। दोस्तों, ईरान भारत के लिए स्टेट ऑफ हॉर्मोस का रास्ता खोलेगा या नहीं खोलेगा। पीएम मोदी से दोबारा बातचीत के बाद ईरान की तरफ से क्या स्टेटमेंट आई है? पीएम मोदी के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी फोन घुमाया। लेकिन ईरान ने अपनी स्टेटमेंट में क्या दो टूक बयान दिया है? भारत के लिए भी और दुनिया के लिए भी।
क्या बोला है ईरान की पूरी स्टेटमेंट आपको दिखाएंगे। पहले बात करते हैं जिस नेता की ईगो ने पूरी दुनिया में रायता फैला दिया है। पूरी दुनिया परेशान है। अर्थव्यवस्थाएं तबाही की कगार पर आ गई हैं। तो उस नेता ने अब क्या नया तबाही वाला अल्टीमेटम दिया है जो और ज्यादा रायता फैलाने वाला है। हो सकता है अमेरिका को इससे ज्यादा नुकसान ना हो लेकिन खाड़ी देशों में भयंकर तबाही मच सकती है। ईरान के पड़ोसी देशों के हाथ पैर फूल गए होंगे।
क्या बयान दिया है ट्रंप ने नया? आपने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया स्टेट ऑफ फॉर्मस को लेकर और क्या बोला है बयान आप सुन सकते हैं ट्रंप ने क्या लिखा है इस बयान में आपको बता देते हैं उसके बाद ईरान का जवाब भी सामने आया है। ट्रंप ने 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर ईरान 48 घंटे के भीतर होम को नहीं खोलता है तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट पर हमला करेगा और उन्हें तबाह कर देगा और शुरुआत सबसे बड़े प्लांट से होगी।
यानी पावर प्लांट उड़ाने की चेतावनी दे रहे हैं ट्रंप। इससे पहले जब ईरान पर अटैक किया गया था, इजराइल ने जो अटैक किया था ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर, उसके बाद ईरान ने जब क़तर पर अटैक किया था, क़तर के सबसे बड़े प्लांट पर अटैक कर दिया था। तो उसके बाद ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर दोबारा ऐसा किया तो ऐसा हाल कर देंगे ईरान का कि दोबारा विकास करना मुश्किल हो जाएगा। दोबारा खड़ा होना मुश्किल हो जाएगा ईरान के लिए।
अब पावर प्लांट उड़ाने की चेतावनी दे रहे हैं। तो ईरान की तरफ से भी जवाब सामने आया है। ईरान ने क्या चेतावनी दी है? दैनिक भास्कर की खबर क्या कहती है? ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके पावर प्लांट को निशाना बनाया गया तो वो मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजराइल से जुड़े सभी ऊर्जा ढांचे पर हमला करेगा। ईरान के खात अल अनबिया सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फाघारी ने कहा कि ईरान अमेरिका और इजराइल से जुड़े समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी हमला करेगा। तो साफ तौर पर ईरान ने भी कहा है कि अगर आपने हमारे पावर प्लांट पर हमला किया तो फिर खाड़ी देशों में आपके जो वाटर प्लांट है उनको भी हम उड़ा देंगे।
दोस्तों इस पूरी लड़ाई में अमेरिका तक तो आग नहीं जाएगी क्योंकि अमेरिका तक ईरान की मिसाइल नहीं जा सकती। लेकिन इजराइल में तबाही मच सकती है और खाड़ी देश खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकाने टारगेट पर आ सकते हैं ईरान के। ईरान ने साफ कर रखा है भैया हम डूबेंगे तो तुम्हें भी ले डूबेंगे। वो कहावत है कि हम डूबेंगे तो सनम तुम्हें भी ले डूबेंगे। तो उस कहावत पर काम कर रहा है ईरान। इसीलिए बहुत सारे देशों के तो बयान भी सामने आने लगे हैं। अमेरिका से कहते हैं कि भैया रुक जाओ। क्यों हमारा नुकसान करा रहे हो? जो क़तर का सबसे बड़ा गैस प्लांट था। 17% हिस्सा डैमेज हो गया। 5 साल लग सकते हैं ठीक होने में और पूरी दुनिया में गैस सप्लाई प्रभावित हो रही है। अमेरिका की दादागिरी उसके साथियों पर भी भारी पड़ रही है और भारत जैसे तटस्थ देशों पर भी भारी पड़ रही है।
