रूस ने बंद किया तेल का दरवाजा !पुतिन का बड़ा धमाका, अब मचेगा हाहाकार

एक तरफ मिडिल ईस्ट में की आग बुझने का नाम नहीं ले रही और दूसरी तरफ अब रूस ने एक ऐसा पावर प्ले कर दिया है जिसने पूरी दुनिया के किचन से लेकर गाड़ियों की टंकी तक हड़कंप मचा दिया। 1 अप्रैल 2026 रूस ने ऐलान कर दिया है कि वो अपने पेट्रोलियम उत्पादों के एक्सपोर्ट पर पूरी तरह lसे ताला लगाने जा रहा है। अब रूस से पेट्रोल और डीजल जैसे उत्पाद बाहर नहीं जाएंगे।

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर पुतिन ने अचानक यह कदम क्यों उठाया? क्या रूस के पास तेल खत्म हो गया है? असल में इसके पीछे एक बहुत बड़ी सोची समझी रणनीति है जिसका सीधा कनेक्शन मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और दुनिया भर में बढ़ती महंगाई से है। रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्जेंडर नोवाक ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि मिडिल ईस्ट में जारी संकट के वजह से ग्लोबल मार्केट में भारी उथल-पुथल मची हुई है।

कच्चे तेल की कीमतें किसी रोलर कोस्टर की तरह ऊपर नीचे हो रही है। ऐसे में रूस का पहला लक्ष्य है अपने घर को बचाना। रूस को यह फैसला इसलिए भी लेना पड़ा क्योंकि पिछले साल उसे एक कड़वा सबक मिला था। आपको याद होगा पिछले साल रूस से कई इलाकों और यूक्रेन के उन हिस्सों में जिन पर रूस का कब्जा है वहां पेट्रोल की भारी किल्लत [संगीत] हो गई थी।

उस वक्त दो बड़ी मुसीबतें एक साथ आई थी। पहले यूक्रेन ने रूसी रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले तेज कर दिए थे और दूसरी खेती और बाकी कामों की वजह से घरेलू मांग अचानक बढ़ गई थी। हालात इतने बिगड़ गए थे कि लोगों को पेट्रोल के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ा था। पुतिन अब दोबारा वो गलती नहीं दोहराना चाहते। इसलिए सप्लाई चेन को अभी से लॉक कर दिया गया है। [संगीत] अब सवाल यह है कि क्या रूस के इस फैसले से दुनिया ठप हो जाएगी? चलिए आंकड़ों पर नजर डालते हैं। पिछले साल रूस ने करीब 50 लाख मीट्रिक टन पेट्रोल एक्सपोर्ट किया था।

वैसे तो यह ग्लोबल ट्रेड का एक छोटा सा हिस्सा है। लेकिन टाइमिंग देखिए। यह बैन ऐसे वक्त में आया है जब हॉर्मोज की खाड़ी यानी स्ट्रेट ऑफ हॉरमोज फरवरी के आखिर से ही लगभग बंद पड़ी है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही तेल की सप्लाई [संगीत] के लिए तड़प रहा है और अब रूस के इस छोटे से हिस्से के हटने से भी बाजार में हाहाकार मच सकता है। यहां एक बात साफ कर दें कि रूस ने सिर्फ रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स यानी पेट्रोल डीजल पर बैन लगाया है। कच्चे तेल की सप्लाई पर कोई रोक नहीं है। फिलहाल कोई रोक नहीं है। रूस का कहना है कि उसकी रिफायरिंग क्षमता अभी भी उच्च स्तर पर है और उसके पास पर्याप्त भंडार मौजूद है। लेकिन असली पेच यहां है। अगर रिफाइंड तेल बाहर नहीं जाएगा तो दुनिया के उन देशों को भारी दिक्कत होगी जो रूस से बना बनाया पेट्रोल खरीदते हैं। उन्हें अब दूसरे रास्तों की तलाश करनी होगी जो मिडिल ईस्ट संकट की वजह से पहले ही महंगे हो चुके हैं।

एक तरफ ईरान ने हॉर्मोज को बंद करके सप्लाई रोकी है और दूसरी तरफ रूस ने 1 अप्रैल से अपना गेट बंद कर लिया है और इसका असर कीमतों में महाविस्फोट और यहां भारत की बात [संगीत] करें कि आखिर रूस के इस बैन से भारत पर क्या असर पड़ेगा तो बता दें भारत रूस से तैयार पेट्रोल या डीजल नहीं खरीदता बल्कि हम रूस से भारी मात्रा में क्रूड ऑयल खरीदते हैं और राहत की बात यह है कि रूसने अभी कच्चे तेल के एक्सपोर्ट पर कोई पाबंदी नहीं लगाई। यानी भारत के लिए तेल की सप्लाई फिलहाल सुरक्षित [संगीत] मानी जा रही है। लेकिन एक चीज जब रूस मार्केट में रिफाइंड तेल की सप्लाई रोकता है तो पूरी दुनिया में पेट्रोल डीजल की किल्लत हो जाती है। जब दुनिया में किल्लत होगी तो कच्चे तेल की डिमांड और कीमतें अपने आप भागने लगेंगी।

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