती है उनके चेहरे पर और उनकी जुबान पर पायलट बहुत अच्छा था उसने जान बचाई। एक ऐसी लाइन जिसमें सब कुछ समा जाता है।

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