यह औरत तेहरान में थी और तेहरान को पता नहीं था। साल 2025 और 26 जब ईरान और इजराइल के बीच जंग छिड़ी तो दुनिया ने एक अजीब चीज देखी। इजरायली सीधे उन ठिकानों पर गिर रही थी जहां पहुंचना सेटेलाइट के लिए भी आसान नहीं था। बेस, फैक्ट्री, साइट्स। हर टारगेट ऐसे हिट हुआ जैसे किसी ने नक्शा बना कर दिया हो। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने अंदर से रास्ता दिखाया हो। इस पूरी तबाही की नींव रखी गई थी 7 साल पहले उस एक औरत के एक झूठ से। एक ऐसी औरत जिसे ईरान अपना दोस्त समझता था। इजराइल की सबसे खतरनाक जासूस निकली।
उसने एक ऐसे मिशन को अंजाम दिया जो इतिहास का सबसे बड़ा ह्यूमन इंटेलिजेंस बन गया। मगर एक दिन वो वक्त आया जब उसका चेहरा सफेद पड़ गया। वो डर से कांप रही थी। वो पकड़ी गई थी। हमारे पास तुम्हारी आवाज है। तुम्हारा मैसेज और तुम्हारा असली नाम। आईआरजीसी के इंटेरोगेशन रूम में उसके सामने थे उसके भेजे गए इंक्रिप्टेड मैसेजेस के प्रिंट आउट और बाहर निकलने का सिर्फ एक रास्ता वो झूठ जो उसने पिछले 7 सालों में बेहद बारीकी के साथ गुना था।
इस मुश्किल से वो कैसे बाहर आई? आखिर वो झूठ क्या था? सवाल यह नहीं कि वो कौन थी? सवाल यह कि ईरान जैसे देश में जहां हर किसी को शक की निगाहों से देखा जाता है। जहां कदम कदम पर आईआरजीसी के कैमरे हैं वो 7 साल तक बची कैसे रही? कैथरीन फेरे शक उसका पूरा नाम। यह हैरतंगेज कहानी सिर्फ एक जासूस की दास्तान नहीं है। यह साइकोलॉजिकल की मास्टर क्लास है। यह है जासूस एक तहरान।
यह कहानी सच्ची घटनाओं और पात्रों पर आधारित है। लेकिन कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए कहीं-कहीं काल्पनिकता का सहारा दिया गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। कैथरीन फ्रांस में जन्मी एक यहूदी लड़की जिसके परिवार ने इतिहास का सबसे बड़ा नरसंहार देखा था। जिसके दादा होलोकास्ट के चंगुल से बचकर निकले थे।
नाना ने हिटलर की फौज से लड़ाई लड़ी थी। वो बड़ी हुई अपने खून में दफन उस दर्द के साथ। मैं इतिहास दोहराने नहीं दूंगी। उसने लंदन से पढ़ाई, पत्रकार बनी, विश्लेषक बनी। लेकिन उसकी असली पहचान कुछ और थी। मिडिल ईस्ट में सत्ता का एक ही नियम है भरोसा और भरोसे का सबसे आसान रास्ता है धर्म। कैथरीन ने यही रास्ता चुना। वो यमन में हुती नेटवर्क में घुसी। एक मुस्लिम युवक से शादी की। सुन्नी इस्लाम कुबूल किया। दो बच्चे पैदा किए। मुस्लिम पति से तलाक लिया। लेकिन असली टारगेट अभी बाकी था। फिर उसने एक और बड़ा कदम उठाया।
उसने शिया इस्लाम अपनाने का ऐलान किया। शिया बनने का यह फैसला सिर्फ धार्मिक नहीं था। यह था ईरान के दरवाजे खोलने वाला पासपोर्ट। अब वो एक पश्चिमी पत्रकार थी जो ईरान का समर्थन करती है। ईरान को ऐसे लोग बहुत पसंद आते हैं जो पश्चिम की आलोचना करें और कैथरीन यह काम बेहद खूबसूरती से कर रही थी। जल्द ही उसके लेख ईरान के सबसे शक्तिशाली मंच पर छपने लगे। सुप्रीम लीडर अली खामनई की ऑफिशियल वेबसाइट पर वो ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी का इंटरव्यू ले रही थी।
