ईरान ने दी है कि पर्शियन गल्फ और स्टेट ऑफ हार्मोस में जो जहाज है वो रिस्क लेने की गलती ना करें। ईरान ने कहा है कि कोई भी नुकसान का जिम्मेदार अमेरिका होगा। यह हमला ऐसे वक्त में हुआ है कि इसके कुछ ही घंटे पहले ट्रंप ने कहा था कि ऑयल टैंकर्स को वहां से गुजरना चाहिए।
ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि स्टेट ऑफ हॉर्मस में फंसे जहाजों को वहां से गुजरना चाहिए। ट्रंप कह रहे हैं कि एक ही रात में अमेरिका ने ईरान की सारी माइनर्स शिप को उड़ा दिया है। माइनरशिप को। यानी ट्रंप एक तरह से भरोसा दे रहे थे कि अब वो ईरान की कोई माइशिप वहां पर है ही नहीं। जाओ तुम चलो आगे बढ़ो। कौन लेके जाएगा जहाज बॉस? जहाज फटेगा वो मरेगा।
ट्रंप थोड़ी कोई नुकसान झेलेंगे। इसी वजह से कहा जा रहा है कि क्या ट्रंप की एक बेतुकी सलाह की वजह से कई जहाजों को नुकसान उठाना पड़ा। पहले 9 मार्च को डॉल्ड ट्रंप ने कहा था कि इन जहाजों को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस से गुजरना चाहिए। कुछ हिम्मत दिखानी चाहिए। डरने जैसी कोई बात ही नहीं है। ईरान के पास कोई नेवी नहीं है। हमने उनके सारे जहाज डुबो दिए हैं।
जो गए उनके साथ क्या हुआ देखिए। ट्रंप को इतना भरोसा है अपनी सेना पे तो खुद एक जहाज पर बैठे और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस से गुजर के दिखा दें। लेकिन पिछले 24 से 36 घंटे में ईरान ने स्टेट ऑफ हॉर्मोस और उसके आसपास के इलाके में जहाजों को उड़ाकर ट्रंप के दावे की हवा निकाल दी। ट्रम्प तो कह रहे हैं कि ईरान की नेवी खत्म हो गई। तो फिर ये हमले कैसे हो रहे हैं? यही वजह है कि हम कह रहे हैं कि आज की तारीख में ट्रंप की बात पर कोई ढेले भर का भरोसा नहीं कर रहा। ट्रंप तो यह भी कह रहे हैं कि अगर स्टेट ऑफ हॉर्मोस से तेल की आपूर्ति पर ईरान रोक लगाता है तो 20 गुना ज्यादा ताकत से हमला करें। ईरान पैरों पर खड़ा नहीं हो पाएगा।
लेकिन ईरान तो ट्रंप की का लोड ही नहीं ले रहा। ट्रंप इस गलतफहमी में थे कि अमेरिका ने तो ईरान की माइं शिप को उड़ा दिया। अब तो कोई खतरा नहीं है। लेकिन ईरान ने पिछले दो दिन में छह शिप पर हमला करके बता दिया कि ईरान की नेवी की ताकत अभी खत्म नहीं हुई। दावा है कि पिछले 24 घंटे में ईरान ने चार में पांच हमले किए हैं। दावा है कि शुरू होने से लेकर अब तक 19 कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है और ईरान ये जानबूझ के कर रहा है। वो जानबूझ के तेल को निशाना बना रहा है ताकि दुनिया को इसकी आग जो है महसूस हो और इसलिए ट्रंप ने स्टेट ऑफ हॉर्मोस को अपने कब्जे में लेने की दी है।
ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि वह स्टेट ऑफ हॉर्मोस को अपने कंट्रोल में लेने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन क्या अमेरिका के लिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस पर कब्जा करना इतना आसान है क्या? आज आपको यह भी बताता हूं। देखिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस की चौड़ाई मात्र 33 कि.मी. है। इतने पतले पैसेज को ईरान कई तरह से कंट्रोल करता है। हॉर्मोस रूट पर माइंस बिछाकर फास्ट बोट्स के जरिए, एंटीशिप से सबमरीन और के जरिए।
