अब भुगतो ! ईरान से यू!ध छेड़ने का नतीजा, गढ़ में बुरी तरह हारे ट्रंप

अमेरिकी राजनीति के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक डॉनल्ड ट्रंप के लिए उनके अपने होमटर फ्लोरिडा से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने रिपब्लिकन खेमे में खलबली मचा दी है। 24 मार्च को हुए फ्लोरिडा के विशेष विधाई चुनावों यानी स्पेशल लेजिसलेटिव इलेक्शंस के नतीजों ने ना केवल ट्रंप को व्यक्तिगत झटका दिया है बल्कि आगामी 2026 के मध्यावधि चुनावों के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है।

इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला परिणाम फ्लोरिडा हाउस डिस्ट्रिक्ट 87 से आया है। यह वही इलाका है जहां डॉनल्ड ट्रंप का आलीशान प्राइवेट रिसोर्ट मारेलागो स्थित है। ट्रंप यहां के रजिस्टर्ड मतदाता भी हैं और उन्होंने अपनी पत्नी मेलानिया और बेटे के साथ यहीं मतदान किया था। इसके बावजूद इस सीट पर डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार एमली ग्रेगरी ने शानदार जीत हासिल की है। ग्रेगरी ने ट्रंप द्वारा व्यक्तिगत रूप से समर्थित रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन मेपल्स को कड़े मुकाबले में हरा दिया।

यह हार इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि 2024 के आम चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी ने इसी क्षेत्र को लगभग 19% के बाहरी अंतर से जीता था। महज 2 साल के भीतर इतने बड़े मार्जिन का खत्म होना और सीट का विपक्षी पाली में जाना राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर रहा है। फ्लोरिडा में रिपब्लिकन पार्टी को केवल एक नहीं बल्कि दो बड़े झटके लगे हैं। डेमोक्रेट्स ने दो ऐसी सीटें रिपब्लिकन के कब्जे से छीन ली है जो लंबे समय से उनका गढ़ मानी जाती थी। हाउस डिस्ट्रिक्ट 87 यानी पाम बीच जहां से एमली ग्रेगरी ने जीत हासिल की है। वहीं स्टेट सीने डिस्ट्रिक्ट 14 यानी कि टैंपा से डेमोक्रेट ब्रायन नाथन ने जीत दर्ज की है। टैंपा की जीत भी कम महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि यह क्षेत्र रिपब्लिकन राजनीति का एक मजबूत केंद्र रहा है।

इन दोनों सीटों पर मिली जीत ने फ्लोरिडा के राजनीतिक मानचित्र पर डेमोक्रेट्स की वापसी के संकेत दिए हैं। ट्रंप की इस हार को उनकी गिरती राष्ट्रीय लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल ही में जारी एक सर्वेक्षण के अनुसार ट्रंप की जॉब अप्रूवल रेटिंग गिरकर 36% के इनिशियली रिकॉर्ड स्तर पर गिर गई है। क्योंकि जानकारों का मानना है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के कारण अमेरिका में गैस की कीमतें आसमान छू रही है और महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है।

ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति और आर्थिक फैसलों से ना केवल निर्दलीय मतदाता बल्कि उनके अपने कट्टर समर्थक भी अब दूरी बनाते हुए दिख रहे हैं। ट्रंप की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा दं पर इस विशेष चुनाव को ट्रंप के लिए एक लिटमस टेस्ट माना जा रहा था। उन्होंने खुद जॉन मेपल्स का समर्थन किया था। ट्रंप का तर्क था कि उनके होमवर्क पर जीत उनकी नीतियों पर जनता की मोहर होगी। हालांकि परिणाम इसके बिल्कुल उलट रहे।

मतदाताओं ने ट्रंप के व्यक्तिगत प्रभाव के बजाय स्थानीय मुद्दों और बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता को प्राथमिकता दी। हालांकि इन दो सीटों के हारने से फ्लोरिडा विधानसभा में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत खत्म नहीं हुआ है।

लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्व बहुत बड़ा है। यह जीत डेमोक्रेट्स के लिए एक टॉनिक का काम करेगी जो पिछले कुछ समय से फ्लो में अपनी जमीन तलाश रहे थे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर ट्रंप अपने पड़ोस के मतदाताओं को नहीं समझा पा रहे तो नवंबर 2026 में होने वाले पूरे देश के चुनाव उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। फ्लोडा के इन परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी राजनीति की हवा अब धीरे-धीरे बदल रही है। जिसका कारण साफ तौर पर ट्रंप की नई और आक्रामक नीतियों को माना जा रहा है।

मिडिल ईस्ट में जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच ईरान ने इसराइल और इलाके में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर और की 80वीं विनाशकारी लहर दाग दी है। l ट्रू प्रॉमिस फोर के तहत किए गए इस ताजा हमले ने रक्षा विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है क्योंकि ईरान ने इस बार अपनी की मारक क्षमता और वॉरहेड की तकनीक में बुनियादी बदलाव किए हैं।

ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स यानी पासदार इस्लाम के अनुसार आज सुबह दागी गई की इस असीक्ष खेप का मुख्य लक्ष्य उत्तरी इसराइल के सैन्य जमावड़े वाले क्षेत्र यानी तेलबीव का बाहरी इलाका और किरियत श्रमों में रहे। इसके अलावा फारस की खाड़ी में कई अन्य ठिकानों को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई। इसी बीच जिन जगहों पर ईरान ने हमले किए वहां पर एयर डिफेंस सिस्टम थोड़ा सा संघर्ष करता हुआ नजर आया।

ईरान की क्लस्टर मिसाइलों की नीति में बड़ा बदलाव। इस हमले की सबसे चौंकाने वाली बात ईरान द्वारा अपनी क्लस्टर मिसाइल तकनीक में किया गया एक परिवर्तन है। सैन्य विश्लेषकों ने मलवे के अध्ययन और रडार डाटा से पुष्टि की है कि ईरान ने अब पारंपरिक क्लस्टर वॉर हेड का तरीका बदल दिया है। पहले की तकनीक में एक मिसाइल वॉर हेड के भीतर दर्जनों छोटे-छोटे सबनेशन होते थे।

जिनका वजन लगभग 2.5 से 3 किग्र होता था। इनका उद्देश्य एक बड़े और खुले क्षेत्र में बिखराव पैदा कर जनहानि करना था। लेकिन अब ईरान ने चार बड़े वाली नई प्रणाली अपनाई है। इस नई तकनीक के तहत हवा में फटने के बाद केवल चार टुकड़ों में विभाजित होती है। लेकिन इसमें से प्रत्येक का वजन 100-100 कि.ग्र. है। यह बदलाव कई कारणों से बेहद खतरनाक माना जा रहा है। 100 कि.ग्र. के यह भारी अब केवल खुले मैदानों तक सीमित नहीं रहते बल्कि यह कंक्रीट की छतों, सैन्य बंकरों और मजबूत इमारतों को भी पूरी तरह से नष्ट करने की क्षमता रखते हैं।

इजरायली वायु रक्षा प्रणालियों के लिए छोटे बमों की तुलना में इन चार भारी और तेज रफ्तार गिरते को रोकना और ज्यादा कठिन हो गया है। विस्फोटक हवा में अलग होने के बाद अलग-अलग कोणों से अपने लक्ष्य पर गिरते हैं। कुरम शहर और खेबशीगंज जैसी उन्नत में इस तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है। 100 किलो के चार अलग-अलग धमाके एक ही लक्ष्य के आसपास के बड़े क्षेत्र को मलवे के ढेर में बदलने के लिए पर्याप्त है। ईरान ने पिछले 24 घंटों में इसराइल पर भारी हमले किए। जिनमें प्रति घंटे औसतन 10 मिसाइलें दागी जाने की खबरें हैं।

जी हां, इन हमलों से तेलवी और बेनीब्राक जैसे शहरों में बड़े धमाके हुए हैं और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार इस हालिया हमले में करीब 200 लोग घायल हुए हैं। इससे पहले के हमलों में भी कई नागरिक और बच्चे घायल हुए थे। कुल मिलाकर ईरान जो है वह इसराइल पर लगातार हमलावर हुए हैं और वह अब औसतन 1 घंटे में 20 दाग रहा है। ई

रान के इस 80वें हमले के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में हाई अलर्ट की स्थिति है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा है कि वह स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है क्योंकि ना सिर्फ इसराइल बल्कि हाल ही में ईरान के पड़ोसी देशों पर भी हमले किए गए हैं। युद्ध की इस नई तकनीक ने रक्षा विशेषज्ञों के बीच नई बहस छेड़ दी है। 100 किलो के इन विस्फोटकों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान अब केवल मनोवैज्ञानिक दबाव नहीं बल्कि भारी बुनियादी ढांचे की तबाही पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

अगले कुछ घंटे इस इलाके की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों पक्ष अगली चाल की तैयारी में जुटे हुए हैं। खास बात यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में 5 दिनों तक हमले रोकने की बात कही। लेकिन बावजूद इसके ईरान नहीं रुका और उसने कहा कि जब तक उसे पूरी तरह से सीज फायर की गारंटी नहीं मिल जाती और भविष्य में कोई भी हमला नहीं होगा

इसकी गारंटी नहीं मिल जाती तब तक वो हमले जारी रखेगा। मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव और युद्ध के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए 15 सूत्रीय योजना पेश की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका जल्द से जल्द इस युद्ध से बाहर निकलना चाहता है और इसके लिए ट्रंप प्रशासन ने 1 महीने के तत्काल सीज वायर का प्रस्ताव रखा है।

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