लखनऊ पुलिस एक महिला को बचाने की कोशिश कर रही है। भीड़ में से उस महिला को किसी भी तरीके से बचाकर आगे बढ़ने की उनकी जो मशक्कत थी उसमें मोहल्ले के लोगों ने उस महिला का दुपट्टा सरेआम खींच डाला।
फिर लेडी पुलिस इंस्पेक्टर उन मोहल्ले वालों को धक्का देकर दूर करती है। बताएंगे इस रिकॉर्डिंग क्राइम के जरिए कि यूपी पुलिस के नाक के नीचे किस तरीके से मोहल्ले वालों का जो गुस्सा था वो इतना ज्यादा बढ़ गया। साथ ही साथ जो आप तस्वीर अपनी स्क्रीन पर अभी देख रहे हैं जहां पर एक जो पुलिस वाले हैं वो एक वाइपर के ऊपर चादर डालकर बाहर निकल रहे हैं। यह वही वाइपर है जिसमें के बाद एक मां ने एक सौतेली मां ने अपने चार साल के मासूम बेटे को निर्मम तरीके से उसकी हत्या कर दी।
यह जो सौतेली मां है रोटी बनाने वाले तवे को गर्म कर कर उस चार साल के मासूम को उस पर बैठा देती थी और जब तक वो चीखता चिल्लाता नहीं था उसका मुंह दबा देती थी ताकि उसकी चीखें मोहल्ले वालों तक ना पहुंचे। बताएंगे इस डिकोडिंग क्राइम के जरिए जो मोहल्ले के लोग हैं हर तरीके से इस महिला को के घाट उतारना चाहते हैं।
किस तरीके से जो लोग हैं वो गेट के ऊपर चढ़कर उस महिला को मारना चाहते हैं। जो पुलिस वाले हैं वो हाथ फैलाकर इस महिला को बचाने की हर एक नाकाम कोशिश कर रहे हैं। धक्कामुक्की चल रही है। लोगों को दूर किया जा रहा है कि कोई भी इस महिला के करीब ना पहुंच पाए।
लेकिन मोहल्ले वालों का बार-बार यह कहना है कि ये औरत नहीं है। ये एक तरीके की है जो उनके बीच में रहकर किस तरीके से एक मासूम की वो जान ले सकती है। बात करेंगे इस डिकोडिंग के जरिए कि किस तरीके से एक सौतेली मां ने एक 4 साल की मासूम को इसलिए मार दिया क्योंकि वो किसी और औरत का बेटा था।
उसके पति की पहली बीवी का बेटा था और जो नफरत थी वो इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि हत्या तक ये बात आगे तक निकल कर जाती है। बताएंगे उस बाथरूम में भी आपको दिखाएंगे जिस बाथरूम में दावा यह किया जा रहा है कि उस महिला ने उस बाथरूम मेंसी पर उस बच्चे का जो मुंह था दे मारा जहां पर उसके सर से खून निकलने लगता है। उसके गले को घोट डाला और इतनी ज्यादा मारपिटाई होती थी कि बच्चा हमेशा सहमा हुआ रहता था। बात करेंगे इस डिकोडिंग क्राइम के जरिए। बहुत सारी फुटेज हैं।
बहुत सारी एक्सक्लूसिव जानकारी हैं जो आज हम आपके साथ इस डिकोडिंग में साझा करेंगे। है मौजूद है यहां पर और लोग हम लोग चाहते हैं कि 4 साल के मासूम अर्नव की जान लेने वाली सौतेली मां को पुलिस लेकर आई तो मोहल्ले वाले हुए हैं। नाराज हैं उस पिता और मां को पीटने के लिए। मोहल्ले वाले इकट्ठा है नाराज हैं। एक मासूम बच्चे क्या बिल्कुल उसको फांसी मिलनी चाहिए। यही मानना चाहिए उसको। उसको कोई नहीं है। उसको बहुत सारी धाराएं लगनी चाहिए। हम लोग बहुत नाराज हैं यहां पे। एक बच्चा मरा है। छोटा बच्चा नगर का कोई मोहल्ले में कोई भी बच्चा निकलने से डर रहा है। तो यह जो आपने अभी तस्वीरें देखी इसमें आपको दिखा होगा कि दरवाजे पर किस तरह से जो लोग हैं वो पुलिस वालों को धक्का दे रहे हैं और आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उन्हें जो रागिनी है उसको मारना है। इसके अलावा भीष्म को भी मारना है। अब ये दोनों कैरेक्टर हैं तो है कौन?
