यानी कि हिरशिमा और नगासाकी में मारे गए लोगों की याद में। ये है ईरान की। और इसके साथ जुड़ा संदेश सिर्फ एक साधारण सैन्य बयान नहीं बल्कि एक गहरी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ईरान कंसुलेट हैदराबाद द्वारा किया गया यह दावा कि ईरानी सशस्त्र बल कई देशों की ओर से लड़ रहे हैं।
दरअसल ईरान की उस सोच को दर्शाता है जिसमें वह खुद को केवल एक राष्ट्र नहीं बल्कि पश्चिमी दबाव और हस्तक्षेप के खिलाफ खड़े एक बड़े प्रतिरोध के रूप में पेश करता है। इस पोस्ट में हिरशिमा और नागासाकी का संदर्भ देकर ईरान एक नैतिक और ऐतिहासिक संदेश भी देने की कोशिश करता दिखता है। यानी यह संघर्ष सिर्फ आज का नहीं बल्कि उन वैश्विक अन्यायों की याद से जुड़ा है जहां शक्तिशाली देशों ने भारी विनाश किया।
आपको बता दें कि के दौरान 1945 तक जापान और मित्र राष्ट्र जैसे कि अमेरिका, ब्रिटेन इनके बीच भयंकर लड़ाई चल रही थी। जापान हार मानने को तैयार नहीं था। इसलिए अमेरिका ने जल्दी खत्म करने के लिए एक खतरनाक फैसला लिया। का इस्तेमाल। हिरशिमा पर 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के शहर हिरशिमा पर पहला परमाणु बम गिराया। इस का नाम था लिटिल बॉय।
यह अमेरिकी विमान एनोला गे से गिराया गया। इसका प्रभाव यह हुआ कि कुछ ही सेकंड में पूरा शहर तबाह हो गया। लगभग 7000 से 80 हजार लोग तुरंत मारे गए। लाखों लोग घायल हुए और बाद में से मरते चले गए। इसके बाद नगासाकी पर हमला हुआ 9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने दूसरा नगासाकी पर गिराया। इस का नाम था फैट मैन। इसका प्रभाव यह हुआ कि लगभग 400 लोग तुरंत मारे गए। हजारों लोग बाद में और बीमारियों से मर गए। इन दोनों हमलों के बाद जापान ने 15 अगस्त 1945 को आत्मसमर्पण कर दिया। इसके साथ ही द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो गया।
दुनिया ने पहली बार परमाणु हथियारों की भयानक शक्ति देखी। अब ईरान की मिसाइल पर जो संदेश आपने देखा वो इसी भयावता के जवाब में देखा जा रहा है। ईरान खुद को एक ऐसे देश के रूप में प्रस्तुत करता है जो जवाबी कारवाई और न्याय की बात करता है ना कि आक्रामक विस्तार की। हालिया घटनाओं में ईरान ने यह भी संकेत दिया कि वह अपनी सैन्य पहुंच और क्षमता दिखाकर विरोधियों को रोकना चाहता है ताकि भविष्य में उस पर सीधे हमले ना हो और एक संतुलन बना रहे।
इस सबके बीच एक दिलचस्प तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में ईरान की आईआरजीसी का एक जवान बैलेस्टिक मिसाइल पर स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेस की तस्वीर [संगीत] चिपकाता दिख रहा है। पहली नजर में अजीब दिख सकता है लेकिन इसके पीछे एक खास संदेश छिपा है। दरअसल पेड्रो सांचेस उन गिने-चुने पश्चिमी नेताओं में शामिल है जिन्होंने अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की खुलकर आलोचना की। जब ज्यादातर पश्चिमी देश या तो खामोश रहे या अमेरिका के समर्थन में खड़े नजर आए तब सांचेस ने साफ कहा कि यह युद्ध गलत दिशा में जा रहा है।
ईरान ने उनके इस रुख को सकारात्मक नजरिए से देखा और आम लोगों के साथ-साथ सरकारी हलकों में भी इसे सराहा गया। इसी समर्थन को अलग अंदाज में दिखाने के लिए ईरानी जवानों ने यह तरीका अपनाया। पर सांचेस की तस्वीर लगाना उनके प्रति समर्थन और दोस्ती का प्रतीक माना जा रहा है। एक तरह से यह संदेश कि जो ईरान के साथ खड़ा है उसे ईरान भी अपना मानता है। चाहे [संगीत] वो किसी भी देश से क्यों ना हो। यानी साफ है कि ईरान सिर्फ नहीं लड़ रहा बल्कि एक विचारधारा भी पेश कर रहा है।
जहां शक्ति का जवाब शक्ति से और अन्याय का जवाब प्रतिरोध से देने की बात कही जा रही है। और यही कारण है कि ईरान खुद को आक्रामक ताकत नहीं बल्कि संतुलन बनाने वाली शक्ति के रूप में दुनिया के सामने दिखाने की कोशिश कर रहा है।