इंटरव्यू के वक्त मेज पर उसका पर्स खुला है। पर्स के अंदर एक लाल पेन है। उस पेन में स्याही नहीं एक हाईटेक जीपीएस ट्रैकर था। रयासी जिस कमरे में बैठे थे, कैथरीन अपना वो पेन वहीं छोड़ आई थी। इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद को सीधे प्राइवेट सिंग रूम की लाइव ऑडियो फीड मिल रही थी। हर शब्द एक कोड था। हर मीटिंग एक चांस। कैथरीन जानती थी ईरान में घुसने का रास्ता नफरत से नहीं अकीदत से होकर गुजरता है।
और उसका असली खेल कैमरे बंद होने के बाद शुरू होता था। उसे धीरे-धीरे ईरान की सत्ता के सबसे गहरे रहस्यों तक पहुंचना था। ईरान में असली बातें कभी मीटिंग रूम में नहीं होती। वो होती हैं ड्राइंग रूम में चाय की मेज पर। और कैथरीन ने यही रास्ता चुना। उसने सुना कि कैसे जनरल्स रात में नेटांज के गेस्ट हाउस में रहते हैं। सुना कि सुलेमानी का ट्रैवल प्लान क्या है? सुना कि खामनई का इनर सर्किल कैसे काम करता है। मेरे पति तो अक्सर नेतांश के गेस्ट हाउस में रहते हैं। वो क्या है ना काम बहुत बढ़ गया है। नेतांज हां वही न्यूक्लियर साइट। उस पल कैथरीन ने कुछ नहीं कहा लेकिन उसकी घड़ी में लगा माइक्रो कैमरा सब रिकॉर्ड कर रहा था। कुछ सेकंड में उसने वो जानकारी हासिल कर ली जो इजराइल के सेटेलाइट भी नहीं देख पा रहे थे। फोडो प्लांट का अंडरग्राउंड मैप।
कैथरीन ने बातोंबातों में वैज्ञानिक के फोन का पासवर्ड देख लिया और उसे सीधा मोसाद के सर्वर पर क्लोन कर दिया। यह हनी ट्रैप नहीं था। यह इंटेलेक्चुअल ट्रैप था। उसने नहीं उठाए। उसने भरोसा जीता और यह भरोसा ईरान के हर राज तक पहुंच गया। उसकी पहचान को लेकर ईरान के लीडर और जनरल धोखा खा चुके थे। टारगेट कंफर्म।
हर रात कई राज। तेहरान से तेल लवीब तक पहुंच रहे थे। यह सिर्फ जासूसी नहीं थी। यह टारगेटेड एलिमिनेशन की तैयारी थी। अजीब है। जहां-जहां यह औरत जाती है, कुछ महीनों बाद वहीं हादसा हो जाता है। कोइंसिडेंस नहीं वो कैथरीन नहीं थी, लेकिन यह एक चेतावनी जरूर थी। ईरान को शक हो चुका था और खेल अब ज्यादा खतरनाक होने वाला था। कैथरीन की आंखें भर आती हैं। फिर घड़ी पर नजर जाती है और वह उठ खड़ी होती है। ईरान में उसके सबसे बड़े इंटरव्यू का वक्त हो चला था। वो ईरान के शिखर पुरुष से मिल रही थी। क्या तुम्हें पता है डेथ ऑफ इजराइल का मतलब क्या है? जी हां, यह उन लोगों के खिलाफ है जो हमारी उम्मत को कमजोर करते हैं। हम बहुत जल्द यहूदियों को मिटा देंगे। उस रात मोसाद ने सीधे-सीधे सुन लिया ईरान के शासन का मकसद। फिर उसी रात कैथरीन ने सुनी दरवाजे पर दस्तक। कैथरीन का दिल थक सा हुआ। फिर फोन चेक हुआ तो सब खत्म। आपकी कुछ फाइलें चेक करनी है। इस वक्त रात के 2:00 बजे। कैथरीन का दिल धड़क रहा था। वो कैजुअली बात करना शुरू कर दिए।
