ईरान की हुंकार, अमेरिका की ललकार और बीच में दहकता हुआ मिडिल ईस्ट। क्या दुनिया तीसरे विश्व की दहलीज पर खड़ी है? तेहरान से जो खबरें आ रही है, उन्होंने वाशिंगटन से लेकर यरूशलम तक खलबली मचा दी है।
ईरान ने साफ कर दिया है कि अब समझौता शर्तों पर नहीं बल्कि गारंटी पर होगा। यह कोई मामूली विराम की बात नहीं है। ईरान ने अमेरिका और इजराइल के सामने रख दी है एक ऐसी असंभव लिस्ट जिसने कूटनीति के गलियारों में आग लगा दी है। ईरान की वो शर्तें जिन्होंने हड़कंप मचा दिया है। आइए जानते हैं। ईरान का कहना है जुबानी जमा खर्च नहीं चलेगा। भविष्य के हमलों के खिलाफ लिखित और बाध्यकारी गारंटी चाहिए।
वहीं अब तक हुए नुकसान की पाईपाई का हिसाब होगा। ईरान ने सीधे तौर पर हरजाने की मांग कर दी है और सबसे बड़ी मांग मिडिल ईस्ट से अमेरिकी सेना बोरिया बिस्तर समेट कर बाहर निकले। यही नहीं स्टेट ऑफ होरमूस जैसे रणनीतिक रास्तों पर ईरान का पूरी तरह कंट्रोल हो।
अब सोचिए अगर होरमूस की लहरों पर ईरान की मर्जी चली तो दुनिया की ऊर्जा सप्लाई और ग्लोबल इकॉनमी का क्या होगा? पेट्रोल डीजल की कीमतें रॉकेट बन जाएंगी।
एक तरफ इजराइल झुकने को तैयार नहीं तो दूसरी तरफ अमेरिका भी पीछे हटने को राजी नहीं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या यह डिप्लोमेटिक डेडलॉक किसी बड़े धमाके का संकेत है? जरा देखिए इस रिपोर्ट में।
मध्य पूर्व में एक बड़ी वृद्धि देखी [संगीत] जा रही है क्योंकि ईरान ने समाप्त करने के लिए छह गैर प्रक्राम्य शर्तें रखी हैं और वे इस क्षेत्र को पूरी तरह से नया रूप दे सकती हैं। जब तक संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल शक्ति के नए संतुलन को स्वीकार नहीं करते तब तक कोई संघर्ष विराम नहीं कोई समझौता नहीं होगा। क्षेत्रीय मीडिया के माध्यम से साझा किए गए बयानों के अनुसार तेहरान की मांगे एक साधारण संघर्ष विराम से कहीं आगे की हैं। यह को अस्थाई रूप से रोकने के बारे में नहीं है।
यह इसे ईरान की शर्तों पर समाप्त करने के बारे में है। सबसे पहले ईरान बाध्यकारी गारंटी चाहता है कि ऐसा युद्ध फिर कभी नहीं होगा। वादे नहीं बल्कि लागू करने योग्य आश्वासन। दूसरा पूरे मध्यपूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह से बंद करना।
खाड़ी से लेकर इराक तक ईरान इन ठिकानों को दबाव और घेराबंदी के उपकरण के रूप में देखता है। तीसरा युद्ध का हर्जाना। तेहरान संघर्ष के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग कर रहा है। यह एक दुर्लभ और साहसी कदम है जो सीधे तौर पर अमेरिकी और इजरायली जवाबदेही को चुनौती देता है।
लेकिन बात यहीं नहीं रुकती। ईरान पश्चिमी एशिया में अपने सहयोगी समूहों के खिलाफ अभियानों सहित सभी क्षेत्रीय युद्धों को समाप्त करने का आवाहन कर रहा है। फिर एक महत्वपूर्ण वैश्विक फ्लैश पॉइंट आता है। हॉर्मूस जलडमरू मध्य। ईरान जलडमरू मध्य पर शासन करने वाला एक नया कानूनी शासन चाहता है जिससे दुनिया का लगभग 20% तेल बहता है। यह नियंत्रण को पश्चिमी नौसैनिक प्रभुत्व से हटाकर ईरान के करीब ला सकता [संगीत] है और अंत में सबसे विवादास्पद मांगों में से एक ईरान उस पर कारवाई की मांग कर रहा है जिसे वह शत्रुतापूर्ण मीडिया कहता है जिसमें उन व्यक्तियों का संभावित प्रत्यार्पण भी शामिल है जिन पर वह ईरान विरोधी प्रचार का आरोप लगाता है।
कुल मिलाकर यह मांगे एक स्पष्ट तस्वीर पेश करती हैं। ईरान त्वरित संघर्ष विराम की तलाश में नहीं है। वह दीर्घकालिक भू राजनैतिक पुनर्गठन रिसेट पर जोर दे रहा है। जबकि अमेरिका ने कथित तौर पर बिना शर्त रियायतों के लिए दबाव डाला है।
तेहरान अपने स्वयं के अधिकतम दबाव के साथ जवाब दे रहा है। संदेश स्पष्ट है यह युद्ध हाथ मिलाने से नहीं बल्कि सत्ता में बदलाव के साथ समाप्त होगा और
