भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद फिजिशियन से बात की और उन्हें ईद की शुभकामनाएं दी। एक्सप्रेस की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, राष्ट्रपति पिज़िशियन से बात की और ईद की शुभकामनाएं दी। आशा है कि यह त्योहारी मौसम पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाए।
क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं और दुनिया भर में सप्लाई की चैन को बाधित करते हैं। नेविगेशन की स्वतंत्रता की रक्षा पर बात की और यह सुनिश्चित करने के महत्व को दोहराया कि शिपिंग के रास्ते खुले और सुरक्षित रहे। ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए ईरान के निरंतर समर्थन की सराहना की।
पीएम मोदी के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने भी ईरान को बधाई दी। रूसी विदेश मंत्रालय ने बताया कि पुतिन ने ईद के अवसर पर ईरानी नेताओं को बधाई दी और कहा कि मॉस्को तेहरान का एक वफादार मित्र और विश्वसनीय भागीदार बना हुआ है। रूस के मुसलमान अपने पूर्वजों की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान रखते हैं और अपने समुदायों और परिवारों में इस त्यौहार को व्यापक रूप से मनाते हैं।
पुतिन इस्लाम के उन अनुयायियों के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हैं जो अपने साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे हैं। पुतिन ईरान के अच्छे स्वास्थ्य, सफलता और ढेर सारी शुभकामनाओं की कामना करते हैं। इसी के साथ खबर आई कि ईरान के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील माने जाने वाले नेतांस केंद्र पर एक हमला हुआ।
न्यूज़ एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और इजराइल ने मिलकर नेतंस पर अटैक किया है। हालांकि ईरान के मीडिया का कहना है कि हमले से ईरान का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईरान की नेतांस न्यूक्लियर साइट तेहरान से लगभग 220 कि.मी. दक्षिण पूर्व में है और इसी साइट पर हमला किया गया है। हमले दोनों तरफ से जारी हैं। ईरान ने अमेरिका के सबसे मजबूत किले डिगो ग्रासिया पर अटैक किया है। हिंद महासागर में मौजूद यह टापू अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त बेस है। ईरान ने इस पर दो बैलेस्टिक मिसाइलें दागी हैं।
हालांकि दोनों में से कोई भी मिसाइल बेस पर नहीं लगी। लेकिन इससे ईरान की एक और छुपी हुई ताकत सामने आई है कि ईरान के पास लंबी दूरी की हैं। ईरान से डियगोल गार्सिया लगभग 4000 कि.मी. दूर है। ऐसे में यह तय है कि ईरान के पास सिर्फ इजराइल ही नहीं बल्कि डगो गार्सिया तक पहुंचने की क्षमता है। खैर, स्टेट ऑफ हारमोंस को लेकर जो विवाद चल रहा है, उस पर भी ईरान का जवाब सामने आया।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्षी ने एक इंटरव्यू में कहा कि हॉर्मूस बंद नहीं है। जो देश ईरान से संपर्क करेंगे उनके जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा। हमने इस रूट को बंद नहीं किया है। हमारी तरफ से यह खुला है। यह सिर्फ उन देशों के जहाजों के लिए बंद है जो हम पर हमला कर रहे हैं। ईरान का कहना है कि जो देश उनसे हॉर्मूस को लेकर बात करेगा उसके शिप गुजरने की इजाजत दी जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हॉर्मोस का जिक्र स्पष्ट रूप से नहीं किया लेकिन ईद की बधाई के साथ उम्मीद जताई कि जहाजों का रास्ता साफ किया जाए और दुनिया भर में सामानों की सप्लाई चलती रहे। बता दें कि व्यापार के लिए हॉर्मोस एक जरूरी मार्ग है। दुनिया भर में इसी रास्ते से तेल सप्लाई होती है। भारत में भी।
अमेरिका के एनर्जी इनफेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक दुनिया के कुल पेट्रोलियम में से करीब 20% स्टेट ऑफ हॉर्मोन्स से होकर गुजरता है। इस खबर में फिलहाल इतना ही। मेरा नाम है विभावरी। बाकी अपडेट्स के लिए देखते रहिए द लेलन टॉक।