यानी इस पूरे इलाके में अमेरिका अपनी तगड़ी नेवी भी लेकर घुस सकता है। लेकिन उसे जंगी बेड़ों को नुकसान होने का बड़ा रिस्क होगा। इसलिए अमेरिका स्टेट ऑफ हॉर्मोस के चक्रव्यूह में फंसना नहीं चाहता क्योंकि इतना संकरा रास्ता है माइंस बिची है। 10 तरह का उसने तैयारी कर रखी है। तो जाओगे तो चक्रव्यूह में फंस जाओगे। आप यह भी देखिए कि समंदर में ईरान और अमेरिका की इस लड़ाई में कैसे भारतीयों की जान मुश्किल में फंस गई। अमेरिका के जिस शिप को ईरान ने उड़ाया उसमें एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत हो गई है।
दावा है कि इन जहाजों पर जो क्रू होता है उसमें 15% भारतीय होते हैं। यानी ईरान किसी भी जहाज को टारगेट करेगा तो भारतीयों को भी खतरा है। भारतीय की मौत पर विदेश मंत्रालय ने दुख जताया है। भारत ने अपील की है कि कमर्शियल शिप को टारगेट मत करो बॉस। स्टेट ऑफ हॉर्मोस में करीब 150 जहाज फंसे हुए हैं। जिस वजह से गैस और कच्चे तेल की कमी हो गई। और इस कमी को पूरा करने के लिए अब ऑयल रिजर्व का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि तेल के दाम कम हो जाए। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी आईईए का 400 मिलियन बैरल रिजर्व के इस्तेमाल को मंजूरी देना एक बड़ी घटना है। आईईए यानी इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी कह रही है कि इस युद्ध की वजह से ग्लोबल ऑयल मार्केट की सप्लाई में इतिहास में सबसे बड़ी रुकावट आ रही है। इससे पहले साल 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था तो 182 मिलियन बैरल ऑयल रिजर्व जारी किया गया था।
दूसरी तरफ अमेरिका भी 172 मिलियन बैरल ऑयल रिजर्व का इस्तेमाल करेगा। जब मार्केट में यह खबर आई कि तब ब्रेंड क्रूड ऑयल $90 प्रति बैरल पर था। एक्सपर्ट्स ने कहा कि इस रिकॉर्ड रिजर्व से मार्केट में पैनिकिक कम होगा। जो रिजर्व इस्तेमाल किया जाएगा वो कच्चे तेल के 4 दिन के कुल ग्लोबल प्रोडक्शन के बराबर है। यह रिजर्व गल्फ से गुजरने वाले क्रूड के 16 दिन को कवर कर सकता है। यानी अगले दो हफ्ते के लिए कुछ राहत मिल सकती है। ट्रंप भी दावा कर रहे हैं कि अब तो तेल के दाम कम हो जाएंगे। लेकिन हो क्या रहा है वो आपको आगे बताऊंगा पहले सुनिए उनको व्हिचली रिड्यूस द प्राइस एस वी एंड दिस थ्रेट टू अमेरिका दिस टू द वर्ल्ड वी वाली वी ग फिनिश जॉब राइट ओवर द 11 मिलिट्री डिस्ट्रफ ऑयल रिजर्व जारी होने का फैसला हो गया। ट्रंप ने भी ऐलान कर दिया। लेकिन ऐसा लग रहा है कि अब ट्रंप के शब्दों की कोई कीमत ही नहीं रह गई। क्योंकि तेल के दाम कम नहीं हुए। आज कच्चे तेल के दाम $ के पार चले गए बॉस। यानी डॉनल्ड ट्रंप पे मार्केट को भी भरोसा नहीं रह गया है। और मार्केट को भी लग रहा है कि जल्दी खत्म नहीं होगा।
इसीलिए कच्चे तेल की कीमत जो घट के इस 90 पर आई थी वह फिर 100 के पार चली गई है। स्टेट ऑफ हॉर्मोस में सिर्फ 12 दिनों की बंदी से पूरी दुनिया तेल के लिए बाप-बाप कर रही है और इसका असर अमेरिका पर भी पड़ रहा है। ज्यादातर पोल्स में अमेरिकी जनता युद्ध को नकार रही है। युद्ध के बीच ट्रंप की रेटिंग लगातार गिर रही है। कल ही एक और रेटिंग आई है। उसमें ट्रंप की रेटिंग और गिर गई है। और शायद यही वजह है कि ट्रंप अपने युद्ध के फैसले को जस्टिफाई करने के लिए अब नई-नई थ्योरी लेकर आ रहे हैं। अभी कुछ देर पहले उनका एक नया बयान आया है। ट्रंप अब युद्ध से अमेरिका को फायदे गिनवा रहे हैं ताकि उनके खिलाफ जो सेंटीमेंट बन रहा है उसे कम किया जा सके। ट्रंप अब कह रहे हैं कि यूनाइटेड स्टेट्स दुनिया का सबसे
