इजरायल को बचाने वाले साधन अब खत्म।

के बीच एक ऐसी रिपोर्ट आई है जिसमें कहा जा रहा है कि इजराइल के मशहूर आयरन डोम की खत्म हो रही है। ईरान ने इतनी बड़ी संख्या में हमले किए हैं कि उन्हें रोकने के लिए अब इज़राइल के पास नहीं बची है। यह बताएंगे हमारे साथी मानस। मानस क्या ये रिपोर्ट इस तरफ इशारा करती है कि वाकई ईरान ने यूएस और इजराइल को थका दिया है।

देखिए ईरान जो भी हमले कर रहा है पहली बात तो वो सिंगल हमले नहीं कर रहा। वो बराज ऑफ एक जो शब्द हम सुन रहे हैं वो एक साथ 12 20 के झुंड पे भेज रहा है जिसको स्वम कहते हैं। इस लिहाज से अगर इजराइल के जो आयरन डोम देखें और डेविड स्लिंग नाम का भी उसके पास एक एयर डिफेंस सिस्टम है। तो ये दोनों जो एयर डिफेंस सिस्टम है ये ल्च करते हैं। अब पहली बात यहां दो चीजें हैं।

पहली बात तो कॉस्टिंग की बात है कि एक जो ₹ लाख, 3 लाख, ₹4 लाख अगर भारतीय करेंसी में देखें तो उसकी उतनी कीमत है। उसको रोकने के लिए करोड़ों की मिसाइल इज़राइल खर्च कर रहा है। दूसरी बात यह है कि इतनी सारी को रोकने के लिए आयरन डोम की एक बैटरी में 40 से 48 होती हैं और डेविड स्लिंग में भी लगभग उतनी ही होती हैं। अगर उन सभी को रोकना है। अब ईरान ने आप मान के चलिए कि 40 एक साथ ल्च की। एक बैटरी में हो सकता है तत्काल उतनी ना हो या जो साइलो होता है जहां से ल्च होती है एयर डिफेंस की वहां पे उतनी मिसाइलें ना हो।

इस वजह से आप देख रहे होंगे कि ईरान के कई हमले इजराइल के शहरों में इजराइल की राजधानी पे हमले हो रहे हैं तिलवीब में और बहुत भारी तबाही मचा रहा है ईरान। दूसरी चीज यह है कि ईरान ने एक ऐसा मतलब तुर्क का इक्का कह सकते हैं उसको अपने तरकस से निकाला है। वो है क्लस्टर । क्लस्टर एक ऐसी होती है जो इसमें सिंगल है लेकिन उसमें से हैंड ग्रेनेड के साइज के 80 बम से 90 निकलते हैं। 80 तो निकलते ही निकलते हैं।

इतना कंफर्म है ईरान के पास जो है। अब एक को आप रोक सकते हैं। को तो आयरन डोम डिस्ट्रॉय कर दे रहा है। हवा हवा में ही मार गिरा रहा है। लेकिन जब उसमें से 80 बम निकल रहे हैं जो हैंड ग्रेनेड के साइज के हैं और वो करीब 7 से 8 कि.मी. के एरिया में जब वो फैलते हैं तो वो बहुत ज्यादा भारी तबाही मचाते हैं। अब इन 80 बमों को रोकने के लिए इनके पास कोई ऐसा मैकेनिज़्म नहीं है।

जो दूसरे तरीके हैं जो हैंड हेल्ड जो एंटी एयरक्राफ्ट गन होती हैं या एयर डिफेंस गन होती हैंडल्ड उनमें भी यह क्षमता नहीं होती है कि इस साइज के जो क्लस्टर म्युनिशन हैं उनको रोक सके और इस वजह से इजराइल की जो हैं लगातार उसमें मतलब इतनी ज्यादा उनको लॉन्च करनी पड़ रही हैं कि वो निश्चित तौर पे थक तो गए हैं और अमेरिका के साथ भी यही दिक्कत है। अमेरिका का जो थर्ड एयर डिफेंस है जो मिडिल ईस्ट के देशों में उसने अपने बेसिस पे तैनात किया है उसके साथ भी यही समस्या है।

पहली बात तो कॉस्टिंग की जैसा हमने बात की किमत बहुत ज्यादा है। एक ड्रोन को एक 4 लाख के ड्रोन को रोकने की कीमत करोड़ों रुपए में है। तो ये इस लिहाज से भी इकोनॉमिकली भी अमेरिका और इजराइल के लिए महंगा पड़ रहा है। दूसरी चीज है कि जो टैक्टिक्स अपनाई है ईरान ने एक ये जो क्लस्टर बम वाली खासकर वो सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। तो मानस साहब यह बताइए कि अगर इजराइल को यूएस से सपोर्ट ना मिले अगर इंटरसेप्टर्स जो सप्लाई है वह ना मिले तो फिर इजराइल को क्या नुकसान हो सकता है?