इसीलिए पीएम मोदी को ईरान के राष्ट्रपति को दोबारा फोन करना पड़ा क्योंकि गैस और कच्चे तेल का संकट आ सकता है। भारत के 20 से ज्यादा जहाज अभी फंसे हुए हैं। इसीलिए पीएम मोदी ने दोबारा फोन किया क्योंकि गैस का संकट भविष्य में आ सकता है। इसीलिए पीएम मोदी ने बातचीत की। लेकिन बातचीत में क्या नतीजा निकला? ईरान की तरफ से स्टेटमेंट जारी की गई है। ईरान की एंबेसी ने बताया कि एस जयशंकर के साथ क्या बात हुई और पीएम मोदी के साथ क्या बात हुई। ये जो पोस्ट किया गया है ईरान की तरफ से उसका हिंदी अनुवाद मैं आपको बता देता हूं। क्या बातचीत हुई है पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति की। ईरान की तरफ से स्टेटमेंट पे कहा गया ईरान के इस्लामिक गणराज्य के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजकियन ने शनिवार 21 मार्च 2026 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालात पर चर्चा की।
खासकर अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर जारी सैन्य हमलों के संदर्भ में आगे क्या कहा गया है? राष्ट्रपति पिजस्कियन ने हमलों, गैरकानूनी कारवाही और अपराधों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि ईरान ने युद्ध की शुरुआत नहीं की। उन्होंने कहा कि हमलावरों ने बिना किसी ठोस कारण, तर्क या कानूनी आधार के उस समय ईरान पर हमला किया जब परमाणु बातचीत जारी थी। इन हमलों में इस्लामिक क्रांति के सर्वोच्च नेता, कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और कई निर्दोष नागरिक जिनमें मासूम स्कूली बच्चे भी शामिल हैं। वो मारे गए। साथ ही सार्वजनिक ढांचे को भी निशाना बनाया गया। राष्ट्रपति पिजकेन ने आगे बताया कि अमेरिका ने मिनाद के एक स्कूल को निशाना बनाया जो पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों से किया गया हमला था। इस हमले में 168 मासूम स्कूली बच्चों की दुखद मौत हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान को क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने वाला बताना गलत है। आगे ईरान की स्टेटमेंट में कहा गया कि असल में इजराइल, लेबनान, गाजा, ईरान, इराक, क़तर और अन्य जगहों पर हमले और हत्याएं करता है और इसे सुरक्षा और शांति के नाम पर सही ठहराता है। जबकि इससे क्षेत्र में अशांति और संघर्ष बढ़ता है। राष्ट्रपति ने दोहराया कि ईरान हमेशा दुनिया के नेताओं के साथ बातचीत के लिए तैयार है। चाहे फोन पर हो या आमने-सामने। जैसे कि संयुक्त राष्ट्र के दौरान। ईरान अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम की जांच और निगरानी के लिए तैयार है। उन्होंने अमेरिका और इजराइल की कारवाही को अमानवीय और अनैतिक बताया और इसकी कड़ी निंदा की। राष्ट्रपति ने पश्चिम एशिया के देशों के साथ मिलकर एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा बनाने का प्रस्ताव भी दिया जिससे बिना बाहरी हस्तक्षेप के शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में युद्ध और तनाव खत्म करने के लिए जरूरी है कि अमेरिका और इजराइल तुरंत हमले बंद करें और भविष्य में ऐसे हमले ना हो इसकी गारंटी दी जाए। भारत की ब्रिक्स की अध्यक्षता का जिक्र करते हुए पेज ने कहा कि यह समूह ईरान पर हो रहे हमलों को रोकने क्षेत्रीय व वैश्विक शांति बनाए रखने में स्वतंत्र भूमिका निभाए। तो ईरान की हमेशा डिमांड रही है। पीएम मोदी को भी बोला है। यह उम्मीद करता है ईरान कि ब्रिक्स इसकी निंदा करें। इजराइल और अमेरिका ने जो अटैक किया है, bricks की अगली मीटिंग की अध्यक्षता भारत के पास है। तो ईरान यह उम्मीद करता है कि भारत इसकी खुलकर निंदा करे और ब्रिक्स की तरफ से कोई स्टेटमेंट जारी की जाए। आगे इस स्टेटमेंट में क्या कहा गया है?
