दिल्ली में ट्रंप का जासूस क्या कर रहा था?

चक्रू में अब देश को सावधान करने वाली एक बेहद जरूरी खबर। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी ने बड़े अंतरराष्ट्रीय साजिश का खुलासा करते हुए सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। सबसे हैरानी की बात ये है कि इसमें से एक अमेरिकी नागरिक भी है और छह यूक्रेन के सिटीजन है। अब तक भारत में पाकिस्तानी जासूसों की गिरफ्तारी के कई मामले थे।

कोई नई बात नहीं लेकिन अमेरिका और यूक्रेन के नागरिकों की गिरफ्तारी ने सबको हैरान कर दिया है। ने सभी सातों नागरिकों को अवैध एंट्री, अवैध देश के दुश्मनों को ड्रोन की वॉर ट्रेनिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। अब इन सबके खिलाफ गैर कानानूनी गतिविधियां अधिनियम यानी यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू कर दी गई है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन सात लोगों की गिरफ्तारी बड़े फिल्मी स्टाइल में देश के अलग-अलग एयरपोर्ट से करीब दो दिन पहले की गई।

ये लोग अपना काम निपटाकर यानी जासूसी का जो काम इनको दिया गया था वो निपटाकर देश से भागने की फिराक में थे। लेकिन उससे पहले ही एनआईए के हाथ चढ़ गए। अब तक की जांच में जो पता चला है भारत पहुंचने के बाद ये सभी आरोपी पहले मिजोरम पहुंचे। इसके बाद वहां से म्यांमार चले गए। जबकि भारतीय नियमों के मुताबिक मिजोरम जाने के लिए विदेशी सिटीजंस को विदेशी नागरिकों को फॉरेन रीजनल ऑफिस यानी एफआरओ से विशेष परमिट लेना होता है।

लेकिन ये लोग बिना परमिट लिए म्यांमार चले गए। मिजोरम की करीब 500 कि.मी. लंबी सीमा म्यांमार से लगती है। जांच में यह बात भी सामने आ रही है कि म्यांमार पहुंचने के बाद सभी आरोपियों ने वहां के कुछ जातीय समूह से संपर्क किया जो भारत विरोधी एक्टिविटी से जुड़े हुए हैं। यह सभी आरोपी म्यांमार में और चलाने की ट्रेनिंग देने के लिए गए थे। यानी कुल मिलाकर भारत में बड़ा हलचल पैदा करने की कोशिश में यह सात विदेशी थे।

आगे बढ़ते हैं आज की अगली कहानी की ओर। दुश्मनी जमकर करो मगर यह गुंजाइश रहे कि जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा ना हो। आज के वरुण गांधी पर बशीर भद्र साहब का यह शेर बहुत मौजू लगता है। वरुण गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अरसे बाद हुई मुलाकात क्या इसी गुंजाइश का नतीजा है?

क्या वरुण गांधी का सियासी वनवास इस तस्वीर से जाहिर हो रहा है कि वो खत्म होने वाला है? वरुण गांधी ने आज सोशल मीडिया पर अपनी एक तस्वीर शेयर की है जिसे देखकर सभी चौंक गए। यहां तक कि बीजेपी को करीबी से जानने वाले भी भौचक के इस तस्वीर को देखकर रह गए। सियासत में तस्वीरें कभी सिर्फ तस्वीरें नहीं होती वो संकेत होती हैं बदलाव की और कभी-कभी तो वापसी की भी संकेत देती है। बीजेपी के पूर्व सांसद और नेहरू गांधी परिवार से आने वाले राहुल गांधी के छोटे चचेरे भाई वरुण गांधी ने अपने पूरे परिवार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात की। एक ऐसी मुलाकात जिसने एक साथ कई सियासी कयासों को जन्म दे दिया है। एक तस्वीर जिसने सियासत में हलचल मचा दी। एक मुलाकात जिसने वनवास को वापसी में बदलने की चर्चा छेड़ दी।

एक नाम वरुण गांधी जो कभी बीजेपी का फ्यूचर फेस था लेकिन वक्त के साथ साइलेंट मोड में चला गया। क्या यह सिर्फ मुलाकात है या 2026-27 की सबसे बड़ी पॉलिटिकल री एंट्री स्क्रिप्ट? क्या बीजेपी अब अपना गांधी कार्ड खेलने जा रही है? क्या वरुण को बंगाल भेजने की बारी है या यूपी में गांधी वर्सेस गांधी करने की तैयारी है?

सबसे बड़ा सवाल क्या खत्म हो रहा है वरुण गांधी का सियासी वनवास? तो देखिए यह वो तस्वीर है जो आज चर्चा में है और जिसने हमको मजबूर किया कि हम जब पोल कर चुके थे आज चक्रव्यूह का आपके लिए उसके बाद ये खबर निकल कर सामने आई कि वरुण गांधी ने मुलाकात की। वरुण गांधी हाशिय पर चले गए थे बीजेपी की राजनीति में। लेकिन इस तस्वीर ने हमको मजबूर किया कि आज जरूर इस खबर का एक विश्लेषण करना चाहिए। प्रधानमंत्री के साथ उनकी पत्नी यामिनी राय चौधरी, उनकी बेटी छोटी बेटी अनुसूया और खुद वरुण गांधी इन तस्वीरों में आप देख सकते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में पीलीभीत से टिकट कटने के बाद आज वरुण गांधी ने पहली बार प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की है। उनके साथ जैसा कि आप तस्वीर में देख पा रहे हैं, उनका पूरा परिवार मौजूद है। पीएम मोदी ने वरुण और उनकी पत्नी से हाल-चाल पूछा। उनकी बेटी को दुलार किया। यह तो रही पर्दे के सामने वाली बात। अब इस पिक्चर से जुड़ी पॉलिटिक्स की इनसाइड स्टोरी की बात भी कर लेते हैं। जिसकी शुरुआत वरुण गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए लिखे इन शब्दों से होती है। मोदी के साथ हुई मीटिंग की फोटो शेयर करते हुए वरुण गांधी ने क्या लिखा है जान लीजिए।