देखिए जिस रिपोर्ट का हम जिक्र कर रहे हैं सीमा फोर की रिपोर्ट उसमें यह कहा गया है कि अमेरिका को उन्होंने अधिकारियों के हवाले से दावा किया रिपोर्ट में कि अमेरिकी अधिकारियों को इस बात की जानकारी थी। 2025 में जब 12 दिन तक इन दोनों देशों ईरान और इजराइल के बीच जब का जो आदान-प्रदान हुआ जो काफी ज्यादा लड़ाई हुई 12 दिनों तक चली उस दौरान भी जो इंटरसेप्टर्स थे उनकी कमी देखी गई थी और तब से कहा जा रहा है कि तब से वो जो इंटरसेप्टर्स का स्टॉक भेजा नहीं गया ऐसा दावा किया गया है उस रिपोर्ट में अगर अमेरिका को अपनी जो इजरायली टेरिटरी है उसको बचाना है जो इजराइल को उसको सपोर्ट करना है.

तो उसको निश्चित तौर पे भेजने पड़ेंगे इंटरसेप्टर और अमेरिका से अगर उनको हेल्प नहीं मिलती है तो यह निश्चित तौर पर इजराइल के लिए खतरे की घंटी होगी क्योंकि आप समझिए कि दो तरीके होते हैं किसी को मार गिराने के। या तो आप एयर डिफेंस इस्तेमाल करें या तो फाइटर जेट्स का इस्तेमाल करें। दोनों ही जो ईरानी तरीका है जो ईरान जिस कीमत पे उनको जितना नुकसान पहुंचा रहा है उसकी उसकी तुलना में बहुत महंगे हैं।

अगर आप फाइटर जेट्स उड़ाते हैं तो F35 जैसा जो फाइटर जेट है इजराइल के पास उनके पास और भी फाइटर जेट्स हैं लेकिन वो F35 का इस्तेमाल कर रहे हैं जो अमेरिकन हैं। काफी उन्नत फाइटर जेट है।

लेकिन उसकी 1 घंटे की उड़ान की कॉस्टिंग बहुत ज्यादा है। उसकी फ्यूल कंजमशन बहुत ज्यादा है। उसका जो ऑपरेटिंग कॉस्ट जो कहते हैं वो हजारों डॉलर में है। तो, इस लिहाज़ से अमेरिका के लिए अह मुश्किल हो रहा है और इज़राइल के लिए तो मुश्किल हो ही रहा है क्योंकि उसकी टेरिटरी पे सीधे हमले हो रहे हैं। अभी तक हम देख रहे थे कि अमेरिका जो आप बता रही एयरबसेस हैं.

अमेरिका के मिडिल ईस्ट में। वहां पे हमले हो रहे थे। और हमारे पास जो रिपोर्ट है उसमें कहा गया है कि अभी तक। सिर्फ इंटरसेप्टर्स पर अमेरिका ने $5 बिलियन डॉलर खर्च कर दिए हैं। जो उसकी थर्ड और पेट्रियट नाम के जो एयर डिफेंस हैं.

मिडिल ईस्ट के जो उसके बेसिस पर तैनात हैं। $5 बिलियन डॉलर के सिर्फ वो इंटरसेप्टर्स खर्च कर चुका है। तो अगर इस लिहाज से देखें तो यह जंग ना सिर्फ बहुत महंगी पड़ रही है बल्कि बहुत ज्यादा थका देने वाली भी है। क्योंकि आप इस चीज से ना अगर आप एक फाइटर जेट से फाइटर जेट की लड़ाई होती तो शायद वह आसान होता है। आसान तो लड़ाई बिल्कुल नहीं होती। हर लड़ाई मुश्किल होती है। लेकिन कंपेरेटिवली देखें तो वह थोड़ा सा इजी होता है। लेकिन अगर आप 100 ड्रोंस का झुंड है और उसको आपको एक फाइटर जेट से मार गिराना है तो पहली बात ऑपरेटिंग कॉस्ट ज्यादा है। पायलट की मेहनत ज्यादा है। उसमें हथियारों की संख्या आपको ज्यादा चाहिए।

अलग तरह के हथियार चाहिए। आपको कॉस्टिंग का ऑब्वियसली ध्यान रखना पड़ेगा। क्योंकि में आपको पैसा खूब सारा चाहिए होता है। हथियारों का आपको स्टॉक हमेशा मेंटेन रखना होता है। और रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जो भी इजराइल के पास स्टॉक था जो खत्म हो रहा था। इसकी जानकारी अमेरिकनंस को थी। बावजूद इसके अब क्यों नहीं भेजा गया वह स्टॉक? क्या दिक्कत थी? क्या कोई मिसकम्युनिकेशन थी? या उनको लगा था कि डोनाल्ड ट्रंप को या बेंजामिन ने नतन्याऊ को यह लगा था कि ईरान को तो ऐसा कुछ करेगा नहीं ईरान। क्योंकि पहले भी जब ईरान पे जब हमले हुए हैं अह डोमेस्कस में जब ईरानी कंसोलेट पे हमला हुआ था तो उसके बाद भी ईरान ने कुछ बैलेस्टिक मिसाइलें दागी थी।