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईद उलफितर और नौरोज़ के अवसर पर ईरान के राष्ट्रपति सरकार और वहां की जनता को शुभकामनाएं दी और उनके लिए शांति और खुशहाली भरे साल की कामना की। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में ऊर्जा से जुड़े ढांचे पर होने वाले हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले वैश्विक खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और दुनिया भर के कृषि निर्यात को प्रभावित करते हैं। तो खाद की सप्लाई को लेकर भी संकट आ गया है। गैस की सप्लाई को लेकर भी संकट आ गया है। इसीलिए पीएम मोदी ने ऊर्जा ठिकानों पर हमलों की निंदा की है। यह ईरान की तरफ से भी जानकारी दी गई है।
पीएम मोदी ने भी इससे पहले ट्वीट किया था और इस बात की जानकारी दी थी। पीएम मोदी के अलावा विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ क्या बातचीत हुई वह भी काफी अहम है। पिछली बार भी पीएम मोदी ने जब बात की थी उसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री से बात की थी और भारत के दो जहाज सुरक्षित पहुंच गए थे। स्टेट ऑफ हॉर्मस से दो जहाजों को रास्ता दिया गया था जो गैस की सप्लाई लेकर आए थे। हॉर्मज वाले रास्ते पर क्या बोला है ईरान ने? भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरा के साथ फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालात पर चर्चा की। खासकर अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ जारी सैन्य हमलों और उनके प्रभाव पर साथ ही दोनों देशों के आपसी संबंध और सहयोग पर भी बातचीत हुई।
ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका और इजराइल के हमलों और ईरान की जवाबी कारवाही से जुड़े हालात की जानकारी देते हुए कहा कि स्वतंत्र देशों को हमलावरों और युद्ध शुरू करने वालों पर दबाव बनाना चाहिए ताकि इन हमलों को रोका जा सके। भविष्य में ईरान की सुप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लंघन दोबारा ना हो। पर्शियन गल्फ और स्टेट और फोरमूस की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए अराची ने कहा कि स्थिति अमेरिका और इजराइल की आक्रामक नीतियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि हालात सामान्य तभी होंगे जब हमले बंद होंगे और किसी भी युद्ध विराम के साथ यह गारंटी भी जरूरी है कि आगे ऐसे हमले दोबारा ना हो। यानी स्टेट ऑफ फोरमूस को लेकर ईरान ने दो टूक बोल दिया है कि हालात सामान्य तभी होंगे जब हमले बंद होंगे। यानी ईरान फिलहाल स्टेट ऑफ फॉर्मूस से किसी को भी रास्ता देने को तैयार नहीं है। पूरी तरह खोलने को तैयार नहीं है। जो अमेरिका ने अल्टीमेटम दिया है उसका असर फिलहाल दिखाई नहीं देता। ईरान खुलेआम चेतावनी दे रहा है कि अगर अमेरिका ने हमारे पावर प्लांट उड़ाए तो हम उनके वाटर प्लांट उड़ा देंगे। तो ईरान मुंहतोड़ जवाब देने का दावा करता है और यह भी दावा किया गया है ईरान की तरफ से कि 10 साल लड़ाई चले तब भी कोई समस्या नहीं है। यानी मामला अभी और ज्यादा बिगड़ सकता है। उम्मीद करते हैं कि पीएम मोदी के साथ जो बातचीत हुई तो भारत के कुछ जहाज निकलने का रास्ता ईरान दे दे तो भारत के लिए राहत की बात हो सकती है। जैसे पीएम मोदी ने पिछली बार फोन किया था।
विदेश मंत्री के साथ जो बातचीत हुई थी। उसके बाद कुछ जहाजों को निकलने का रास्ता हो सकता है ईरान दे दे तो भारत के लिए राहत की बात हो सकती है। बातचीत को लेकर क्या बोला है? ईरान ने आगे बातचीत को लेकर सकारात्मक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के विदेश मंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करना बहुत जरूरी है। ईरान और भारत के विदेश मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों के बीच बातचीत और संपर्क जारी रहेगा। साथ ही क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भी संवाद बनाए रखा जाएगा।
तो ईरान की स्टेटमेंट दिखाती है कि भारत के साथ ईरान को कोई समस्या तो नहीं है। लेकिन ईरान इस रणनीति पर काम कर रहा है कि बाकी देशों पर दबाव बनाया जाए। अगर स्टेट ऑफ फॉरमुज का रास्ता बंद किया जाता है तो अमेरिका पर बाकी देश दबाव बनाएंगे कि हमारे यहां ऐसे हालात हो गए हैं तो अमेरिका और इजराइल प्रेशर में आएंगे तो हो सकता है युद्ध विराम हो जाए।