तो दरअसल पुलिस के घेरे में खड़ी हुई जो महिला आपको दिखाई दी जिसके मुंह पर स्कार्फ बंधा हुआ है, दुपट्टा बंधा है, यह रागिनी है और पीछे जो एक लड़का दिखाई दे रहा है, जो शख्स दिखाई दे रहा है, यह है भीष्म। दोनों पति-पत्नी हैं और इन पर आरोप है कि इन्होंने अपने 4 साल के बेटे यानी कि अरर्नव को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया और ना सिर्फ अचानक बल्कि 6 महीने से प्लानिंग चल रही थी। 6 महीने से लगातार वो उस बच्चे को टॉर्चर कर रहे थे और यह सोच रहे थे कब जाकर इस बच्चे से पीछा छूटेगा। सोचिए रागिनी तो सौतेली मां है लेकिन जो भीष्म है वो सगे पिता हैं उस बच्चे के और उन्होंने भी अपने बच्चे पर तरस नहीं खाया। उन्होंने भी अपने बच्चे को के घाट उतार दिया। अब यहां से पुलिस वाले इनको निकालकर लोगों की भीड़ से क्योंकि लोगों के अंदर इतना गुस्सा गुस्सा है। वो चाहे तो रागिनी का मुंह नोच लें। वो यह चाहते हैं कि किसी भी तरीके से भीष्म को मार दिया जाए। क्योंकि किसी को भी यह समझ नहीं आ रहा कि कैसे एक मां-बाप अपने बच्चे को इतनी बेरहमी से मार सकते हैं। अब पुलिस वाले जब इन्हें यहां से लेके चले जाते हैं लेकिन उससे पहले इस घर के अंदर आखिर होता क्या है?
ये जो आपको मैं घर दिखा रही हूं यहां पर आपको एक बोर्ड दिखाई दे रहा होगा जिसमें लिखा है एडवोकेट भीष्मखरबंदा और नीचे रागिनी का नाम लिखा है छोटी सी प्लेट पर बाहर एक जो आप पूरा प्लेट देख रहे हैं बड़ी वाली उसमें तो एडवोकेट और भीष्मखरबंदा लिखा है। लेकिन घर की जो प्लेट है नेम प्लेट उसमें रागिनी और भीष्म का नाम लिखा है। अब इस घर के अंदर जब पुलिस की टीम पहुंचती है, जब पुलिस वालों को पता लगता है तो देखिए किस तरह से जो गली बनी हुई है, यहां से रागिनी जो है वो पुलिस वालों को लेकर जा रही है। जहां पर बताया गया कि बच्चे की मौत हुई। जिस बाथरूम में बताया गया कि बच्चा यहीं पर उसकी मौत हो गई। तो राधिनी लेकर जा रही है।
लेकिन आप सोचिए अभी आपको यह जो कमरा दिखाई दे रहा है इस पर एक महिला बैठी नजर आ रही है। महिला कोई और नहीं बल्कि भीष्म की मां यानी कि अरनव की दादी हैं। और सोचिए यह जो बुजुर्ग महिला हैं जो दादी हैं वो रो-रो कर उनका बुरा हाल है और वो अपनी आंखों के सामने देख रही हैं कि उनकी बहू उनका पोता इस दुनिया में है नहीं। उनके बेटे को पुलिस ने पकड़ लिया और बहू सीन दिखा रही है। बहू जा रही है बाथरूम के अंदर। वो बता रही है कहां पर क्या चीजें हुई। हालांकि इसमें दो पक्ष हैं। दोनों अपनी-अपनी बातें कह रहा है। वो हम आपको आगे बताएंगे। लेकिन इस घर के अंदर हुआ क्या? कितने महीने से चीजें हो रही थी? उसकी पूरी कहानी क्या है? सबसे पहले आप वो समझिए। दरअसल इस ये जो पूरा मामला है ये आज से 6 महीने पहले शुरू हुआ।
इसमें बच्चे को बहुत ज्यादा टॉर्चर किया गया। लेकिन दरअसल बात है साल 2020 की। होता ऐसा है कि शहजन नगर अंबिकापुरम में पड़ता है। वहां पर मैट्रिमोनियल साइट पर जो यह शख्स हैं जिनका नाम भीष्म खरबंदा है। मैट्रिमोनियल साइट पर एक लड़की को देखते हैं। नाम स्वाति होता है। उनके परिवार से मिलते हैं। यानी दोनों परिवार आपस में मिलते हैं और 2020 नवंबर के महीने में शादी कर दी जाती है। अब शादी होने के बाद 2021 में 16 अक्टूबर को जो स्वाति हैं वह एक बेटे को जन्म देती है। नाम रखा जाता है अर्नव।
लेकिन बच्चे के पैदा होने के बाद अचानक से स्वाति की जो तबीयत है वो बिगड़ने लगती है और तबीयत इस कदर बिगड़ जाती है कि करीब 6 महीने बाद यानी कि आप यूं समझिए 2022 में अप्रैल के महीने में उस उनकी मौत हो जाती है। अब मौत हो जाने के बाद जो परिवार वाले क्योंकि जो बेटा था वह बड़ा हो रहा था। करीब-करीब आप यूं समझिए एक दुधुआ बच्चा था वह उस वक्त। तो ऐसे में जो मौसी थी जो नानी थी वो उस बच्चे को अपने घर ले जाती और वहां पर उस वक्त आरोप लगाया गया था भीष्म मुखरंदा पे जो परिवार वाले थे जो नानी थी जो साली थी उन्होंने यह तक कहा था कि आपने दीदी का इलाज नहीं कराया। अगर आप सही वक्त पर इलाज कराते तो वह ठीक हो जाती। आपने उन पर ध्यान नहीं दिया।
