ईरान ने खोली जयशंकर और मोदी की पोल कहा – गैस मिलने में इनका हाथ नहीं।

डॉनल्ड ट्रंप और नितिन याू को अब उसके दोस्त ही किनारे लगा रहे हैं। इस जंग में ट्रंप का दाव था कि नाटो के तमाम देश उसके साथ आकर खड़े हो जाएंगे। फिर हम ईरान को बर्बाद कर देंगे। लेकिन हुआ कुछ अलग ही है। ईरान ने अमेरिका के तमाम सहयोगी खाड़ी के जहां-जहां उसने बेस बना रखे थे अमेरिका सब तबाह कर दिए। सारे बेस उड़ा दिए और अब अमेरिका को लग रहा है कि उसके हाथ से यह मामला निकल गया जितना आसान वो समझ रहा था।

इसलिए अब वो नाटो को भी रहा है। कादंबनी शर्मा ने बकायदा तौर पर वो ट्वीट अखबार के एक कटिंग भी साझा की है जिसमें वो नाटो से कह रहा है ट्रंप कि साथ में आइए वरना इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। ट्रंप और नितिन याू के ईरान युद्ध से अब उसके दोस्त जो मुल्क हैं मित्र देश उन्होंने भी किनारा कर लिया। अब जो खबर आ रही है, इंग्लैंड, स्पेन, कनाडा के बाद अब फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश कहीं ना कहीं दूरी बनाते दिख रहे हैं।

दूरी बना रहे हैं इस से। डॉनल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर मित्र देश मदद नहीं करते हैं तो नाटो का भविष्य बहुत बुरा हो सकता है। उसने कहा था क्योंकि स्टेट ऑफ हार्मोस यहां से दुनिया का लगभग 20% तेल की सप्लाई गुजरती है। ईरान की वजह से वो बंद हो रहा है। लेकिन इसके बाद भी ट्रंप की सुनने को कोई तैयार नहीं क्योंकि लोगों को पता है कि ट्रंप एक पल में कुछ है। अगले पल कुछ है। अपने बयानों को किस तेजी के साथ वो पलटते हैं।

बदलते हैं और जिस चीज का वो आश्वासन दें समझ लीजिए वो चीज नहीं होगी। उल्टी दुनिया में जाते हैं ट्रंप और ऐसे में ट्रंप के दोस्त ही अब ट्रंप से दूरी बनाकर रखे हुए हैं। यही हालात तब और गंभीर हो जाते हैं जब ट्रंप के दोस्त जो नाटोक में हैं वो उसकी सुनते नहीं और कुछ देश जैसे भारत जैसे देशों को जबरदस्ती वो सुनवाता है। वो कहता है कि आप वही कीजिए जो मैं कर रहा हूं।

जो मैं कह रहा हूं वो कीजिए वरना मैं टेरिफ लगा दूंगा। वरना मुझसे ही तेल खरीदा नहीं तो और भी कोई नुकसान कर दूंगा। पॉलिटिकल करियर खत्म कर दूंगा। इस तरह के वो बयान देता है। दूसरी तरफ भारत में ईरान के प्रतिनिधि आयतुल्लाह अली खुनी के प्रतिनिधि उनसे एक इंटरव्यू के दौरान पत्रकार ने पूछा कि भारतीय झंडे के साथ दो जहाज आए। क्या आप भारत के लिए कुछ रियायतें देंगे? भारत में ईरान के प्रतिनिधि ने कहा कि हमने देखा कि ज्यादातर भारतीयों की हमारे साथ सहानुभूति है। गौर कीजिएगा शब्दों पर। ज्यादातर भारतीयों की हमारे साथ सहानुभूति है। उन्होंने अमेरिका के युद्ध की निंदा की है और बच्चों पे हुए हमले के खिलाफ खड़े हुए हैं। भारत सरकार का इसमें कोई जिक्र नहीं किया उन्होंने। उन्होंने ये नहीं कहा कि भारत सरकार ने हमारे ऊपर हुए हमले की निंदा की है। बच्चों पर हुए हमले के खिलाफ वो खड़ा हुआ है।

