अगला अयातुल्लाह कोई भी हो!’ईरान पर ट्रंप ने ये क्या कह दिया?

दुनिया के 20% तेल के रास्ते को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसी बात कह दी है जिसने कूटनीति के सारे नियम तोड़ दिए हैं। ट्रंप का कहना है कि इस अहम समुद्री रास्ते को वो और ईरान के अयातुल्लाह मिलकर चलाएंगे। लेकिन इसके आगे ट्रंप ने जो कहा वह सुनकर आप हैरान रह जाएंगे।

ट्रंप ने कहा मैं और अयातुल्लाह चाहे वो अयातुल्लाह जो भी हो चाहे अगला अयातुल्लाह जो भी हो। अब सवाल यह है कि क्या ट्रंप ईरान का मजाक उड़ा रहे हैं या फिर यह इस बात का इशारा है कि ईरान में कोई बड़ा लीडर बचा ही नहीं। नमस्कार, मैं हूं सिद्धार्थ प्रकाश। पश्चिम एशिया में युद्ध की आग भड़की हुई है। अमेरिका और ईरान एक दूसरे के के प्यासे हैं। लेकिन इसी बीच डोनल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होमस को लेकर एक बेहद अजीबोगरीब बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह अहम रास्ता बहुत जल्द खुलने वाला है और इसे अमेरिका और ईरान जॉइंटली कंट्रोल करेंगे।

लेकिन ट्रंप के बयान का सबसे सनसनीखेज हिस्सा वो था जहां उन्होंने अयातुल्लाह का जिक्र किया। ट्रंप ने बहुत ही बेपरवाह और आक्रामक अंदाज में कहा कि इसे मैं और अयातुल्लाह कंट्रोल करेंगे। चाहे वह अयातुल्लाह कोई भी हो या अगला अयातुल्लाह कोई भी हो। आखिर अमेरिका के राष्ट्रपति को यह क्यों नहीं पता या वो यह क्यों नहीं जताना चाहते कि वह ईरान के किस नेता से बात कर रहे हैं। इस एक लाइन के पीछे बहुत गहरा और खौफनाक मैसेज छिपा है। ट्रंप ने खुद कहा कि अमेरिका और इजराइल के शुरुआती हमलों में ईरान की टॉप लीडरशिप खत्म हो चुकी है।

वहां अपने आप ही एक रिजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन हो चुका है। जब ट्रंप कहते हैं कि चाहे अयातुल्लाह जो भी हो तो वह एक तरह से ईरान की बची खुची सत्ता को नीचा दिखा रहे हैं। वो दुनिया को बता रहे हैं कि ईरान का सिस्टम इतना तबाह हो चुका है कि उन्हें खुद नहीं पता कि अब वहां फैसले कौन ले रहा है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुस्तफा खामी नहीं है। लेकिन ट्रंप के लिए यह नाम मायने नहीं रखता। उनका सीधा मतलब है कि कुर्सी पर चाहे जो भी आकर बैठे डील तो मेरे हिसाब से ही होगी। स्ट्रेट ऑफ होमस वो रास्ता है जहां से हर रोज डेढ़ करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है। इस रास्ते का बंद होना ग्लोबल इकॉनमी के लिए बड़ा खतरा है।

ट्रंप एक पक्के बिजनेसमैन की तरह सोच रहे हैं। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि ईरान की गद्दी पर कौन बैठा है। उन्हें सिर्फ तेल का रास्ता चालू चाहिए। इसलिए ट्रंप ने अपनी सेना को ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला करने से 5 दिन के लिए रोक दिया है।

उनका दावा है कि जिन लोगों से वो डील कर रहे हैं वो समझदार हैं और बातचीत बहुत अच्छी चल रही है। यह ट्रंप का टिपिकल स्टाइल है। एक तरफ वो सामने वाले की लीडरशिप का मजाक उड़ाते हैं और दूसरी तरफ वो उसी के साथ सबसे बड़ी डील साइन करने की बात करते हैं।

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