आपने उन्हें मरता छोड़ दिया। और यह सब कहकर वो बच्चे को लेकर चली गई। वहां पर अर्नभ को ये लोग पालपस रहे थे। अब इधर होता यह है कि जो भीष्म खरबंदा है वह अपने घर पर रह रहा था और उसने लोगों को यह बताया कि उनकी आंतों में इंफेक्शन था इसलिए स्वाति की डेथ हो गई। लेकिन जो भीष्म खरबंदा है उसे बार-बार लगता है कि मेरा बच्चा है उसे वो लोग लेकर चले गए हैं। कैसे रख रहे होंगे? क्या रख रहे होंगे? तो वो सोचता है कि क्यों ना जो साली है मैं उससे शादी कर लेता हूं। और इसीलिए भीष्म जो है प्रस्ताव रखता है परिवार वालों के सामने कि मैं स्वाति की छोटी बहन से शादी कर लेता हूं। सब कुछ ठीक रहेगा। परिवार वाले मानते हैं।
लेकिन जब यह रिश्ता ससुराल ले जाया जाता है। जब मां से पूछा जाता है स्वाति की मां से उसकी बहन से जिससे शादी करनी थी तो जो लड़की है जो स्वाति की बहन है यानी कि जो साली है वो साफ तौर पे इंकार कर देती है वो बोल देती है कि मैं अपनी जीजा से शादी नहीं करूंगी। मुझे नहीं लगता कि इन्होंने दीदी को इतना प्यार दिया और दीदी को इतनी केयर के साथ रखा। आखिरी वक्त में भी यह दीदी के साथ नहीं थी और वो इसीलिए मर गई।
ये सारी चीजें हो जाने के बाद शादी नहीं होती है। अब भीष्म जो है वो अपने कामकाज में लग जाता है। ऐसे में इसकी मुलाकात होती है रागिनी नाम की एक महिला से। दोनों की दोस्ती होती है। रागिनी जो है उसकी पहले से एक बेटी थी। अब इसके बाद दोनों शादी करने का मन बनाते हैं क्योंकि एक दूसरे से प्यार करने लगते हैं। बातचीत अच्छी हो जाती है और फिर साल 2023 में यह शादी कर लेता है।
दूसरी यानी कि भीष्म जो है वो रागिनी से शादी कर लेता है और यह जो आप अपार्टमेंट देख रहे हैं इसी अपार्टमेंट के इसी कमरे में यह रहा करता था। अब शादी के 1 साल बाद यानी कि जब ये रागिनी से शादी करता है 2023 में तो उनको एक और बेटा पैदा हो जाता है और यह बेटा रागिनी और भीष्म का बेटा था और बेटी उसकी पहले से हो रखी थी। अब इनके घर में तीन बच्चे थे। वो कैसे होते हैं? देखिए होता ये है कि जो अर्नव है जब वो अपने ननिहाल में रह रहा था। वहां पर उसको बहुत अच्छे से लाड प्यार दिया गया।
बहुत सही से रह रहा था। लेकिन अब ऐसे में भीष्म भीष्म को लगता है कि क्यों ना मैं अपने बेटे को वापस ले लूं और अचानक वो बच्चे की कस्टडी के लिए जो कोर्ट है वहां पर अपील कर देता है। बकायदा मुकदमा चलता है। हर एक चीज होती है और इसके बाद जो कोर्ट है वह फैसला सुनाती है कि बच्चे की मां तो रही नहीं। अब पिता ही उससे प्यार दे सकते हैं। तो इसलिए बच्चे को पिता के हवाले कर दिया जाए। अब वो कस्टडी का मुकदमा जीतने के बाद जो परिवार वाले हैं वो बकायदा कोर्ट में बच्चे के हर एक चीज को दिखाकर कि हमने इसको नाजू से पाला है वो बिल्कुल ठीक है और उसके पिता के हवाले करते हैं। अब होता यह है यहां पर कहानी ऐसे बिगड़ती है कि जब रागिनी घर में रहती है एक बच्चा भी और आ जाता है जो किसी और पहली वाइफ का है तो ऐसे में रागिनी उस पर ध्यान नहीं देती। जो ननिहाल पक्ष है जो अर्नव की नानी है जो उसकी मौसी उन्होंने साफ तौर पे यह बताया कि लगातार 6 महीने पहले हमें इस चीज की भनक लगी कि अर्नव को बहुत ज्यादा तंग किया जा रहा है। वो मेंटली परेशान हो रहा है।