परिवार सहित श्रद्धेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से मिलकर उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन पाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आपके आभा मंडल में अद्भुत प्रीतव्रत स्नेह और संरक्षण का भाव है। आपसे हुई भेंट इस विश्वास को और भी दृढ़ बना देती है कि आप देश और देशवासियों के सच्चे अभिभावक हैं। तो प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात और उस मुलाकात को लेकर वरुण गांधी के शब्द आशीर्वाद, मार्गदर्शन, अद्भुत पितृवत स्नेह और संरक्षण का भाव यह कीवर्ड्स हैं।

क्या यह वरुण के सिर्फ शब्द भर है या यह सियासी संकेत है? क्योंकि यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब बंगाल में चुनावी बिगुल बज चुका है और 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी शुरू हो गई है। ऐसे में क्या बंगाल वरुण का रीएंट्री लॉन्चपड बनने जा रहा है जहां अभी ममता बनर्जी फुल एक्शन मोड में दिखाई दे रही है। जो हमसे टुकड़ाएगा जो हमसे टुकड़ाएगा जो हमसे टुकड़ी आएगा और एक बोले पंजाबी शायरी सर फारसी को तमन्ना सर फारसी को तमन्ना आज हमारा दिल में है देखते हैं जोर किसका बाजुए कातिल में है मुद्दा लाख बूढ़ा चाहे तो क्या होता है वही होता है जो क्या है बोलिए जो मंजूर खुदा होता है मां दुर्गा कथा बोली ओम सर्व मंगल मंगल शिव सर्वत्र सादिक शरण तंबके गौरी नारायण नमोस्तुते सृष्टि स्थिति विनाशं शक्ति भूते सनातनी गुण गुणमई नारायणी नमोस्तुते।

तो क्या ममता बनर्जी उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को काउंटर करने के लिए बीजेपी बंगाली दामाद वरुण गांधी को आगे लेकर आई है? क्योंकि वरुण की पत्नी यामिनी रॉय चौधरी बंगाल से आती हैं। वो मोतीलाल नेहरू के करीबी कांग्रेसी नेता रहे। उस जमाने में चितरंजन दास की परपोती है। 2013 में आपको याद दिलाऊं पश्चिम बंगाल के प्रभारी के तौर पर वरुण गांधी की जिम्मेदारी भी बीजेपी तय कर चुकी है। वो जिम्मेदारी को संभाल चुके हैं प्रभारी के तौर पर बंगाल की। उस दौरान वरुण गांधी बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे राहुल सिन्हा के साथ मिलकर संगठन को मजबूत करने पर वह काम कर रहे थे। अब राहुल सिन्हा को तो राज्यसभा भेजा जा चुका है।

ऐसे में पार्टी के अंदर यह चर्चा है कि बंगाल में वरुण गांधी को फिर से एक्टिव रोल में उतारा जा सकता है। यानी वरुण का बंगाली दामाद होना बंगाल से जुड़ा पुराना राजनीतिक अनुभव और मोदी के साथ की ताजा तस्वीरें। यह त्रिकोण बंगाल में तृणमूल और कांग्रेस के खिलाफ गांधी कार्ड खेलने का एक सिग्नल भी हो सकता है। पूरा देश का भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता इस बार बंगाल आना चाहता है। कारण एक ऐतिहासिक कारण है कि गंगोत्री से गंगा सागर तक भाजपा की सरकार और श्यामा प्रसाद की भूमि में श्यामा प्रसाद का सरकार बनने जा रहा है। उसका श्रेय लेना, इसमें उपस्थित रहना, इस इसका जो भावनाओं है, इससे अपने आप को जोड़ने के लिए सभी लोग आज उत्सुक है। सारा देश में जितना बंगाली डायस्पोरा है, देश के बाहर से भी लोग अभी आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में भी वरुण गांधी एक्टिव रहे।

यूपी में 2027 में विधानसभा चुनाव में अगले साल वरुण के भाई राहुल गांधी रायबरेली से सांसद हैं। उनकी बहन प्रियंका गांधी यूपी में बरसों से कांग्रेस को संभालती आ रही हैं। ऐसे में 2027 में बीजेपी वरुण को यूपी में घरेलू मैदान पर वापसी करा कर गांधी वर्सेस गांधी का एक नया डेफिनेशन दे सकती है। याद कीजिए जब राहुल गांधी पंजाब में भारत जोड़ो यात्रा पर थे।

करीब 2 साल पहले उस वक्त वरुण बीजेपी में साइडलाइन चल रहे थे। तब राहुल से वरुण के कांग्रेस में एंट्री को लेकर सवाल पूछे गए थे। तब राहुल गांधी ने क्या जवाब दिया था अपने इस छोटे चचेरे भाई के लिए जिन दो परिवारों में नहीं बनती है सुनिए राहुल का जवाब 2 साल पहले वाला

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