ईरान, अमेरिका और इजराइल के को लेकर पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव का माहौल है और अब मिडिल ईस्ट में चल रहे जंग के बीच अब वैश्विक व्यापार को लेकर एक नई चिंता उभर कर सामने आई है।
दरअसल स्ट्रेट ऑफ हरमूस यानी हॉर्मूस जलडमरू मध्य में पहले से बड़े तनाव के बाद अब एक और जलडमरू मध्य पर खतरे के संकेत मिल रहे हैं। और यह जलडमरू मध्य है बाब अल मंडे। दरअसल यमन केूती समूह ने चेतावनी दे डाली है कि जरूरत पड़ने पर वह समुद्री रास्तों को निशाना बना सकते हैं।
तो ऐसे में एक सवाल उठकर सामने आता है कि क्या स्ट्रीट ऑफ आर्मूस के बाद दूसरा जलडम्रू मध्य भी बंद हो सकता है? यह सवाल इसलिए भी क्योंकि यमन में एक्टिव हूं मूवमेंट ने चेतावनी दी है कि उनकी उंगलियां ट्रिगर पर हैं और हालात बिगड़ते ही वो किसी भी वक्त एक्शन ले सकते हैं और अगर ऐसा हुआ तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक गंभीर संकट में पड़ सकता है।
हालांकि एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यमन के होती समूह को लंबे वक्त से ईरान का समर्थन मिलता रहा और यही कारण है कि जब ईरान और उसके दुश्मनों के बीच संघर्ष तेज हुआ तो यह सवाल उठने लगा कि क्या होती भी इस लड़ाई में शामिल होंगे?
और हाल ही में पुती नेतृत्वों ने बयान दिया कि अगर ईरान पर हमले और तेज होते हैं या फिर उसके सहयोगियों पर प्रेशर होता है तो वो समुद्री रास्तों को निशाना बना सकते हैं। इसका मतलब साफ है कि लाल सागर के अहम रास्तों पर खतरा मंडरा सकता है।
अब इस बीच आइए आपको बताते हैं कि बाब अलमंडब आखिर इतना इंपॉर्टेंट क्यों है? क्योंकि बाब अल मंडेब स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चोक पॉइंट्स में से एक माना जाता है और यह सकरारास्ता लाल सागर को अनदन की खाड़ी और हिंद महासागर यानी इंडियन ओसियन से जोड़ता है। यूरोप और एशिया के बीच जाने वाले ज्यादातर जहाज इसी रास्तेसे स्वेज नहर तक जाते हैं और अगर यह रास्ता बंद हो जाता है तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी छोर केप ऑफ गुड होप से होकर जाना पड़ेगा और इससे समुद्री यात्रा में लगभग 10-15 दिन का ज्यादा वक्त लग सकता है और शिपिंग लागत कई गुना बढ़ सकती है।
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह जलमरू मध्य वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है और अनुमान है कि दुनिया के लगभग 12% समुद्री व्यापार और करीब 10% तेल आपूर्ति इसी रास्ते से होकर गुजरती है और अगर ऐसे में यह रास्ता बंद हो जाता है तो फिर एशिया यूरोप व्यापार में भारी देरी हो सकती है। तेल और गैस की कीमतें बढ़ जाएंगी। वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकता है और शिपिंग कंपनियों की लागत और बीमा के जो प्रीमियम है वो बढ़ सकते हैं। हालांकि जब पहले भी इस इलाके में हमलेहुए तो कई बार बड़ी शिपिंग कंपनियों को अपने जहाजों का रास्ता बदलना पड़ा।
आपको बता दें मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां पहले ही सावधानी बरतने लगी हैं और कुछ कंपनियों ने लाल सागर से गुजरने वाली यात्राएं अस्थाई रूप से रोकदी है या फिर विकल्प मार्ग को चुनने का फैसला किया है और उनका कहना है कि अगर क्षेत्र में सैन्य टकराव बढ़ता है तो जहाजों और चालक दल की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
एक्सपर्ट्स ये भी कहते हैं कि अगर स्ट्रीट ऑफ आर्मस और बाबल मनदेव स्ट्रेट दोनों एक साथ प्रभावित हो जाते हैं तो फिर यह आधुनिक समय में समुद्री व्यापार के लिए सबसे बड़ा संकट बन सकता है और इन दोनों मार्गों में से दुनिया के लगभग 30% व्यापारिक जहाज और ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है और ऐसे में अगर यह रास्ते बंद हुए तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है। जय
