आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू का यह वीडियो तो आपने देख ही लिया होगा। जिसमें वह पूरे तौर तरीके से इमाम के पीछे नमाज पढ़ते नजर आ रहे हैं। एन चंद्रबाबू नायडू पीएम मोदी के काफी खास और एनडीए गठबंधन के प्रमुख अंग हैं। ऐसे में उनका नमाज पढ़ना पूरे भारतीय राजनीति के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
तो दरअसल एन चंद्रबाबू नायडू विजयवाड़ा में राज्य सरकार द्वारा आयोजित रोजा इफ्तार पार्टी में हिस्सा लेने पहुंचे। यह कार्यक्रम रमजान के दौरान एक कन्वेंशन सेंटर में हुआ जहां 4000 से अधिक रोजेदार मौजूद थे। नायडू ने मुस्लिम समुदाय को रमजान मुबारक की बधाई दी और अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं का जिक्र किया। इस मौके पर चंद्रबाबू नायडू ने अपने एक्स पर लिखा अपने मुस्लिम भाइयों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए मैं दर्शकों से हर रमजान के महीने में एक परंपरा के तौर पर इफ्तार दावत का आयोजन करता आ रहा हूं।
अस्सलाम वालेकुम। आप सबको रमजान बहुत-बहुत मुबारक हो। रमजान में इफ्तार की दावत में शामिल होना। मेरी एक आदत सी बन गई है। इससे मुझे बहुत खुशी और संतोष मिलता है। यहां तक सब कुछ ठीक था क्योंकि रमजान में किसी नेता का इफ्तार पार्टी में जाना कोई नई बात नहीं है। लेकिन इफ्तार करने के बाद इमाम के पीछे खड़े होकर लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नमाज पढ़ना वो बड़ी बात है। और वह भी तब जब दूसरी तरफ एनडीए के नेता लगातार नमाज और रमजान पर बयान देने से बचते नजर आते हैं।
इस मामले में कांग्रेस नेता मुमताज पटेल ने लिखा जब आम मुसलमान नमाज पढ़ते हैं तो यह कानून व्यवस्था का मुद्दा बन जाता है। लेकिन जब आंध्र के सीएम चंद्रबाबू नायडू खुद नमाज़ पढ़ते हैं तो किसी को कोई दिक्कत नहीं होती। नफरत फैलाने वालों की टोली की तरफ से चुप्पी साधी जाती है। इस सरकार को बचाए रखने के लिए यह चुप्पी बहुत जरूरी है। विपक्षी नेताओं के साथ-साथ सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने लिखा जब अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव या राहुल गांधी इफ्तार पार्टी में जाते हैं तब गोदी मीडिया और भाजपा वालों को पेट में दर्द, सिर में दर्द, आंखों में जलन होने लगता है।
लेकिन चंद्रबाबू नायडू इफ्तार के बाद नमाज पढ़ते दिखे। तब गोदी मीडिया और अंधभक्त दोनों का तबीयत एकदम ठीक है। वहीं इस मामले में एक अन्य यूजर ने लिखा कि इफ्तार पार्टी में शामिल होते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी कुछ लोग मुझे झूठा साबित करेंगे और कहेंगे कि बीजेपी के सहयोगी चंद्रबाबू नायडू जी हैं। इस मामले में एक अन्य यूजर ने लिखा कि नायडू जी इफ्तार के दावत में अब बेचारे आरएसएस वाले कहां मुंह छिपाए?
यहां लोगों ने सिर्फ चंद्रबाबू नायडू के नमाज़ पर सवाल नहीं उठाए बल्कि उनके इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ने पर भी सवाल उठाए हैं। एक यूजर ने लिखा आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू विजयवाड़ा में इफ्तार कार्यक्रम में शामिल होते हुए नमाज अदा की। सवाल यह उठता है कि क्या यह पाक साफ थे? पहली सफ में इनको जगह किसने दी? वो भी इमाम के डायरेक्ट पीछे। क्या यह सब केवल रील बाजी के लिए किया जा रहा है? ऐसे में आपको यह बताना भी जरूरी है कि आखिर कोई आम आदमी इमाम के डायरेक्ट पीछे नमाज पढ़ने खड़ा नहीं होता है। क्यों? जमात नमाज में इमाम के पीछे मुकद्दी जिसे आम भाषा में मुअजिम कहते हैं वह खड़े होते हैं। यानी वह सभी मुसलमान जो इमाम का अनुसरण करके नमाज पढ़ते हैं। इमाम सबसे आगे खड़ा होता है और नमाज का नेतृत्व करता है। जबकि मुकद्द पहले सफ यानी पंक्ति में उसके कंधे बराबर या थोड़ा पीछे बगल खड़े होकर उसकी तकबीर कयाम, रुकू, सुजदा आदि हर अमल की नकल करता है। आपको बता दें कि नमाज शुरू करने से पहले तकबीर पढ़ी जाती है जो कुरान पढ़ने वालों को ही पता होती है। ऐसे में सवाल कि जब चंद्रबाबू नायडू को तकबीर नहीं आती है, तो इमाम के पीछे किसने खड़ा किया? क्योंकि मस्जिद का नियम है कि कोई बड़ा या छोटा नहीं, जो जैसे आएगा, वह नमाज़ में शामिल होगा। इसलिए, चंद्रबाबू नायडू को ठीक इमाम के पीछे खड़ा करना एक फोटो सेशन लग रहा है। आपको बता दें कि चंद्रबाबू नायडू इससे पहले भी कई बार मुसलमानों के साथ नमाज पढ़ते हुए नजर आ चुके हैं। ऐसे में इन तमाम मामलों पर आप क्या सोचते हैं? हमें कमेंट्स में जरूर बताएं।
