गुमनामी में गई कादर खान की जान120 घंटे तक रहे भूख-प्यासे,

कॉमेडी के जादूगर थे कादर खान। हर किरदारमें फूंक देते थे जान। जिंदगी भर जिसने हंसाया उसी को मिली थी दर्दनाक गुमनामी में कटे आखिरी दिन। अंतिम सांस तक रही बॉलीवुड से शिकायत। लालाज बीमारी ने बिगाड़ी हालत। दिमाग ने काम करना किया बंद।

पांच दिन तक पर लड़ी जिंदगी की । दफन होने के लिए देश की मिट्टी भी नहीं हुई नसीब, तो फैंस भी नहीं कर पाए अपने चहेते सितारे के आखिरी दर्शन। कादर खान हिंदी फिल्मों का वो सितारा जिसे उसके आखिरी दिनों में बॉलीवुड ने भुला दिया।

लेकिन फैंसआज तक अपने चहेते सितारे को नहीं भुला पाए हैं। निधन के 7 साल बाद कादर खान एक बार फिर सुर्खियों में छाए हुए हैं। दरअसल कॉमेडी शो द ग्रेट इंडियन कपिल शो के चौथे सीजन के ग्रैंड फिनाले में सुनील ग्रोवर ने कादर खान को बेहद खास अंदाज में ट्रिब्यूट दिया। मंच पर कादर खान के गेटअप में उतरे सुनील ग्रोवर ने अपनी शानदार मिमिक्री और अंदाज से ऐसा माहौल बना दिया कि दर्शकों को लगा जैसेकादर खान एक बार फिर जीवित हो उठे हो। सुनील की परफॉर्मेंस में कादर खान की आवाज, उनके बोलने का अंदाज और कॉमिक टाइमिंग इतनी सटीक थी कि दिवंगत एक्टर को याद कर तमाम फैंस भावुक हो गए।

फैंस के जहन में लेजेंड्री एक्टर की यादें ताजा हो गई और चर्चा में आ गई कादर खान को मिली वो गुमनामी जिसके हकदार वो बिल्कुल नहीं थे। जी हां, हिंदी फिल्मों के सुनहरे दौर का हिस्सा रहे कादर खान ने अपने आखिरी दिन बेहद गुमनामी में बिताए। यहां तक कि अंतिम सांस तक उन्हें यही अफसोस रहा कि बॉलीवुड ने उन्हें भुला दिया। अपने आखिरी साल कादर खान ने बॉलीवुड और देश से मीलों दूर कनाडा में बिताए।

कनाडा के अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ा और अंतिम संस्कार के लिए भारत भी नहीं लाए गए। कनाडा में ही उन्हें सुपुर्दे खाक किया गया और फैंस को अपने चहेते सितारे के आखिरी दर्शन भी नसीब नहीं हुए। बता दें कि 31 दिसंबर 2018 को कादर खान का 81 साल की उम्र में निधन हुआ था।

बताया जाता है कि 5 दिन पहले ही उन्होंने खाना पीना छोड़ दिया था। 120 घंटे तक वह भूखे प्यासे जिंदगी और से लड़ते रहे। निधन से पहले वो कोमा में चले गए थे। दरअसल कादर खान को प्रोग्रेसिव सुपर न्यूक्लियर पॉलिसी नाम की बीमारी हो गई थी।

जिसका कोई इलाज भी संभव नहीं है। इस लालाज बीमारी ने कादर खान की हालत बेहद बिगाड़ दी थी। साल 2016 में उनके घुटनों का ऑपरेशन हुआ था। जिसके बाद वह चलने से भी डरने लगे थे और धीरे-धीरे पूरी तरह से व्हीलचेयर पर आ गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कादर खान [संगीत] ने लगभग 2 साल बेड पर गुजारे। लालाज बीमारी ने उन्हें पूरी तरह से मोहताज कर दिया था।

बताया जाता है कि आखिरी दिनों में उनके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था। उनकी याददाश्त भी चली गई थी। इसके बाद वह बोलने में भी असमर्थ हो गए थे। कुछ भी बात कहने के लिए वह सिर्फ आंखों से इशारा किया करते थे। सांस लेने में तकलीफ के बाद बेटे ने उन्हें इलाज के लिए कनाडा के एक हॉस्पिटल में एडमिट करवाया था। जहां वो कई दिनों तक पर रहे। पांच दिनों तक उन्होंने ना कुछ खाया ना पानी पिया। और फिर 31 दिसंबर 2018 को उन्होंने हॉस्पिटल में ही दम तोड़ दिया।

उनका अंतिम संस्कार भी भारत की बजाय कनाडा में ही किया गया। कादर खान के निधन के बाद उनकी करीबी दोस्त और फिल्म डायरेक्टर फौजिया अर्शी ने खुलासा किया थाकि कादर खान को इस बात का बहुत दुख था कि उन्होंने जिस इंडस्ट्री के लिए इतना कुछ किया उसी इंडस्ट्री के लोगों ने उन्हें भुला दिया।बीमार होने के बाद किसी ने उन्हें कॉल तक नहीं की और ना ही उनका हालचाल जाना।

हालांकि वह हमेशा अमिताभ बच्चन को याद किया करते थे। फौजिया के मुताबिक सिर्फ अमिताभ बच्चन ही वह शख्स थे जो फोन पर उनका हालचाल जानते थे। गौरतलब है कि कादर खान ने अपने करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और 250 से ज्यादा फिल्मों के उन्होंने डायलॉग लिखे। कादर खान तीन बेटों अब्दुल कुदूस, सरफराज खान और शाहनवाज खान के पिता थे। बरसों पहले ही उनके तीनों बेटे कनाडा में सेटल हो गए थे। साल 2021 में कादर खान के बड़े बेटे अब्दुल कुदूस का भी निधन हो गया था।

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