जब हम उससे कहते हैं कि हमें हमारे बच्चे से बात कराओ अर्नव से बात कराओ तो कभी भी हमारी बात नहीं कराई जाती। कई बार जो नानी है वो अर्नव से मिलने के लिए घर भी आई। लेकिन जो पिता है जो भीष्म है जो रागिनी है वो मिलने नहीं देते। दूर से शक्ल दिखा देते और फिर कई बार बहाना करते हैं कि वो लोग बाहर हैं। इस वक्त हम बाहर गए हुए हैं। आप बाद में आइएगा। वीडियो कॉल तक पर भी बात नहीं कराई जाती और तो और उसे मारा जाता था। उसे करंट दिया जाता था। इस हद तक करंट दिया जाता था कि बच्चे के शरीर पर निशान है। यहां तक कि शुरुआत में जैसा दीपक ने बताया कि तवा को गर्म करते थे और उसके बाद उसे बिठा देते थे ताकि उसको उसको दर्द हो। उसको पीड़ा हो। ये दोनों के दोनों मतलब जो पिता है और जो सौतेली मां है दोनों के दोनों कोशिश कर रहे उस बच्चों बच्चे को लगातार टॉर्चर देने की झाड़ू तराजू या यूं समझिए घर में जो भी ऐसा सामान है जिससे उसे मारा जा सकता था उससे उसे मारा जाता था जाता था बेल्ट यूज़ की जाती थी और बेरहमी से उसका किया जाता था। यह बातें इस कदर इतनी ज्यादा बढ़ गई कि अचानक गुरुवार को एक कॉल पहुंचता है नानी पक्ष यानी नानी जी को और साली को और कहा जाता है कि जो अर्नभ है वह बाथरूम में गिर गया है।
बहुत बीमार था। उसको दस्त हो रहे थे। वोमिटिंग हो रही थी। बहुत ज्यादा बीमार था। बाथरूम में गिर गया। चोट लगी और उसकी मौत हो गई। अब जब जो मौसी है, जो मामा है, जो नानी है, वह यह सब सुनते हैं तो भागे-भागे पहुंचते हैं घर पर अर्नभ को देखते हैं। वहां पर तैयारी चल रही थी अर्नभ के अंतिम संस्कार की। लेकिन ऐसे में जो मौसी है वो जब नजर दौड़ाती है बच्चे के शरीर पर तो वो देखती है कई सारे चोट के निशान हैं। उसके गले पर मार्क है। उसकी थोड़ी के पास एक चिन्ह होता है। यहां पर मार्क है। पैरों पर कट के निशान है। ऐसा कट था कि सोचो जो मांस है अंदर का वो दिख रहा था।
सर पर उसकी स्वेलिंग नजर आती है और जब ये सारी चीजें वो देखती है तो फौरन पुलिस को इन्फॉर्म करती है। पुलिस पहुंचती है और फिर ये जो आप पूरा आपने माजरा देखा ये जो पूरा आपने देखा किस तरह से लोग गुस्से में आ जाते हैं। पुलिस वाले कैसे बचाकर निकालते हैं और पुलिस क्राइम सीन को कैसे इन्वेस्टिगेट करती है वो सारी चीजें शुरू होती हैं। अब पोस्टमार्टम भी जब कराया जाता है बच्चे का तो सोचिए पता लगता है उसके शरीर पर 19 जगह चोट के निशान है। हड्डियां तक टूटी हुई है। सोचिए एक बच्चा अगर एक बार गिरा है कहीं पर तो उसकी एक दो हड्डी टूटी होंगी। पूरे शरीर की हड्डी टूटी हुई थी। यहां तक कि उसके सिर पर घाव था और बाद में यह चीज भी आई कि शायद वो सफोकट किया गया। उसका गला दबाया गया है जिसकी वजह से उसकी हुई है। और ये सारी चीजें सवाल पैदा कर रही हैं इन दोनों मां-बाप पे सौतेली मां रागिनी पर और पिता भीष्म पर कि किस तरह से उन्होंने अपनी ही औलाद को मौत के घाट उतार दिया। अब ये जो आप बाथरूम देख रहे हैं ना इसी बाथरूम के अंदर स्वांग रचा गया। ऐसी बाथरूम को कहा जा रहा है कि यहीं पर मौत हुई बच्चे की और पूरी एक कहानी गढ़ ली गई और जिस पर सब ने यकीन भी कर लिया और जो मौसी है जब उसने निशान देखे तब उन्हें ये सारी चीजें समझ में आई कि चीजें तो कुछ गलत चल रही हैं। बच्चे को लगातार परेशान किया जा रहा था। लेकिन अब ऐसे में जो रागिनी की बहन है जो सास है उनकी यानी कि भीष्म की जो मां है वो अलग ही कहानी बता रही है।
वो साफ तौर पे ये कह रही है कि देखिए ये जो बच्चा था बहुत कमजोर था। इसके शरीर में जान नहीं थी। चलते-चलते गिर जाता था। उसे चोट लग जाती बहुत सारे निशान थे और साथ ही साथ उन्होंने बताया कि उसे दस्त हो रहे थे, वोमिट हो रहे थे और टूटी जो है वह उसके सिर पे लग गई थी। इसकी वजह से उसकी हो गई।
