सबको माफकरते हुए वो सब से माफी मांगते हुए उड़ जाओ। ठीक है। 13 साल यानी 4745दिन। एक ही बिस्तर, एक ही छत और मशीनों का शोर। हरीश राणा के लिए जिंदगी और मौत के बीच केवल एक फासला रह गया था लाइफ सपोर्ट सिस्टम का। 13 साल से हरीश एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहां ना तो कोई आवाज है और ना ही कोई एहसास। उनके सिरहाने बैठकर मां-बाप ने हर दिन इसी उम्मीद में निकालाकि शायद शायद आज हरीश की उंगलियां हिले। शायद आज वो कुछ कह देगा। लेकिन वक्त थमा रहा।
आखिरकार अपने दिल पर पत्थर रखकर मां-बाप ने बेटे को आजाद करने काफैसला किया। घर पर मिली इस भावुक विदाई के बाद हरीश को एम्स ले जाया गया। एम्स में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक हरीश के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाया जाएगा ताकिउन्हें प्राकृतिक मृत्यु मिल सके।
बता दें यह एकदम से नहीं होगा। इसके लिए पूरी प्रक्रिया पूरे [संगीत] प्रोसेस को फॉलो करना होगा। इस प्रोसेस पर डिस्कशन के लिए आज एम्स में [संगीत] डॉक्टरों की मीटिंग बुलाई गई है। खबर के मुताबिक दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की यह विशेष कमेटी चरणबद्ध तरीके से उनके जीवन रक्षक उपकरणों को हटाने का फैसला लेगी। बताया जा रहा है बीते रोज रविवार को डॉक्टरों ने हरीश राणा के लाइफ सपोर्ट सिस्टम की साफ सफाई की। बताया गया सोमवार को एम्स प्रशासन द्वारा गठित डॉक्टरों की कमेटी की बैठक होगी। यही वह कमेटी है जो हरीश के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाने पर चर्चा कर फैसला लेगी। सूत्रों की मानें तो रविवार के दिन भी हरीश केगले और पेट में डाली गई ट्यूब को हटाने की चर्चा होती रही।
हालांकि एम्स की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया इस बारे में बात करते हुए एम्स की कार्यकारी प्रवक्ता अस्मिता पाटिल ने कहा कि एम्स सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर रहा है।
गौरतलब है 13 साल पहले गंभीर चोट लगने के कारण हरीश कोमा में चले गए थे। हरीश के गले में टिक्स्ट्रोमीकर एक ट्यूब डाली गई थी। इसके अलावा उनकी पीठ में भी एक ट्यूब डाली गई जिसके सहारे उनको खाना दिया जाता है। इसी के साथ उन्हें कैथेटर भी लगाया गया है। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरीश को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी गई थी।
इसके तहत उनके जीवन रक्षा उपकरणों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की स्वीकृति दी गई है। एम्स ने आठ डॉक्टरों की कमेटगठित की है। इनमें ईएनटी, मेडिसिन, ओको और केयर के विशेषज्ञ शामिल है। 14 मार्चकी सुबह हरीश को दिल्ली एम्स ले जाया गया था। यहां उन्हें एम्स के भर्ती कराया गया। एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि हर्ष को लगी ट्यूब की साफ सफाई की गई है। कमेटी के नेतृत्व में उनका किया जा रहा है ताकि दर्द रहित तरीके से उनकी निष्क्रियइच्छा मृत्यु की प्रक्रिया पूरी हो सके।
सोमवार को बैठक में इस बात पर फैसला लिया जाएगा कि उनके पोषण के लिए पेट में लगी ट्यूब को शरणबद्ध तरीके से कैसे हटानाहै। बता दें अशोक राणा के बड़े बेटे हरीश राणा चंडीगढ़ के कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। 20 अगस्त 2023 को चौथी मंजिल से गिरने की वजह से हर्ष को सिर में गंभीर चोट लगी थी। उपचार के दौरान वे कोमा में चले गए थे। चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक हरीश राणा का कई जगह इलाज चला। लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। हरीश राणा को बीते साल मई में सेक्टर 39 स्थित जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
