ईरान के नए सुप्रीम लीडर ने पाकिस्तान को मरवाया, खुद भी फंसे !

यह है मोजतबा खामिनई जिन्हें ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। हैरानी की बात देखिए कि जब मोजतबा खामिनई के नाम का ऐलान हो रहा था उस समय वह वहां मौजूद ही नहीं थे। वहां मौजूद लोगों ने मोजतबा खामिनई की तस्वीर उठाकर बताया कि अब यही ईरान के सुप्रीम लीडर हैं। नाम का ऐलान होते ही लोग मोजतबा खामिनई की तस्वीरों को चूमने लगे।

लेकिन इसी बीच अमेरिका और इजराइल के हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामिनई की एक वसीहत ने पूरी दुनिया में बवाल मचा दिया है। इस वसीहत के बारे में अब पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। क्योंकि इसमें कुछ ऐसा लिखा है जो ईरान में बवाल मचा सकता है। इस वसीहत के बारे में आपको आगे बताएंगे। लेकिन उससे पहले जल्दी से यह देख लीजिए कि खामिनई के बेटे मोजतबा खामिनई ने पाकिस्तान को कैसे मरवा दिया है। दरअसल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ धरती के वो पहले इंसान बन गए हैं।

जिन्होंने मोजतबाई को सुप्रीम लीडर बनने की सबसे पहले बधाई दे दी। शहबाज शरीफ की यह हरकत देख सऊदी अरब गुस्से से पागल हो गया है क्योंकि मौजूदा स्थिति में मोजतबा खामिनई के इशारे पर ही ईरान की सेना सऊदी अरब पर हमले कर रही है। मजे की बात देखिए कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच डिफेंस डील है। इस डील के मुताबिक अगर कोई देश सऊदी अरब पर हमला करेगा तो उस देश पर बिना सोचे पाकिस्तान को बमबारी करनी होगी। लेकिन यहां तो सऊदी अरब को ठोकने वाले मोजतबा खामिनई को शहबाज शरीफ बधाई दे रहे हैं।

लेकिन अब सुनने में आया है कि शायद शहबाज शरीफ डर के मारे मोहम्मद बिन सलमान का फोन ही नहीं उठा रहे। उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए अपने ही एडवाइजर को एक टीवी इंटरव्यू में भेज दिया और ऐलान करवा दिया कि अगर मगर का तो सवाल ही नहीं। हम सऊदी अरब के लिए ईरान पर जब चाहे तब हमला कर सकते हैं। हमें बस सऊदी अरब से इशारा चाहिए। बताइए इससे पगला देश पूरी दुनिया में कोई नहीं हो सकता। बहरहाल अब आते हैं असली खेल पर। खबरें हैं कि खामिनई ने अपनी वसीहत में मोजतबा खामिनई के बारे में ही कुछ लिखा है। दावे किए जा रहे हैं कि अयतुल्लाह अली खामिनई कभी अपने बेटे को सुप्रीम लीडर बनवाना ही नहीं चाहते थे।

खामिनई को अपने बेटे की योग्यता पर संदेह था। ईरान के विपक्षी संगठन नेशनल यूनियन फॉर डेमोक्रेसी के रिसर्च डायरेक्टर खोसरो इसानी ने कहा था कि अली खामिनई ने अपनी वसीहत में साफ तौर पर लिखा था कि मोजतबा को उत्तराधिकारी ना बनाया जाए।

इस कहानी के मुताबिक अली खामिनई का मानना था कि मोजतबा के पास देश चलाने के लिए जरूरी अनुभव और राजनीतिक कद नहीं है। उन्होंने कहा था कि मोजतबा एक युवा धर्म गुरु है। उन्होंने राजनीति में कोई खासी उपलब्धि हासिल नहीं की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक खबरें हैं कि ईरान में कम लोग ही चाहते हैं कि मोजतबा खामनई सुप्रीम लीडर बने। लेकिन अब तो वह लीडर बन चुके हैं और लीडर बनते ही पाकिस्तान को फंसवा भी चुके हैं।

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