आप वह भी सुनिए कि वो लोग क्या कहानी गढ़ रहे हैं क्योंकि इससे आपको समझ में आएगा कि कहानी किस तरह से बनाई जा रही है। अगर बच्चा इतना ही कमजोर था, इतना ही वो लाचार हो गया था, चलते-चलते गिर पड़ता था, तो आपने समय रहते उसका इलाज क्यों नहीं कराया? आप उसे डॉक्टर के पास क्यों नहीं ले गए? क्योंकि दादी भी जिस तरह से बिस्तर पर बैठ के जब रिपोर्टर उनसे पूछता है तो बोलती है कि बच्चा पहले से ऐसा था वो कमजोर हो चुका था जब भी हम देखते थे सीढ़ी से गिर जाता था वो गिरता था बेड से गिर जाता था तो अगर इतना ही ज्यादा उसकी हड्डियां कमजोर हो गई थी तो उसको पहले ही इलाज क्यों नहीं कराया गया आप सुनिए जो रागिनी की बहन है जो मौसी हैं वो क्या पूरी कहानी बता रही है वो कपड़े दिखाकर सबूत दिखा रही है और इसके अलावा जो दादी हैं उन्होंने अपनी बहू को लेकर क्या-क्या चीजें कही गिरता रहता था ना तो एक बार तो घर पे भी गया था तो गिर जाता है वो पीछे गेट भी अभी उन्होंने उन्होंने दो-ती दिन पहले लगाया तब बताया था कि सीढ़ियों से गिर गया था। उस पे भी चोट लगी थी उसके। अच्छा ये बच्चा मर गया तो कहा जा रहा है कि जो रागिनी है उन्होंने ही पीट-पीट के मार दिया। क्या है? दूसरी मां है ना इसीलिए लोगों को मौका मिल रहा है बोलने के लिए। वरना ऐसी कोई बात नहीं है। ये भी उनका बच्चा है। ये बेटी भी उनकी है। अपने ये ये मतलब उन्हीं की मतलब रागिनी का बच्चा है ये। हां जी। हां। कितने बच्चे? कब शादी हुई थी यहां पे आई थी? यहां पे उनकी शादी को 3 साल होने वाले थे नवंबर में अक्टूबर में। ये पिछला यही कमरा है। पीछे का हिस्से पीछे का भी है। पीछे बाथरूम और किचन भी है।
ये उन्हीं के हिस्से में था। ये भी एक था बैडरूम था। अच्छा तो आप लोग को मतलब ये अर्नव को जैसे आप तो मौसी भी रही रिश्ते में तो खेलने में क्या शैतान था? क्या कैसे? अच्छा था वो। मेरे साथ भी खेलता था। हम आते थे हमारे साथ भी अच्छे से खेलता था। ऐसी कोई दिक्कत नहीं थी। अब आपकी बहन के ऊपर आरोप है तो क्या सौतेली मां होने की वजह से ऐसा आरोप लग गया? सौतेली वजह यही वजह है कि वो दूसरी मां है इसलिए लोगों को मौके मिल रहे हैं। अगर कल को उनका खुद का बच्चा मर जाता तो कोई कुछ नहीं कह पाता।
तो कोई ये नहीं कहता कि हां मारा है। कोई सब यही विश्वास करते हैं कि हां सच में गिरने से चोट लगी है या पहले की पुरानी चोट है। सब यही कहते हैं। लेकिन वही है कि अभी सौतेली है तो इल्जाम लगाने के फायदे मिल रहे हैं। और मेन चीज यह है कि उन्होंने दूसरी शादी की है। इस चीज का भी उनको दिक्कत थी। इसीलिए उन्होंने कंप्लेन की है। तो ये जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई है उसमें तो लिखा है कि सिर में हार्ट ब्लंट ऑब्जेक्ट मतलब जैसे कोई बाहर वो बच्चा गिरा था ना तो जो बाथरूम मेंहै ना उस पे उसका सर लगा है। फिर वो गिरा है। अच्छा बाथरूम में चोट लगी। बाथरूम में चोट लगी है।
मैं आपको दिखाती हूं वोमिट पड़ी हुई है। ये ये मौसी है उस बच्चे की यानी कि रागिनी खरबंदा जिनके ऊपर आरोप है कि उन्होंने अपने सौतेले बेटे को के घाट उतार दिया। यह दिखा भी रही हैं। इनका दावा है जो मौसी हैं उनका दावा है कि बच्चा यहां पर यहां पर चोट लगी है। ये बाथरूम है। वोमिट मैं आपको और भी चीजें दिखाती हूं।
बच्चे के कपड़े पॉटी के और वो सब अच्छा यहां पे खेलते समय आप ठीक है। यहीं पे बात कर लेती हूं। नहीं मैं अब दिखा देती हूं। कपड़े दिखा दिखाइए। ये सब ये सब कपड़े हैं। ये बेडशीट है। हां हां आप नीचे आ जाए। हां तो क्या हुआ ये मतलब ये चोट लग गई थी नहीं चोट नहीं लगी है बच्चा नॉर्मली क्या करता था कि बच्चे को उन्होंने हैबिट नहीं बनाई कि बच्चा पॉटी करेगा तो बताएगा वो पॉटी कर लेता था उसके बाद बोलता था कि मम्मा पॉटी कर ले अच्छा हां सोता था या ऐसे नॉर्मल मतलब ये सब चीजें थी हां तो देखिए ये उसने की है करने के बाद एक बार वो लाए हैं साफ की है फिर उसके बाद वो केलावेला कुछ खिलाया उन्होंने खाने की चीज दी है कि पॉटी की है तो खाना दिया है उसके बाद वोमिट भी की है और ये उनके कपड़े हैं। उन्होंने अपनी गोदी में बच्चे को लिया है।
