मोहम्मद दीपक केस मामले पर सुनवाई, पुलिस प्रोटेक्शन को लेकर क्या बोले जज।

मेरा नाम मोहम्मद दीपक है भाई। मोहम्मद दीपक है। पहले बात हो चुकी है इनके पास। हां बोला था इन्होंने। नाम से क्या लेना मेरा? उत्तराखंड हाईकोर्ट में इन दिनों चर्चित मोहम्मद दीपक मामले की सुनवाई चल रही है। दीपक कुमार जिन्हें सोशल मीडिया पर मोहम्मद दीपक कहा जाने लगा। हाल ही में एक विवाद के दौरान एक मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में और एक हिंदू संगठन के विरोध में खड़े हुए थे।

इस विवाद के बाद दीपक पर एक दर्ज की गई जिसमें उन पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने के आरोप लगाए गए। हालांकि दीपक का कहना है कि उनका मकसद किसी एक पक्ष का साथ देना नहीं बल्कि माहौल को शांत करना था। इस घटना के बाद वह तेजी से चर्चा में आए। कई लोगों ने उन्हें सौहार्द की मिसाल बताया लेकिन इसके साथ ही उन्हें कथित तौर पर भी मिलने लगी। इन्हीं हालात में दीपक कुमार हाई कोर्ट पहुंचे। उन्होंने अदालत में तीन बड़ी मांगे की। सबसे पहले कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए। उन्हें सुरक्षा दी जाए और जिन पुलिस अधिकारियों ने केसदर्ज किया है उनके खिलाफ जांच हो। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश थापियाल की बेंच ने की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दीपक की याचिका पर काफी सख्त रुख दिखाया और कई सीधे सवाल उठाए।

जज ने साफ कहा आप एक संदिग्ध आरोपी हैं। ऐसे में आप अदालत से सुरक्षा कैसे मांग सकते हैं? कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस अपना काम करने में सक्षम है। उस पर भरोसा रखें। कोर्ट को सबसे ज्यादा आपत्ति इस बात पर थी कि दीपक ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी जांच की मांग कर दी। इस पर जज ने कहा कि यह पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश लगती है। अगर आप जांच कर रहे अधिकारियों पर ही सवाल उठाएंगे तो निष्पक्ष जांच कैसे होगी? जज ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसा लगा कि याचिका गलत तरीके से दायर की गई है तो भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। हालांकि कोर्ट ने सुरक्षा और पुलिस जांच वाली मांगों पर नाराजगी जताई।

लेकिन एक अहम बात भी कही। एफआईआर रद्द करने की मांग पर कोर्ट विचार कर सकता है। यानी दीपक के लिए पूरी तरह रास्ता बंदl नहीं हुआ है। दीपक के वकील ने अदालत में साफ कहा कि उनका मुअल किसी तरह की या फिर उकसावे में शामिल नहीं था। उनके मुताबिक दीपक सिर्फ झगड़ा शांत करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने किसी के खिलाफ कोई नफरत नहीं फैलाई बल्कि वह खुद ही अब धमकियों का सामना कर रहे हैं।

वकील ने कुछ संगठनों के खिलाफ दी गई शिकायतों का भी जिक्र किया लेकिन कोर्ट ने कहा कि कहानी पर मत जाइए। सीधे कानूनी राहत पर बात कीजिए। सुनवाई के दौरान एक और अहम सवाल उठा। अगर कोर्ट किसी आरोपी को सुरक्षादे दे तो पुलिस उसकी जांच आखिर कैसे करेगी? राज्य सरकार की ओर से भी कहा गया कि फिलहाल दीपक की जान को कोई सीधा खतरा नहीं है। सिर्फ कानूनी नहीं कोर्ट ने सामाजिक पहलू पर भी चिंता जताई। जज ने कहाकि ऐसे मामलों में एक छोटी सी पूरे समाज पर असर डाल सकती है। उन्होंने पुराने मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि गलत या फिर अधूरी जांच से हालात और बिगड़ सकते हैं।

फिलहाल दीपक के वकील ने कुछ तथ्यों की पुष्टि के लिए समय मांगा है जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया है। अब शुक्रवार को आगे की सुनवाई में क्या होगा यह देखना अभी बाकी है। जज ने यह भी साफ किया है कि अभी भी जो बातें कही गई हैं, [संगीत] वह शुरुआती टिप्पणियां हैं।

अंतिम फैसला सुनवाई पूरे के होने के बाद ही होगा। लेकिन इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अगर कोई व्यक्ति तनाव के समय शांति की अपील करता है तो क्या उसे भी कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा? अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर है। क्या दीपक कुमार को राहत मिलेगी या फिर यह मामला और उलझेगा?

Leave a Comment