परिजनों का कहना है कि उनके इलाज के लिए उन्होंने हर संभव कोशिश की। घर की पुश्तानी जमीन बिक गई। तीन मंजिला मकान भी हाथ से चला गया। लेकिन मां-बाप ने हरीश का इलाज कराना नहीं छोड़ा। उन्हें उम्मीद थी कि किसी ना किसी दिन हरीश इस गहरी नींद से जाग जाएंगे। उनके जीवन का सहारा एक बार फिर से उनकी जिंदगी में हंसता खेलता लौट आएगा।
हालांकि ऐसा हुआ नहीं। 13 साल का लंबा इंतजार, पथराई हुई आंखें और हर सांस के साथ टूटती उम्मीदें। हरीश राणा की कहानी केवल एक मेडिकल केस नहीं है। यह मां-बाप की असीम धैर्य और विवशता की कहानी है। कल्पना कीजिए उस दर्द की जहां पिता को अपने ही जवान बेटे के लिए मौत की दुआ मांगनी पड़ी। उस मां के लिए जो कह रही है कि बस अब तू आराम से जा ताकि वो उस शरीर से आजाद हो सके जो पिछले एक दशक से ज्यादा के समय से उसके लिए कैदखाना बना हुआ है।
हरीश को एम्स में भर्ती तो करा दिया गया है। उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। लेकिनकि यह एकदम से नहीं होगा और यकीनन यह समय उनके [संगीत] माता-पिता उनके परिवार वालों के लिए बेहद मुश्किल होगा। अपने बेटे के लिए इच्छा मृत्यु तो मांग ली लेकिन अब अपने बेटे को इस हाल में देखकरमां-बाप पर क्या गुजरती होगी इस बात का अंदाजा लगाया जाना बेहद मुश्किल नहीं है। भारत के हर कोने से बल्कि दुनिया भर से जो हरीश का केस जानते हैं उनके बिना किसी तकलीफ शांत होने की दुआ मांग रहे हैं। उनके मां-बाप को हिम्मत मिले ऐसी कामना कर रहे हैं।
पता नहीं कितने लड़के पड़े रहते हैं। तो हम चाहते हैं कि सबका भला हो। कल्याण तो इस जनहित केतु बताया क्या बताऊं मैं अब मां-बाप को कैसे लगता होगा कुछ नहीं बोल सकते दर्द क्या होता है यह अगर सच में समझना है तो उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रहने वाले हरीश राणा के मां-बाप की पूरी कहानी सुननी होगी। वो मां जिसने 9 महीने अपने बेटे को अपनी कोख में रखा जिसने उसे अपनी गोद में खिलाया जिसने सपने देखे थे कि उसका बेटा बड़ा होकर उसका सहारा बनेगा। लेकिन उस मां को क्या पता था कि जिस बेटे को उसने पढ़ने के लिए घर से दूर भेजा वो इतना दूर चला जाएगा कि कभी वापस नहीं लौटेगा। वो पिता जिसे आज भी अपने बेटे पर गर्व है।
लेकिन उस गर्व के पीछे 13 साल का दर्द है। जरा सोचिए दोनों बुजुर्ग मां-बाप अपने कलेजे के टुकड़े को 13साल से एक जिंदा लाश की तरह तड़पते देख रहे हैं। हर दिन अंदर ही अंदर टूट रहे हैं। और अब वो समय आ गया जब बेटा हरीश अलविदा कहने जा रहा है।
13 साल के दर्द की इस कहानी को सुनने के लिए हिम्मत 13 साल पहले हरीश राणा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। तेजतर्रार हंसने खेलने वाला सपनों से भरा एक नौजवान। लेकिन फिर एक हादसा हुआ। 20 अगस्त 2013 अपनी पीछे की चौथी मंजिल से हरीश नीचे गिर गए। यह हादसा था या किसी ने [संगीत] धक्का दिया आज तक कोई नहीं जान पाया। लेकिन उसे एक पल ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी। हरीश कुमा में चले गए। मां-बाप के पैरों तले जमीन खिसक गई।