बड़ा ऑयल प्रोड्यूसर है। इसलिए जब ऑयल की कीमतें बढ़ती है तो हम बहुत पैसा कमाते हैं। कैसे आदमी हो यार? पहले कभी नाच रहे हो। कभी कह रहे हो लोग मर रहे हैं जिसमें लोग बाप-बाप कर रहे हैं। उसमें तेल अगर महंगा बिक रहा है तो हम तो पैसा कमा रहे हैं।
मतलब अपने अमेरिका के लोगों को बता रहे हैं कि घबराओ मत। हम तो पैसा छाप रहे हैं। पैसा छाप रहे हैं। महंगाई बढ़ रही है। लोगों का पैसा निकल रहा है। ट्रंप कह रहे हैं कि प्रेसिडेंट के तौर पर मेरे लिए इससे भी ज्यादा जरूरी और दिलचस्प बात यह है कि एक बुरे साम्राज्य ईरान को न्यूक्लियर वेपन बनाने से रोका जाए। और मिडिल ईस्ट और असल में दुनिया को तबाह करने से रोका जाए। मैं ऐसा कभी नहीं होने दूंगा। ट्रंप के इस तरह के दावों पर सवाल उठते हैं कि जब अमेरिका ने पिछले साल जून में ही ईरान की न्यूक्लियर साइट तबाह कर दी तो ईरान
बना कहां से रहा है? मजाक है lबनाना कि पिछले 8 6 महीने 7 महीने आठ महीने पहले आपने फोड़ दिया फिर 8 महीने में ईरान ने बना लिया। कागज का बोट बना रहे हैं या कागज से प्लेन बना रहे हैं कि एक कागज फट गया दूसरा लाए और बना के उड़ा दिए। ट्रंप नई-नई कहानियां सुना रहे हैं ताकि अमेरिका के हमले के बाद ईरान फिर से न्यूक्लियर बम बनाने में जुट गया। इस कहानी को सुनकर थोड़ा सेंटीमेंट उनकी तरफ आए। उनकी पॉपुलैरिटी जो गिर रही है वो उठे। लोगों को लगे कि अरे ये तो हमारे लिए कर रहा है। सुनिए जरा। एस वेल एस ऑपरेशन मिडनाइट हैमर वेयर वी टोटली ऑब्लिटरेटेड न्यूक्लियर पोटेंशियल वी ऑब्लिटरेटेड इट दे डोंट हैव न्यूक्लियर पोटेंशियल एंड देन ड्यूरिंग आफ्टर मिडनाइट हैमर देन वी लेफ्ट विल बी द एंड ऑफ़ देम वेल बट दे स्टार्टेड अगेन व्हाई वी गेट फिनिश डोंट वांट गो बैक टू इयर्स यू नो देयर विल बी सम डे व्हेन यू डोंट हैव मी एस प्रेसिडेंट। डॉनल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि एक दिन ऐसा भी होगा जब आपके पास मेरे जैसा राष्ट्रपति नहीं होगा। भाई दुनिया में ना लोग जाके हनुमान जी के मंदिर में लड्डू चढ़ाएंगे अगर तुम्हारे जैसा राष्ट्रपति ना हो। लड्डू चढ़ाएंगे मैं तुम्हें बता रहा हूं क्योंकि हमारे संकटमोचक वही है हनुमान जी। अगर आपके जैसा राष्ट्रपति दुनिया में नहीं होगा तो इसका मतलब हम संकट से बच जाएंगे। ऐसी स्थिति कर दी है आपने।
ट्रंप में इस तरह फंस गए हैं कि अलबलाई हुई बातें कर रहे हैं और उनकी बातों में इतना विरोधाभास है कि कोई उन पर भरोसा नहीं कर सकता। अमेरिका की हालत देखकर कई लोग डॉनल्ड ट्रंप और पीएम मोदी के की तुलना कर रहे हैं। पीएम मोदी ने आप याद कीजिए बॉस जब पाकिस्तान पे अटैक किया तो उस हमले का मकसद क्लियर था। कब युद्ध युद्ध खत्म करना है यह भी क्लियर था। कोई कंफ्यूजन नहीं कि हम किसको मारने के लिए उतरे। लेकिन आप ट्रंप को देखिए बॉस। उस आदमी को कुछ नहीं पता कि हम क्या हासिल करना चाहते हैं। कोई प्लान भी नहीं है।
कुछ नहीं है। युद्ध में घुस गए निकलना कैसे यह पता ही नहीं है। और इसलिए आपको देखना चाहिए कि देश कितने ही ताकतवर क्यों ना हो। पुतिन घुसे में निकल नहीं पा रहे हैं। ट्रंप घुसे युद्ध में निकलने का रास्ता मिल नहीं रहा है। लेकिन नरेंद्र मोदी युद्ध में घुसे भी और निकल भी आए। अपना काम भी पूरा कर लिया और देश की बनी इकॉनमी को हिलने नहीं दिया। लिमिटेड युद्ध में पाकिस्तान को घुटनों पर लाकर दुनिया को अपनी ताकत दिखा दी। आज की डेट में अमेरिका की क्या हैसियत रह गई? दुनिया हंस रही है कि तुम नंबर वन देश हो। तुम्हारी क्या ताकत?