तो ये देखिए उनके भी कपड़े सन्ने हैं। बच्चे को उठा के वो लाए हैं। सफाई की है बच्चे की। सफाई करने के बाद बच्चे को नहलाया है। अच्छा ये देखिए ये बाथरूम में ये ये जो खून पड़ा हुआ है वही चोट कहा है। खून नहीं है। ये वोमिट है। अच्छा वोमिट किया हुआ है। बच्चे का वोमिट है। टॉवल लेने गए हैं। बच्चा गिर गया फिसल के। जब वो आवाज आई तो वो भाग के आया। बच्चे का चोट लगा है। बच्चा भाग तो बच्चे को यहां पे बाथरूम में चोट कैसे लग गई? यह कैसे लग गया? वो इसमें टॉि अच्छा ये अंदर टैप है और इसमें इसमें ये टैप में चोट लगने की वजह से घर वालों का इनकी जो मौसी हैं होता है ना उनके कपड़े खुद के कपड़े नहीं सने होते हैं। बस वही है कि वो सौतेली हैं। अब जिसको जो कहना है कर सकते हैं। हम भी तब से शांत ही बैठे हैं। वो जो कर रहे हैं कर रहे हैं। हम अपने टाइम पे आएंगे। हम भी कुछ ना कुछ करेंगे क्योंकि उनके भी बच्चे हैं। छोटा बच्चा है दो दिन से रोज आ रहा है ना दूध पी रहा है। फीवर हो रहा है उसको। सौली मां होने की वजह से भरोसा नहीं कर पा रहे लोग। बिल्कुल कि उनकी दादी बैठी हैं बाहर। वो भी यहीं रहती है। आप उनसे पूछ लो। बच्चा इतना कमजोर था शरीर से भागता भी था ना गिर जाता था। गिरते ही उसके चोट लग जात गिरते ही निशान लग जाता है। रही बात उसके पैरों की तो उन्होंने बताया था कि हम पार्क गए थे। बेटी के भी हाथ में कट गया था। उसके पैरों में कट गया था। पतंग का मांसा उलझस गया था पैरों में आके।
आपकी छोटी बहू ध्यान नहीं रखती है। दूसरी सौतेली जो बहू आई है। हम तो नहीं मानते। सौतेली हमने देखा खूब करती थी वो भी खूब करती रही और गिरा बहुत है मेरे सामने। ये लगा मैं मेरे सामने जगह लगा इधर लगा। मैं मेरे बच्चों को भी लगा। बहुत चोटें खाई थी। बहुत और लैट्रिन के पास गिर गया। गिरता बहुत था। इतनी हड्डी का हड्डी साहब। दुबला। हां दुबला। बिलकुल बिलकुल हड्डी कबड्डी सा भाग। इसमें गंदा जान भी उसके खून भी नहींता था। ना मैया के चढ़ता था ना इसके चढ़ता था मैया भी पतली थी बिल्कुल धुंगली मतलब खून भी नहीं निकलता था हां नहीं मां के सुई च सुई नहीं लगती थी मां भी पतली थी तो आपकी बहू के ऊपर जैसे आरोप है कि उसने मार दिया लगता है आपको नहीं नहीं बाबूजी नहीं बाबूजी नहीं मारा मेरा लड़का बहुत सीधा मार सकता दोनों ने नहीं बहू बहू भी नहीं मार सकती कोई अपने अपनी औलाद हो चाहे दुश्मन की हो तो कोई नहीं मारेगा किसी को आप यहां थी घटना जब कल हुई परसों तो कहां थी यहां हम नहीं थे कुछ भी अरे कुछ भी नहीं हुआ यहां से। दो दो गिरा लगा के ले गया। पता नहीं क्या हुआ। यहीं गिर गया था मेरा।
चलते-चलते गिर जाता वो। तो सुना आपने जो दादी हैं इन्होंने एक तरीके से अपने बेटे और अपनी बहू का साथ दिया। जो बहन है उन्होंने भी एक तरीके से अपनी बहन का साथ दिया और ये साफ तौर पर बताने की ऑन कैमरा कोशिश की गई कि जो बच्चा है वही कमजोर था और अपनी ही गलतियों का वो शिकार हो गया। वो तो हमारे जो बहन हैं, जो हमारे भैया हैं, जीजा हैं वो सब तो भोले-भाले लोग हैं। उनसे कहां कुछ होता है? वो सारी चीजें कहीं थोड़ी कर सकते हैं। लेकिन अगर इस देश में पोस्टमार्टम जैसी चीज नहीं होती तो इन जैसे कातिल, सौतेली मां और जो सगा जो बाप है वो बचकर बाहर आ जाते। क्योंकि जब पोस्टमार्टम जब रिपोर्ट में जब कहा गया कि हड्डी टूटी है और जब सवाल जवाब शुरू हुआ तो यह आना-कानी करने लगे। जो भीष्म को लगा वो तो वकील है।
वो तो हेराफेरी करने में माहिर है। कहां-कहां वो तो कुछ भी बोल देगा। पुलिस उसके सामने नतमस्तक रहेगी। कोई उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता है। वो अपनी दूसरी बीवी के प्यार में इस तरीके से गुलाम बन बैठा कि उसने अपने ही बेटे को मौत के घाट उतारने का बिल्कुल एक परफेक्ट प्लान तैयार कर लिया था। उस प्लान का मकसद यही था कि अगर कभी भी पहली बीवी के घर से कोई भी उस बच्चे से मिलने आएगा वो उसे मिलने नहीं देगा। और यहां तक कि जब भी वो लोग फोन कॉल पर बातचीत करते थे पीछे वाला कैमरा ऑन कर कर म्यूट कर दिया जाता था ताकि बच्चा अगर वहां से कुछ भी बोले तो पहली बीवी के जो वो घर वाले हैं उन तक कोई भी बात ना पहुंचे। वो बच्चा बार-बार अपनी मौसी को अपनी नानी को