राजस्थान के जैसलमेर में 9 साल का बच्चा पत्थर सा बनता जा रहा है। ऐसा एक रेयर कंडीशन की वजह से हो रहा है। इस कंडीशन का नाम है । यानी । इसे बोलचाल की भाषा में स्टोन मैन भी कहते हैं। यह राजस्थान का पहला केस है। इसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे हड्डियों में बदलने लगती है। इससे शरीर समय के साथ जकड़ने लगता है और मरीज का हिलना डुलना मुश्किल हो जाता है। पर यह रेयर जेनेटिक कंडीशन होती क्यों है?
इसके लक्षण क्या हैं और क्या इसका कोई इलाज है? यह हमने पूछा नारायण हॉस्पिटल जयपुर में ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट डिपार्टमेंट के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर हेमेंद्र कुमार अग्रवाल से। डॉक्टर हेमेंद्र कहते हैं कि यानी एफओपी एक जेनेटिक कंडीशन है। यह बहुत ही रेयर और गंभीर बीमारी है। इसमें शरीर की मांसपेशियां, लिगामेंट और टेंडेंस धीरे-धीरे हड्डी जैसे में बदलने लगते हैं। इससे शरीर का मूवमेंट बहुत सीमित हो जाता है। यह बीमारी शरीर के एक खास जीन में बदलाव की वजह से होती है।
इस जीन का नाम है एसी वीवीआर वन। जब इस जीन में म्यूटेशन होता है तब शरीर गलत जगहों पर भी हड्डियां बनाना शुरू कर देता है। इससे शरीर के अलग-अलग हिस्से सख्त होने लगते हैं और मरीज को रोज के काम करने में दिक्कत आने लगती है।
कई मामलों में इस बीमारी के संकेत जन्म के समय ही दिखने लगते हैं। जैसे पैरों के अंगूठे की बनावट सामान्य से अलग होना। फिर जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, शरीर के अलग-अलग हिस्सों में सूजन आने लगती है। दर्दनाक गांठे भी बनने लगती है।
बाद में यह हिस्से धीरे-धीरे हड्डी में बदल सकते हैं। जिससे शरीर की मूवमेंट कम होने लगती है। अगर इलाज की बात करें तो इस कंडीशन का अभी तक कोई परमानेंट इलाज नहीं है। डॉक्टर सूजन और दर्द कम करने वाली दवाएं देते हैं ताकि लक्षणों को कंट्रोल किया जा सके। इसके अलावा एफओपी के मरीजों को कुछ खास सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। जैसे , या मांसपेशियों में इंजेक्शन से बचना। क्योंकि इससे शरीर में नई हड्डी बनने की प्रक्रिया बढ़ सकती है।