आपको शक है मुझ पर? नहीं, बस रूटीन लेकिन आप बहुत क्लोज हो गई हैं सिस्टम के। ऑफिसर के जाने के बाद कैथरीन ने भले ही राहत की सांस ली थी, मगर सच यह था कि ऑफिसर को कुछ तो भनक लग चुकी थी। कैथरीन को भी खतरे की गंभीरता का अच्छी तरह एहसास हो चुका था। साल 2025 ईरान के भीतर एक के बाद एक रहस्यमय हमले होने लगे। इजराइल के स्ट्राइक्स बहुत प्रेसाइज थे। बहुत ज्यादा प्रिसाइज और हर हमले की सटीकता ईरानी सुरक्षा एजेंसियों के शक को यकीन में बदल रही थी कि जरूर कोई अंदर से यह सब करवा रहा है। हर अधिकारी की जांच, हर फोन टैब, हर विदेशी पत्रकार की फाइल खोली जा रही थी। तहकीकात में एक नाम बार-बार सामने आ रहा था। कैथरीन बेरोज शक्कर मिस कैथरीन।
आपको हमारे साथ चलना होगा। क्या बात है? कुछ सवाल है। यह पैगाम किसे भेजेगा? हम जानते हैं तुम मौसाद के लिए काम करती हो। अगर मैं मौसाद एजेंट होती तो क्या सुप्रीम लीडर की वेबसाइट पर लिखती? तुम बहुत चालाक हो। लेकिन यह तेहरान है। यहां जासूस ज्यादा देर नहीं जीते। और यहां झूठ भी जल्दी पकड़ा जाता है।
तो बताइए मेरा झूठ क्या है? तुम्हारा पार्टनर हमने पकड़ लिया है। राहुल पुनीत दस्तूर बॉलर्स कैथरीन कमरे से बाहर निकलती है उसके चेहरे पर तनाव दिखता है। वो बच गई थी लेकिन खेल यहां खत्म नहीं हुआ क्योंकि ईरान जब शक करता है तो शिकार को बहुत ज्यादा समय नहीं मिलता। आईआरजीसी ऑफिसर को जिस शख्स का कॉल आया वो कौन था? क्या कैथरीन ने खुद किसी को सेट करके रखा था? मूसाद के अधिकारियों को समझ आ चुका था खतरा बढ़ चुका है। तेहरान में अब हर सड़क पर खतरा था। हर चेक पोस्ट पर जा। जासूस की असली ताकत उसकी बंदूक नहीं होती। उसकी पहचान होती है और कैथरीन के पास पहचाने कई थी। कभी-कभी इतिहास बस एक मोहर से बदल जाता है।
चेकिंग करने वालों को क्या पता था कि उसने अभी-अभी ईरान की सबसे बड़ी जासूस को देश से बाहर जाने दिया है। वेलकम होम। कुछ हफ्तों बाद दुनिया ने एक चौंकाने वाला लेख पढ़ा। लेखक ने खुद अपनी पहचान उजागर की। कैथरीन बरेज़ शक का। मैं ना सुन्नी हूं ना शिया। मैं एक यहूदी हूं जिसने ईरान के दिल में 7 साल बिताए हैं और उनके सबसे बड़े राज दुनिया के सामने ला दिए। ईरान का सिस्टम हिल चुका था लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कैथरीन जा चुकी थी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही है। क्या कैथरीन वाकई मोसादक की एजेंट थी या यह सिर्फ एक राजनीतिक कहानी थी?
आज कैथरीन फेरे शक कहां है? किस पहचान में है कोई नहीं जानता। वो फिर एक नई पहचान एक नए चेहरे के साथ किसी नए मिशन पर हो सकती है। जासूसी की दुनिया में कभी-कभी गोलियां नहीं चलती।