बहुत कुछ बताना चाहता था। लेकिन मजाल क्यों छोटा बच्चा जो चार साल का जो मासूम है वो बताएं कि जो पापा है मुझे मारते हैं जो मेरी दूसरी मम्मी है जो सौतेली मां है वो मुझे गरम तवे पर बैठा देती है झाड़ू से मारती है मेरा मुंह बंद कर देती है मेरा गला घोट देती है उस मासूम को तो ये भी नहीं पता था कि मां का प्यार असल में होता कैसा है उसे लगा कि जो दूसरी महिला है ये भी एक मां है और इसका प्यार भी उसे मिलता रहेगा लेकिन यहां पर सौतेली मां को लगा कि उसका एक बेटा भी हो चुका है उसकी एक बेटी भी हो गई है और कहीं ना कहीं आने वाले वक्त में पैसा और प्यार जो उसके पति का है वो बट जाएगा और पहली बीवी की जो बेटा है उसे उस सारा प्यार ना मिल जाए और इसलिए उसे बार-बार दी जाती थी। हम अपने मुंह से बहुत सारी बातें क्या बताएं।
खुद जो पहली बीवी के जो एक तरीके से भाई हैं, जो मामा हैं, सगे मामा हैं, उन्होंने ऑन कैमरा जो चीजें बताई, मैं दावा करता हूं कि आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। आपके आंख से आंसू आना शुरू हो जाएगा। आपको लगेगा कि इस तरीके के इंसान भी समाज में आपके आसपोस कैसे उठ बैठ लेते हैं? क्या उनके दिमाग में चलता है? इतनी घृणा कैसे कोई कर सकता है? क्या ये बच्चे को टॉर्चर कर रहे थे? आप लोगों को जानकारी कब हुई? कभी चोट के नहीं भैया जब से मेरे पास था तो मैंने तो उसको राजा की तरह पाला था। उसके शरीर पे एक खरोच का निशान नहीं था। और जब यह कोर्ट से आर्डर हुआ मैंने कोर्ट में हैंड ओवर दिया था। उस समय भी बच्चे के शरीर पर एक खरोच का निशान नहीं था। उस कंडीशन में मैंने इनको हैंड ओवर दिया था। कोर्ट से मैंने हैंड ओवर दिया था। वो भी हाई कोर्ट। लखनऊ हाई कोर्ट। लखनऊ हाई कोर्ट। और उसके बाद यही है कि मुझे बीच-बीच में मदद आने लगी मिलने। एक तो मिलने नहीं दिया जाता उनसे। कायदे से बात नहीं करने दिया जाता। फोन पे बात करते थे तो फोन पे बात नहीं कराता। खाली फोटो दिखाता था। फोटो में भी बच्चा इतना डरा सहमा बैठा रहता था कि वह नजरें नीचे किए रहता था। ऊपर उठा नहीं पाता था और फिर यही बोला जाता था कि बच्चा आपसे बात नहीं करना चाहता है। मम्मी जब घर आती थी मिलने बच्चे की नानी तो उससे मिलने नहीं दिया जाता था। घंटोंघंटों इंतजार किया जाता था। आप मिलने आती थी तो क्या बताता था? कब मिलने दिया जाता? वो कुछ बोलता जब से मेरे पास से गया उसकी समझो आवाजें चली। कुछ भी नहीं बोलने नहीं दिया। इन लोगों को आप लोग पाल रहे थे। फिर ये कैसे ले आया? वो कोर्ट के द्वारा ले आया। भैया हम पे केस कर दिया। हमको पता ही नहीं था। कोर्ट से लिया। हां, कोर्ट से लिया इसने।
आप लोगों ने चोट का निशान देखा होगा। कहां-कहां चोट का निशान? जब पहली बार हम लोग मिलने गए थे, तो पहली बार हमने उसके पैर पे निशान देखा था। जिसको उन्होंने मोजे से ढक रखा था। वो एक बाइक के साइलेंसर के जले का निशान था। पैर पे बड़ा सा। जब हम लोगों ने एक दो बार आने पर उसकी चोटें देखने लगे तो उन्होंने तीसरी चौथी बार से यह किया कि बच्चे को हमारी गोद में ही देना बंद कर दिया। आते थे। आधे 1 घंटे बाद लेकर आते थे। बच्चे को अपने ही गोद में चेहरा तक नहीं दिखता था। ऐसे रखते थे ताकि अब उसके शरीर की एक भी चोट ना देख पाए। ढक के रखते थे। ढक के रखते थे। कैसे पूरा जैसे ऐसे सीने से चिपका के रखना कि उसकी शक्ल ना दिखे। इस हिसाब से रखा जाता था कि उसकी चेहरा मुझे ना दिखे। और बाकी चोट भी छिपाई जाती थी। कैसे पूरी टीशर्ट फुल टीशर्ट पहनाए जैसे जिसे हाथों में जो उसके शरीर पे जो नीला पड़ा हुआ है। हाथों पे निशान है। पैरों में कट के निशान है। पैरों में कट निशान छुपाने के लिए वो मोझा पहनाए रहते थे। शरीर के माथे के निशान छुपाने के लिए वो मंकी कैप पहनाए रहते थे और बताने पे यही बताते थे कि उसको जुकाम है, फीवर है।