जी तुम्हारा क्या है डिफेंस सिस्टम? जी कि ईरान जहां मन कर रहा है वहां मार दे रहा है। आप सोचिए भारत की ताकत। हमने अपने सैनिकों का शौर्य कि ऐसे ही ड्रोन आते थे। लेकिन कहीं ड्रोन घुसने नहीं दिया हमारी सेना ने। ऐसे ही मिसाइलें दागी थी पाकिस्तान ने। कहीं फूटने नहीं दिया। इसलिए समझिए जो ऑपरेशन सिंदूर में हुआ उसकी अहमियत समझिए बॉस कि नरेंद्र मोदी कैसे गए काम हुआ और वापस हम निकल आए भारत। पुतिन से लेकर ट्रंप तक फंसे हुए हैं युद्ध में। ट्रंप चाह रहे हैं कि किसी तरह युद्ध खत्म हो जाए। लेकिन युद्ध कब खत्म होगा? यह ईरान के हाथ में है। ऐसा लगने लगा है। ईरान ने अमेरिका के आगे युद्ध खत्म करने की तीन शर्तें रखी हैं। राष्ट्रपति मसूद पिज़ेशियन इन तीन शर्तों के बारे में बता रहे हैं और कह रहे हैं कि युद्ध रोकने का एकमात्र यही रास्ता है। उन्होंने कहा कि पहली शर्त है ईरान के निर्विवाद अधिकारों को स्वीकार करो। दूसरी शर्त है युद्ध की वजह से ईरान को अब तक जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई करो। और तीसरी शर्त है भविष्य की आक्रामकता के खिलाफ निर्णायक अंतरराष्ट्रीय गारंटी लागू करो। अब यह कैसे होगा बॉस? अमेरिका इनकी भरपाई करेगा। तो शर्त भी ऐसी है कि जो पूरी होती लगती नहीं।
इसलिए पता नहीं भगवान जाने कैसे यह युद्ध रुकना है। इन शर्तों के लिए तैयार होना ट्रंप और ताकतवर अमेरिका की सबसे बड़ी हार होगी और वो होंगे ही नहीं। उनका ईगो ही नहीं मानेगा बॉस। इसलिए वो चाहकर भी से निकल नहीं पा रहे हैं। लेकिन आप यह भी देखिए कि एक-एक दिन अमेरिका पर भारी पड़ रहा है। आप युद्ध का खर्चा देखिए बॉस। डॉनल्ड ट्रंप अपने देश को भरोसा देकर आए थे कि हम अमेरिका को ग्रेट बना देंगे। अगेन मागा मेक अमेरिका ग्रेट अगेन। युद्ध का खर्च देखिए। युद्ध का खर्च यह अमेरिका के लिए बता रहा हूं आपको यूएस के लिए। पहले दो दिन में अमेरिका का खर्च था पहले दो दिन। उसमें अमेरिका का खर्च हुआ था 5.6 बिलियन डॉलर यानी करीब 52 करोड़ पहले 2 दिन में मात्र 2 दिन के अंदर और शुरुआती छ दिन में अमेरिका का खर्च हुआ है शुरुआती छ दिन अगर आप देखिएगा उसमें कितना खर्च हुआ अमेरिका का वो है 11 बिलियन डॉलर यानी 1 लाख करोड़ से ज्यादा 1 लाख करोड़ प्लस जबकि दुनिया के 60 देशों का सालाना बजट ₹1 लाख करोड़ से कम है या उसके आसपास है और अब यह तो आपको शुरुआती छ दिन का बता रहा हूं बॉस आज तो हम 13वें दिन तक पहुंच गए हैं तो ये 1 लाख करोड़ पे थोड़ी रुका होगा यह आंकड़ा सिर्फ छ दिन का है जबकि आज युद्ध का 12वां दिन है।
सोचिए अमेरिका को यह लड़ाई कितनी महंगी पड़ रही है और अगर यह युद्ध और लंबा चला तो खर्चों का आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है। युद्ध में हो रहे खर्च की यह जानकारी ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी कांग्रेस की एक ब्रीफिंग में सांसदों को दी। कुछ अमेरिकी सांसदों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन युद्ध के लिए कांग्रेस से करीब 50 अरब डॉलर की फंडिंग की अपील कर सकता है।