लेकिन आयरन डोम ने उनको रोक दिया था। तो हालांकि बहुत कम उसने दागी थी अभी की तुलना में। तो तभी उसी चीज को हो सकता है इन्होंने असेस किया होगा और ये कहा होगा कि ठीक है हो सकता है उतने ही हमले हो उतनी ही मिसाइलें आए और इस वजह से शायद इन्होंने ईरान की पावर को आंकने में गलती कर दी क्योंकि अंडरएस्टीमेट एक जो शब्द आपने यूज़ किया कि अंडरएस्टीमेट कर दिया इन्होंने ईरान को और ये इनको भारी पड़ गया क्योंकि हमेशा से ईरान पे जब से सेंशन लगे हैं उसने सिर्फ और सिर्फ ड्रोन टेक्नोलॉजी और टेक्नोलॉजी इन दो चीजों में जबरदस्त इन्वेस्टमेंट है अपना हाइपरसोनिक उसकी जो हैं उसको ना थार्ड रोक पा रहा है ना पेट्रियट रोक पा रहा है ना आयरन डोम रोक पा रहा है ना डेविड स्लिंग रोक पा रहा है।

तो और तलवीब का आप हाल देख रही हैं कि तलवीब से जो भी रिपोर्ट्स आ रही हैं वो मतलब बहुत ही दिल दहला देने वाली एक तरीके से बहुत ज्यादा तबाही मचाई है ईरान की ने। इसके अलावा हाइफा जो इंडस्ट्रियल सिटीज़ हैं इज़राइल की वहां भी बहुत तबाही मचाई गई है। अब रिपोर्ट में अगली एक चीज़ और है कि अगर फाइटर जेट्स का इस्तेमाल करता है इजराइल तो उसको लॉन्ग रेंज फायर नहीं मिलेगी।

फाइटर जेट्स आप वहीं इस्तेमाल कर सकते हैं जहां आपको वो शायद मिसाइल दिख रही हो। क्योंकि बिय्ड विजुअल रेंज जो एक बात आती है कि जहां आपकी आंख से देख सकते हैं उससे ज्यादा दूर तक अगर आपको हमला करना है तो आपको इंटरसेप्टर्स ही चाहिए होंगे। क्योंकि इंटरसेप्टर्स में वो रडार होते हैं, वह सिस्टम होते हैं जो मिसाइल को डिटेक्ट करके खुद ब खुद जाके वहां पे उसको डिस्ट्रॉय करते हैं।

लेकिन फाइटर जेट्स के लिए आपको पास में जाना होगा। इससे फाइटर जेट्स को तो खतरा है ही और जो ऑपरेटिंग कॉस्ट की हमने बात की F35 का ऑपरेटिंग कॉस्ट बहुत अधिक है। तो इस वजह से भी ये वाकई में थका देने वाली हो गई है। और मतलब कई लोग कह रहे हैं कि अमेरिका को शायद यह अंदाजा नहीं था कि ईरान इस तरीके से जवाब देगा। प्रेसिडेंट ट्रंप ने अभी कहा भी है कि उनको बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि ईरान इस तरीके से जवाब देगा

तो अभी यह देखना बाकी है कि किस तरीके से यह अपने आप को स्टॉक को मेंटेन करते हैं। क्योंकि बूट्स ऑन द ग्राउंड ऑपरेशन जैसा आपने कहा कि बूट्स ऑन द ग्राउंड ऑपरेशन की बात है अभी। तो बूट्स ऑन द ग्राउंड अगर उनको करना होगा तो उससे पहले उनको हवाई हमले करने होंगे और हवाई हमले करने होंगे तो खुद को भी बचाना होगा और बचाना होगा तो आपको अपने इंटरसेप्टर्स में मिसाइलों का जखीरा फुल रखना होगा और यही दिक्कत आ रही है कि वो का जखीरा फुल नहीं है।

इसीलिए ईरानी मिसाइल्स अपने टारगेट को हर बार हिट कर रही हैं। जी थैंक यू मानिस। को 16 दिन बीत चुके हैं। अगर इस रिपोर्ट की माने तो प्रेसिडेंट ट्रंप और नेतन याू ने ईरान को आंकने में गलती कर दी है।

और अगर इसी तरह चलता रहा तो ईरान पर जीत के लिए अमेरिका इजराइल को बूट्स ऑन द ग्राउंड ऑपरेशन करना होगा। ऐसा हुआ तो निश्चित तौर पर मिडिल ईस्ट का इलाका और अस्थिर होगा और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। तो इस खबर में फिलहाल इतना ही।

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