इस वजह से हम कैप नहीं आप लोगों ने लास्ट टाइम बॉडी देखी होगी तो कहां-कहां चोट है उसको। माथे पे इस जगह उसके चोट है। इतना बड़ा गड्ढा है उसके। साइड में पूरा नीला पड़ा है। कट का निशान है। स्वेलिंग भी है। बैक साइड पे पूरा हेड उसका स्वेलिंग है। जैसे किसी दीवार से उसका सर लड़ा दिया गया हो। यहां पूरा छिला हुआ है। इस जगह पे उसके पूरा नीला पड़ा हुआ है। बैक पे है। एक बट पूरा नीला पड़ा है। जैसे डंडे ही डंडे मारे गए हो। तवे पे रख के उसको बैठा दिया गया हो। गर्म तवे पे दोनों पैरों में नीचे की तरफ इतना बड़ा कट का निशान है। वो भी आधा-आधा इंच गहरा। अंदर की खाल दिख रही है। इतना गहरा घाव था कि अंदर की खाल दिख रही है। अब आप लोग क्या चाहते हैं? कड़ी से कड़ी कारवाही हो। जो खाली इनके ऊपर 302 धारा लगी हैं। इनके ऊपर जो बच्चे चार साल के बच्चे को किया उसके लिए भी इनके ऊपर अलग से धारा लगाई जाए और हमारा जो भी पूरा कोर्ट का केस है वो हमारे कानपुर से किया जाए। क्योंकि यहां पे क्योंकि मुझे आने क्योंकि यहां पे जैसे इन्होंने पहले कस्टडी केस में अपना सोर्स लगा के बच्चे को अपनी तरफ कर लिया था। आगे भी यह पूरी कोशिश करेंगे कि अपना बार एसोसिएशन का सोर्स लगा ये पेशे से ये बताते हैं ये वकील है तो ये वकील उसकी हमको धमकी देते हैं कि आप मुझसे कुछ भी करोगे मैं आपको वकालत दिखाऊंगा अपनी जो भी है मैं आपको कोर्ट में घसीटूंगा तो सुना आपने कि किस तरीके से ये जो सौतेली मां है इसने कोई कसर नहीं छोड़ा उस मासूम को मौत के घाट उतारने के लिए और एक जो प्लानिंग ऑफ प्लॉटिंग थी उसे ये लग रहा था उसे ये लग रहा था कि मैं कि टॉर्चर करूंगी वो यातनाएं झेलेगा उसका दिमाग का विकास नहीं होगा। उसे लंगड़ा कर दूंगी ताकि जो मेरे बच्चे हैं वो आगे बढ़ जाए और यह जो बच्चा है हमेशा हमेशा के लिए पीछे रहे।
और इस तरीके की जो प्लानिंग और प्लॉटिंग थी इसमें पति भी साथ दे रहा था। अगर उसे अपने बच्चा एक्सेप्ट नहीं करना था तो मायके में ही छोड़ देता। क्यों उसे कोर्ट केस लड़कर जोर जबरदस्ती के साथ अपने घर लेकर आया? उसी घर में उसकी हो गई। इससे अच्छा तो वो अपने पहली बीवी के घर पर ही रहता। अपनी नानी के पास रहता। वहीं पर उसका सब कुछ देखरेख होता। लेकिन नहीं बच्चे को मारना था। एक बाप को लगा कि मेरा जो बच्चा किसी और के घर पे कैसे रह सकता है। लेकिन उसे शायद नहीं पता था कि जो दूसरी बीवी आई है वो एक शैतान का रूप लेकर आई है। क्योंकि उसकी जो प्यास थी उस चार साल की मासूम के खून को देखकर ही उसकी प्यास बुझ सकती थी।
और कहीं ना कहीं इस पूरे कड़ी में उस परिवार पर एकाएक चाहे वो सासू मां हो, चाहे वो वो जो सौतेली मां हो, चाहे बाप हो, हर कोई जिम्मेदार है उस बच्चे की के लिए। क्योंकि हर किसी ने अपना मुंह फेर लिया। उस चार साल के मासूम को जब टॉर्चर किया जा रहा था। अगर किसी एक ने भी आवाज उठाई होती तो शायद ये जो चार साल का जो मासूम है आज हमारे बीच में होता और ये जो सारी जो हम न्यूज़ बता रहे हैं आपको शायद ये खबर आप तक पहुंचती भी नहीं। लेकिन सिर्फ घृणा, जलन और मेरे पति का प्यार का बंटवारा हो जाएगा। इसलिए एक बच्चे को मार देना हमें लगा कि इस डिकोडिंग में आप तक ये खबर पहुंचाना बहुत ज्यादा जरूरी है क्योंकि आपके समाज में आसपास जो चीजें हो रही हैं अगर आप भी कुछ इसी तरीके से मूव फेर लेंगे तो एक बहुत बड़े केस को या बहुत बड़े को आप होने देंगे और इसलिए हमारी तमाम दर्शकों से दरख्वास्त है कि अगर आपके आसपास भी अगर छोटी सी छोटी भी कोई क्राइम हो रहा है ।
जो आपको लग रहा है गलत है तो उसके लिए आवाज उठाइए क्योंकि इस तरीके के केस रोंगटे तो जरूर खड़े करते सुनने में लेकिन आस पड़ोस के लोगों को बहुत पहले से भनक थी कि उस घर के अंदर क्या हो रहा है। तब किसी ने आवाज नहीं उठाया लेकिन अब उस बच्चे के मरने के बाद मोहल्ले के लोग उस महिला को मारने के लिए दौड़ रहे हैं। शायद यह लोग पहले अगर ऐसा कुछ कर लेते तो यह नौबत ना आती।
