RSS को बैन कराने वाले हैं ट्रंप ?

ब्रॉट टू यू बाय रजनीगंधा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी रॉ पर बैन लगाने वाले हैं। दरअसल अमेरिका में यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम ने ऐसी मांग उठाई है।

इसे साल 1998 में अमेरिकी कांग्रेस ने बनाया था। यह पूरी दुनिया में धार्मिक आजादी की हालत पर नजर रखने के साथ-साथ अमेरिकी सरकार को सलाह भी देता है। हर साल यह आयोग अलग-अलग देशों पर रिपोर्ट जारी करता है। इस बार की रिपोर्ट में भारत को लेकर काफी सख्त बातें कही गई हैं। कमीशन ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा कि साल 2025 के दौरान भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति और खराब हुई है।

आयोग का आरोप है कि सरकार ने ऐसे कानून बनाए या मजबूत किए हैं जिनका असर अल्पसंख्यक समुदायों पर पड़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई राज्यों में धर्म परिवर्तन विरोधी कानूनों को और सख्त किया गया है जिनमें अब ज्यादा लंबी जेल की सजा का प्रावधान है। यूएससीआईआरएफ का यह भी कहना है कि कई जगहों पर अल्पसंख्यक समुदायों और उनके धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया लेकिन प्रशासन ने ऐसे मामलों में पर्याप्त कारवाई नहीं की। आयोग के मुताबिक कुछ मामलों में प्रशासन ने या तो नजरअंदाज कर दिया या कारवाई बहुत धीमी रही।

आयोग ने रिपोर्ट में कुछ खास कानूनों और नीतियों का भी जिक्र किया। इनमें सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट यानी सीएए, गैर कानानूनी गतिविधि रोकथाम कानून, यूएपीए, फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट यानी एफसीआरए और एनआरसी का नाम शामिल है। आयोग का कहना है कि इन कानूनों का इस्तेमाल कई बार एक्टिविस्ट और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोगों के खिलाफ हुआ है। रिपोर्ट में सीएए विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि उन प्रदर्शनों से जुड़े कुछ एक्टिविस्ट जैसे उमर खालिद और शरजील इमाम पिछले करीब 5 साल से बिना ट्रायल के जेल में हैं। आयोग ने इसे लेकर भी चिंता जताई है। इसके अलावा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2025 के दौरान कुछ राज्यों में गौ हत्या कानूनों के नाम पर मुस्लिम समुदाय के लोगों के खिलाफ की घटनाएं हुई।

आयोग का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने और दोषियों पर कारवाई करने की जरूरत है। अब सवाल यह उठता है कि आयोग ने अमेरिका की सरकार से क्या कहा? यूएससीआईआरएफ ने अमेरिकी सरकार को सुझाव दिया है कि भारत को कंट्री ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न यानी खास चिंता वाले देशों की सूची में डाला जाए। यह सिफारिश आयोग पहले भी कई बार कर चुका है। इस बार सातवीं बार यह बात दोहराई गई है।

इतना ही नहीं आयोग ने यह भी कहा है कि अमेरिका को भारत के साथ हथियारों की बिक्री और व्यापार नीति को धार्मिक स्वतंत्रता के हालात से जोड़ना चाहिए। यानी अगर हालात नहीं सुधरते तो हथियारों की बिक्री पर रोक लगाने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आरएसएस की संपत्ति ज्त करने और उसके सदस्यों के अमेरिका आने पर रोक लगाने जैसे कदमों पर विचार किया जाए। साथ ही आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट की धारा छह के तहत भारत को हथियारों की बिक्री रोकने की बात भी कही गई है।

हालांकि सिर्फ सिफारिश करता है। आखिरी फैसला अमेरिकी सरकार ही लेती है। लेकिन इतनी कड़ी सिफारिशें आने के बाद एक बार फिर भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा तेज हो गई है।

Leave a Comment