92700 टन LPG पहुंच रहा भारत, कितनी है भारत में डिमांड?

भारत से 21,000 कि.मी. दूर मिडिल ईस्ट में दो शक्तिशाली देशों ने मिलकर ईरान पर हमला कर दिया। अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर करते वक्त सोचा नहीं था कि यह युद्ध इतना लंबा खींच जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को वेनेजुएला की तरह समझ रहे थे। लेकिन ईरान ने जो ताकत दिखाई उसने सिर्फ अमेरिका नहीं बल्कि पूरे विश्व को हिला कर रख दिया है। भारत इस में कहीं शामिल नहीं है। लेकिन वॉर के साइड इफेक्ट्स को झेल रहा है।

स्टेट ऑफ हॉर्मोस पर ईरान की पहरेदारी और पाबंदी ने भारत में तेल और गैस की किल्लत पैदा कर दी है। भारत में एलपीजी गैस संकट के बीच अब राहत की भी खबर आई है। ईरान ने गैस से भरे भारत के जिन दो जहाजों को हॉर्मू से गुजरने की इजाजत दी थी, अब वह मुंद्रा पोर्ट और कांडला पोर्ट पर पहुंच रहे हैं। गैस संकट के बीच 46,000 टन एलपीजी की खेप लेकर जहाज भारत पहुंच रहे हैं। आज शिवालिक नाम का जहाज कच्छ के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचेगा। वहीं दूसरा जहाज नंदा देवी कल कांडा पोर्ट पर पहुंचने वाला है। इन दोनों जहाजों में कुल 92,700 टन एलपीजी गैस है। मिडिल ईस्ट टेंशन और स्टेट ऑफ हॉर्मोज संकट के बीच ईरान ने इन दोनों जहाजों को गुजरने की इजाजत दी थी।

दोनों जहाजों के भारत पहुंचने के बाद से गैस संकट के बीच थोड़ी राहत मिली है। भारत क़तर, कुवैत, सऊदी अरब जैसे मिडिल ईस्ट देशों से एलपीजी आयात करता है। युद्ध की वजह से यह देश संकट में घिरे हैं। हॉर्मूज का रास्ता बंद होने की वजह से आयात में मुश्किल हो रही है।

गैस संकट के बीच भारत की कूटनीतिक रणनीति की बदौलत दो जहाज हॉर्मूज को पार करने में सफल रहे हैं। अब खबर आ रही है कि एलपीजी से लदे छह टैंकर और एलएनजी से भरा एक टैंकर हॉर्मूज के पश्चिमी हिस्से में है जिसे पार करवाने के लिए भारत की ओर से लगातार कोशिशें हो रही है। हॉर्मूज के किनारे भारत के 22 जहाज इंतजार कर रहे हैं। भारत और ईरान के बीच बातचीत चल रही है।

माना जा रहा है कि दोनों के बीच सहमति बन जाएगी जिसके बाद छह और गैस से लदे जहाज जल्द भारत पहुंच जाएंगे। ईरान ने साफ कहा है कि वह अमेरिका और इजराइल को छोड़कर बाकी देशों के जहाजों को नहीं रोकेगा। वहीं उसने भी शर्त रखी है कि जो भी देश डॉलर के बजाय चीन की करेंसी युवान में ट्रेड करेगा उसके लिए हॉर्मूज के रास्ते खुल जाएंगे। भारतीय नौसेना की निगरानी में दो जहाज शिवालिक और नंदा देवी करीब 92,700 टन रसोई गैस लेकर 16 और 17 मार्च को भारत पहुंच रहे हैं। इस गैस से भारत को बहुत बड़ी राहत तो नहीं लेकिन सवा दिनों की खपत को पूरा कर सकेगा। भारत में एलपीजी की रोजाना खपत करीब 80 टन की है।

हर दिन करीब 75 लाख सिलेंडर इस्तेमाल किए जाते हैं। जिनमें से 85% सिलेंडर घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होते हैं। भारत में 33 करोड़ एलपीजी उपभोक्ता है। यानी जितना गैस लेकर शिवालिक और नंदा देवी जहाज भारत पहुंच रहे हैं, उससे भारत के सवा दिन के खपत को पूरा किया जा सकेगा। बता दें कि भारत गैस के लिए आयात पर निर्भर है।

भारत अपनी जरूरत का 60% एलपीजी आयात करता है। जिसमें से 85 से 90% हिस्सा खारी देशों से हॉर्मोज के रास्ते आयात किया जाता है।

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