सोचिए आपके सामने किसी इंसान को डॉक्टर मृत मान लें। घर पर रिश्तेदार रोते बिलखते हुए इकट्ठा हो जाए। अंतिम संस्कार की पूरी तैयारियां मुकम्मल कर ली जाए। बस अर्थी उठने ही वाली हो कि तभी उस बेजान शरीर में अचानक हरकत होने लगे। उसकी थमी हुई सांसे फिर से चलने लगी। इसे आप क्या कहेंगे? क्या यह मेडिकल साइंस की कोई बहुत बड़ी नाकामी है? या फिर साक्षात भगवान का कोई चमत्कार। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। जिसने बड़े-बड़े डॉक्टर्स को भी गहरी सोच में डाल दिया है।

जिसमहिला को से हटाकर श्मशान ले जाया जा रहा था वो आज बिल्कुल सही सलामत अपने घर वापस आ चुकी है। बताने जा रहा हूं जो आपको यह सोचने पर मजबूर कर देगी कि जब तक ऊपर वाले की मर्जी ना हो इंसान का बाल भी मां का नहीं हो सकता। यह पूरा वाकया पीलीभीत की गोकुलपुरम कॉलोनी का है।
यहां रहने वाली विनीता शुक्ला नाम की एक महिला 22 फरवरी को अचानक अपने ही घर में बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी। परिवार वाले बुरी तरहघबरा गए और बिना कोई देरी किए उन्हें फौरन जिला अस्पताल लेकर भागे। वहां मौजूद डॉक्टरों ने शुरुआती जांच के बाद ही उनकी हालत को बहुत ज्यादा गंभीर बताया और उन्हें तुरंत किसी बड़े हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी।
परेशान परिवार वाले विनीता को बरेली के एक काफी बड़े और मशहूर प्राइवेट अस्पताल में ले गए। वहां उनकी हालत को देखते हुए उन्हें सीधे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। दो दिनों तक लगातार वेंटिलेटर पर रहने के बाद भी उनके शरीर में किसी भी तरह की कोई हरकत नहीं हुई। उनके हाथ पैर पूरी तरह सुन्न पड़ चुके थे और आंखों की पुतलियां भी एकदम फैल गई थी।डॉक्टरों ने परिवार को साफ बता दिया कि मरीज की स्थिति ब्रेन डेड जैसी हो गई है।
डॉक्टरों का कहना था कि जैसे ही वेंटिलेटर हटाया जाएगा, उनकी जान जा सकती है। अब बचने की कोई उम्मीद नहीं है। डॉक्टरों का यह जवाब सुनकर परिवार पूरी तरह टूट गया। 24 फरवरी को विनीता के पति कुलदीप शुक्ला भारी मन से अपनी पत्नी को एक एंबुलेंस के जरिए वापस घर ला रहे थे। घर पर अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो चुकी थी और सगे संबंधी आखिरी विदाई देने के लिए पहुंच रहे थे। लेकिन तभी रास्ते में एंबुलेंस के अंदर कुछ ऐसा हुआ जिस पर यकीन करनामुश्किल है।

एंबुलेंस में अचानक विनीता के शरीर को जोरदार झटका लगा। परिवार वालों ने ध्यान से देखा तो उनकी सांसे तेज चलने लगी थी। यह देखकर हर कोई हैरान रह गया। परिवार ने श्मशान जाने का फैसला तुरंत बदला और उन्हें सीधा पीलीभीत के डॉक्टर राकेश न्यूरोसिटी अस्पताल लेकर पहुंच गए। वहां डॉक्टर्स ने बिना वक्त गवाए फौरन इलाज शुरू किया। लगातार 14 दिनों तक चले गहन इलाज के बाद विनीता की हालत में तेजी से सुधार होने लगा और वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट आई। अस्पताल के डॉक्टर राकेश सिंह का खुद यह कहना है कि जब मरीजउनके पास आया था तो उम्मीद बिल्कुल ना के बराबर थी। पुतलियां फैल चुकी थी लेकिन परिजनों के भरोसे और ऊपर वाले की इच्छा से एक बहुत बड़ा चमत्कार हुआ। सुनिए क्या बोले डॉक्टर। ये मामला है 22 तारीख का। 22 तारीख को एक पेशेंट थी विनीता शुक्ला नाम है उनका और अचानक से शाम के टाइम में वो बेहोश हो गई।
फिर उनको डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल ले गए। फिर वहां पे वहां से वो बरेली ले गए। बरेली में दो दिन तक इलाज चलता रहा लेकिन कोई इम्रूवमेंट नहीं हुआ था। हाथ पैरों में कोई मूवमेंट नहीं था। बस उनकी अपनी हार्ट बीट चल रही थी। सांसे भी नहीं थी। तो वहां पे ये बोलदिया गया कि भाई अब शायद उम्मीद नहीं है। मरीज के घर वालों ने भी इसको मान लिया और उन्होंने सोचा कि अब ले चलते हैं।
यहां पे क्रिमिनेशन ग्राउंड में उनकी तैयारी हो गई थी के लिए सारी कुछ रिलेटिव भी पहुंच गए थे वहां पे लेकिन रास्ते में उनको कुछ उनके घर वालों को थोड़ी सी सांस कुछ लेती हुई महसूस हुई तो फिर वो लोग आए यहां पे दिखाने के लिए जब यहां पे आए तो मैंने भी देखा मुझे भी बहुत ज्यादा उम्मीद तो नहीं लग रही थी क्योंकि बहुत सासे आ रही थी बहुत हल्की आ रही थी फिर भी उन लोगों ने रिक्वेस्ट किया कि भाई कोशिशकरके देख लीजिए तो और कोशिश करने के लिए फिर हम लोगों ने अपनी टीम को अलर्ट किया। सांस की वैल्यू पड़ी हुई थी। फिर में ले ट्रीटमेंट चालू किया।
24 घंटे तक कोई बहुत ज्यादा इम्रूवमेंट नहीं हुआ। फिर धीरेधीरे कुछ चीजें और भी कोशिश करी गई कि और क्या कारण हो सकता है जिसकी वजह से इस तरह के परेशानी हो सकती है। क्योंकि प्रेशर वगैरह बिल्कुल नॉर्मल था। तो कुछ डॉक्टरों से भी डिस्कस करने के बाद हमें लगा कि शायद कोई स्नेक भी हो सकती है जिसमें कि न्यूरोटॉक्सिन रिलीज होता है और एकदम से बॉडी हो जातीहै और धीरेधीरे जब उसका असर कम होता है तो पेशेंट थोड़ा सा रिकवर होना चालू होता है या फिर हम उसका एक ट्रीटमेंट जो स्टार्ट करते हैं उससे भी रिकवर हो सकता है तो यह सोच के हमने उसका विनोम आता है वो स्टार्ट किया 24 घंटे के बाद भी मतलब इनकी के बाद भी कोई बहुत ज्यादा तो नहीं .
लेकिन हां 24 घंटे के बाद हल्का सा यह होने लगा कि हाथ पैरों में मूवमेंट कुछ आने लगा तो उसकी पूरी पूरी प्रॉपर जो बोल थी वो भी दिया गया। फिर धीरे-धीरे पेशेंट रिकवर होने लगी आईसीयू में और आज 12 13 दिन के बाद पेशेंट जो है डिस्चार्ज हुईहै।
