कैसे निकलेंगे हरीश राणा के प्राण? आखरी विडियो आया सामने।

सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुएजाओ। क्या बताऊं मैं आपको? मां-बाप को कैसे लगता? 13 साल से एक बिस्तर पर जिंदा बनकर पड़े अपने ही होनहार बेटे की का कानूनी फरमान लेकर एक बेबस पिता हाथ जोड़कर सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया अदा कर रहा है। रोंगटे खड़े कर देने वाली यह खौफनाक हकीकत उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की है। यहां 30 साल के हरीश राणा को इच्छा यानी पैसिव युथनेसिया देने की उनके परिवार की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सर्वोच्च अदालत ने की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्टके जज जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह ऐतिहासिक और दिल दहलादेने वाला फैसला सुनाया है।

जिसके बाद अब हरीश को एम्स के पैलिएटिव केयर में भर्ती किया गया है ताकि उसका मेडिकल ट्रीटमेंट हमेशा के लिए वापस लिया जा सके। अब सबसे बड़ा औरशरीर में सेहर पैदा करने वाला सवाल यह है कि आखिर हरीश राणा को इच्छा कैसे दी जाएगी?

की पूरी प्रक्रिया बेहद जति होने वाली है क्योंकि हरीश राणा खुद से सांस ले सकते हैं। वो किसी मशीन या वेंटिलेटर के सहारे जीवित नहीं है बल्कि उनकी सांसे प्राकृतिक रूप से चल रही हैं। इसलिए अब डॉक्टरों की टीम यह तय करेगी कि उनका सांस लेना कैसे बंद हो। पैसिव यूथनेसिया की इस प्रक्रिया में किसी भी तरह के जहर या जानलेवाइंजेक्शन का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। माना जा रहा है कि सुनिश्चित करने केलिए सबसे पहले उनके शरीर से वह नली या फूड पाइप पूरी तरह हटा ली जाएगी।

जिसके जरिए उन्हें पिछले 13 साल से तरल भोजन दिया जा रहा था।इसके साथ ही उन्हें जिंदा रखने के लिए दी जाने वाली तमाम जीवन रक्षक दवाइयां भी तत्काल प्रभाव से बंद कर दी जाएंगी। अनुभवी चिकित्सकों की कड़ी निगरानी में उन्हें धीरे-धीरे सिर्फ थोड़ा बहुत पानी दिया जाएगा। दवा और भोजन के अभाव में उनके शरीर के अंग एक-एक करके काम करना बंद कर देंगे और अंततः इस तरह उनकी मृत्यु हो जाएगी।

अपने ही सामने अपनेजवान बेटे को तिल तिल कर मौत के आहोश में जाते देखना किसी भी माता-पिता के लिए छाती चीर देने वाला दर्द है। हमने आपको हरीशके पिता अशोक राणा का वो बेहद भावुक वीडियो भी दिखाया है जिसमें उनकी आंखों से छलकते आंसू और चेहरे की बेबसी सब कुछ बयां कर रही थी।

पत्रकारों से बात करते हुए रंधे गले से अशोकराणा ने कहा कि एक पिता होने के नाते अपने बेटे की मौत मांगना कितना दुखदाई होता है यह सिर्फ वही समझ सकते हैं। उन्होंने बताया कि वो और उनकी पत्नी अब काफी बुजुर्ग हो चुके हैं।

पहले गाजियाबाद और नोएडा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आए थेजिसके बाद उन्होंने एम्स की मेडिकल बोर्ड की मांग की थी। अंततः एम्स की टीमही आकर जांच के बाद हरीश को पूरी तरह ब्रेन डेड घोषित किया था। अशोक राणा कोआज भी 20 अगस्त 2013 का वो मनहूस दिन याद है जब उनके होनहार और टॉपर बेटे हरीशके साथ वो भयानक हादसा हुआ था। रात के करीब 3:00 बजे जब वे पीजीआई अस्पताल पहुंचे थे तो उनके बेटे के सिर पर गहरी चोट थी और पैरों के तलवों में नील पड़े हुए थे। पिता अशोक lराणा का कहना है कि यह जो नियम आज भारत में लागू हुआ है, यह दुनिया के सात अन्य देशों में भी है और इससे उन तमाम परिवारों का भी भला होगा जिनके बच्चे ऐसी ही असाध्य स्थिति में फंसे हैं।

अपने बेटे को अंतिम विदाई देने की पूरी तैयारी कर चुके अशोक राणा अब बस यही चाहते हैंकि एम्स में इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह अपने बेटे के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ घर लाएं और उसका अंतिम संस्कार कर उसकी आत्मा को इस लंबे दर्द से हमेशा के लिए आजाद कर दें।

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