भारत सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं। उन्होंने कहा कि इस देश के नागरिक खड़े हुए हैं। यानी कि वो जो कुछ कह रहे हैं, जो कुछ रियायत दे रहे हैं वो इस देश के नागरिकों के लिए दे रहे हैं। सरकार के लिए नहीं दे रहे। उन्होंने कहा कि हमने ईरान को बताया कि जिन भारतीयों ने हमारा समर्थन किया उन्हें गैस और तेल की जरूरत है। सरकार ने इसकी अनुमति दे दी। उन्होंने ये नहीं कहा कि मोदी जी ने कहा है मोदी जी बहुत बड़े मित्र हैं।

आपके बहुत प्रशंसक है इसलिए मोदी जी के कहने पे तेल दे दीजिए। भारत सरकार के कहने पे तेल दे और जो गैस है उसको उसके जहाज को रास्ता दे दीजिए। नहीं। उन्होंने कहा कि जो भारत के लोग हैं जो प्रोटेस्ट कर रहे हैं अमेरिका के खिलाफ जो इजराइल के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे हैं। ईरान के साथ खड़े हुए हैं। ईरान के साथ सिंपैथी जता रहे हैं।

वहां पर जो बच्चियां मारी गई है उनके साथ सिंपथी जता रहे हैं। वो उनको जरूरत है तेल की। उनके लिए जहाज छोड़ दीजिए। भारत सरकार के लिए नहीं भारतीयों के लिए उन्होंने जहाज छोड़ा है। ईरान से दो जहाज आ रहे हैं तो उसमें मोदी जयशंकर या भाजपा सरकार का कोई रोल नहीं है। ये ईरान के प्रतिनिधि ने नाम तक नहीं लिया अपने इस बयान में कि मैं मोदी सरकार ने बहुत अच्छी दोस्ती निभाई है। बहुत टेलीफोन पे बात की है। इसलिए हमने जहाज छोड़ दिया। नहीं भारत के लोग खड़े हुए थे अमेरिका की गुंडागर्दी के खिलाफ। युद्ध के खिलाफ, निर्दोष बच्चों पर बम गिराने के खिलाफ, दूसरे देशों पर कब्ज़े के खिलाफ और ईरान इसे पहचान रहा था, आइडेंटिफाई कर रहा था। ईरान ने भारत को जो रियायत दी है, उसका श्रेय भारत की जनता को वो दे रहे हैं। भारत सरकार को नहीं दे रहा। ये बहुत बड़ा फर्क है। ये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत बड़ा फर्क आ गया है।

जिस बात को लोग कहते थे ना सरकार इज नॉट अ कंट्री। सरकार देश नहीं होती। सरकार सिर्फ उस देश का एक चेहरा होती है। उस देश को गवर्न करने के लिए होती है। लेकिन सरकार के अगर फैसले गलत हैं तो उसका नतीजा उसका खामियाजा देश की जनता नहीं भुगतती। अगर देश की जनता जागरूक है। क्योंकि भारत की जनता जागरूक थी। उसने प्रोटेस्ट के मोर्चे निकाल दिए। उसने लंबे-लंबे प्रोटेस्ट किए। सेमिनार्स किए अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ। नेतन याू और इजराइल के खिलाफ। ईरान का समर्थन किया। खमैनी का समर्थन किया। ईरान में जो पीड़ित है उनका समर्थन किया और उसने साफ तौर पर यह बता दिया कि हम भारतीय किसी भी , और किसी भी देश की के खिलाफ है। और यही नोटिस किया ईरान ने और कहा कि हमने दो तिरंगा लगे जहाजों को इसलिए छोड़ा क्योंकि इसमें उन भारतीयों के लिए तेल जा रहा था जो हमारे साथ खड़े हुए थे जो ईरान के साथ खड़े थे।

ऐसे में ईरान ने उन भारतीयों का साथ दिया है और यहां के प्रतिनिधि ने अपने ईरान सरकार को ये बताया कि इसमें वो तेल है जो इस देश के उन भारतीयों के पास पहुंचेगा जो अमेरिका की के खिलाफ ईरान के समर्थन में खड़े हुए हैं। इसलिए उन जहाजों को हमने छोड़ दिया। वो भारत तक आया। इस पूरे बयान में कहीं भी भारत की सरकार का जिक्र ना करके एक बहुत महीन सी लकीर खींच दी है और इस पर सरकार को खुद गौर करने की जरूरत

Leave a Comment