पश्चिम एशिया में जारी अब तीसरे हफ्ते में पहुंच गई है। इस की वजह से दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता होरमज जलडमरू मध्य के बंद होने से कई देशों में हड़कंप है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने होरमुज को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया है कि इस मुद्दे पर ईरान का स्टैंड कैसा है।
जाहिर है ईरान के इस स्टैंड से ट्रंप की बौखलाहट और बढ़ेगी। और तीखा हो सकता है। तो ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया है कि होरमुद जल डडमरू मध्य सिर्फ दुश्मनों और उनके सहयोगियों के जहाजों और टैंकरों के लिए बंद है। बाकी देशों के जहाजों के लिए यह रास्ता बिल्कुल खुला है। साफ है किसी के जहाज इस रास्ते जा सकते हैं। ईरानी मीडिया के मुताबिक विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भरोसा दिलाया है कि के दौरान आबादी वाले इलाकों में कोई नुकसान ना पहुंचे इसका भरसक ख्याल रखा जाएगा।
हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी है कि अगर ईरान के तेल, डिपो या पावर प्लांट जैसे ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया गया तो इसका पहले से कहीं ज्यादा सख्त जवाब दिया जाएगा। खरग द्वीप पर हुए हमले के बाद ईरान ने यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात के नाम चेतावनी जारी करते हुए लोगों को आगाह किया कि वे दुबई के जेबेल अली और अबू धाबी के खलीफा और फजेरा बंदरगाहों के इलाकों से तुरंत निकल जाएं।
ईरान का मानना है कि अमेरिका के ने इन बंदरगाहों का इस्तेमाल खरग द्वीप पर हमला करने के लिए किया है। यही वजह है कि ईरान ने अब इन जगहों को अपने निशाने पर ले लिया है। भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही इस को लेकर कुछ ऐसा ही बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस जल डमरू मध्य में कोई संघर्ष ईरान नहीं चाहता था।
लेकिन अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर यह जंग थोप दी है। लेकिन ईरान दुश्मन देशों को छोड़कर बाकी दोषों देशों के लिए कोई रास्ता बंद नहीं कर रहा। यह सच है कि हमारे दुश्मनों का समर्थन करने वाले जहाजों को होरमूज के रास्ते जाने की इजाजत नहीं है। लेकिन अन्य देशों को नुकसान नहीं होना चाहिए।
अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा है कि हमें अपनी हिफाजत करनी होगी। हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह विश्व के नेताओं का फर्ज और जिम्मेदारी है कि वे दूसरे पक्ष संयुक्त राज्य अमेरिका पर दबाव डालें और उनसे विनती करें कि कृपया हम पीड़ित हैं और इस युद्ध को रोके। उन्होंने होरमुज में जारी संघर्ष को लेकर कहा कि हम दूसरे लोगों की तकलीफों से खुश नहीं है। किसी देश को गैस की कमी, पेट्रोल की कमी, तेल की कमी हो ऐसा हम कतई नहीं चाहते। लेकिन हमें अपनी हिफाजत करनी होगी ना।
ईरान एक तरफ तो अपनी हिफाजत की चिंता में डूबा है और अमेरिका इजराइल के खिलाफ पूरी ताकत झोंक कर अपना बचाव कर रहा है तो दूसरी तरफ उसे दूसरे देशों के नागरिकों की चिंता भी है। उनके नेताओं के बयान बताते हैं कि वे सब कुछ सहने को तैयार हैं।
किसी की भी मदद करने को तैयार हैं। पर अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए विश्व के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के सामने भी तन कर खड़े रहने को का माद्दा रखते हैं और वे ऐसा कर रहे हैं।
