और के बीच भारत के लिए बहुत बड़ी राहत की खबर है और मुझसे गुजर पाएंगे भारतीय शिप। ईरान ने भारत को अनुमति दे दी है, इजाजत दे दी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर से ईरान के विदेश मंत्री की बातचीत हुई है और बातचीत के बाद यह नतीजा निकला है कि भारत के तेल शिप को वहां नहीं रोका जाएगा।
हॉर्मोस स्टेट ऑफ हॉर्मोस जो इस वक्त पूरे का सेंटर पॉइंट बना हुआ है। जहां पर कई देशों के शिप्स हैं, ऑयल शिप्स हैं। और ईरान ने कहा है कि बिना उसकी इजाजत के यहां से कोई भी शिप नहीं गुजरेगा।
ऐसे में भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों की आपस में बातचीत हुई है। भारत के शिप वहां से गुजर पाएंगे। तो ये इस वक्त बहुत बड़ी खबर है। बहुत बड़ी डेवलपमेंट है और हिंदुस्तान के लिए ये बहुत बड़ी राहत की बात है। देश सर ईरान ने कहा कि हमें कोई दिक्कत नहीं है।
वहां से आपके शिप गुजर जाएंगे। मैं मानता हूं कि ये भारत के लिए बहुत राहत की बात है और मेरे ख्याल से एक प्रकार से हमारे विदेश नीति की एंडोर्समेंट भी है। क्योंकि जनरली क्या समझा जा रहा है कि भारत इजराइल की तरफ झुक गया है और ऐसे में लोग बता रहे थे।
इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत और इजराइल के बीच में रिश्ते ठीक हुए हैं। लेकिन हमारी जो सदियों से कारोबार चल रहा है ईरान के साथ वो एक दिन में खत्म तो नहीं हो सकता।
और हमारे ईरान के साथ वहां कोई भी हो मुसादक के टाइम में उसके बाद शाह रजा पहलवी के टाइम में खुनी के टाइम में रिश्ते हमारे बहुत अच्छे रहे और इसका सबसे बड़ा प्रतीक है
चाबहार पोर्ट। जी कि उनके अगर क्या बार पोर्ट हमारे लिए श्याम सर जो खबरें सामने आ रही है कि अभी सिर्फ वहां से दो शिप्स को ही गुजरने की अनुमति मिली है। सिर्फ दो शिप्स। देखिए ये एक तरह से डिप्लोमेटिक विन मैं मानता हूं। लेकिन इसके साथ-साथ इसको रियलिटीज पे देखें आप तो एमवी परिमल गुजरा था वहां से ऑलरेडी और दूसरा शिप भी गुजरा वहां से। पर कौन सा शिप जो इस देखिए जिस दो शिप की हम बात कर रहे हैं ।
सर भारतीय टैंकर जो है पुष्पक और परिमल पुष्पक और परिमल इसको इजाजत मिल गई ईरान सरकार ने हॉर्मोन से गुजरने की इजाजत दे दी है। हमारे साथ हमारे संवाददाता नीरज पांडे इस वक्त जुड़ चुके हैं। नीरज ये बहुत बड़ी डेवलपमेंट है और हिंदुस्तान के लिए बहुत बड़ी राहत की बात है। देखिए ये इंडियन डिप्लोमेसी के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। जिस ईरान हमारा बहुत पुराना दोस्त था और ईरान और इस समय मिडिल ईस्ट के बीच में जो संबंध है वो जगजाहिर है। स्थिति ये है कि पूरे वर्ल्ड की इकोनमी खतरे में पड़ गई है। ऐसे में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कल अब्बास अरा जी से बात की और उनसे रिक्वेस्ट की कि भारत आपके साथ हमेशा एक दोस्ताना संबंध रहा है और बहुत पुराने हमारे शेर हैं।
हमारे व्यापारिक उनसे भी ईरान के साथ बहुत महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में जो हमारे दो जहाज है परिमल और पुष्पक जो कि यूएस यूरोप के थ्रू भारत की तरफ दाखिल हो रहे थे लेकिन वो हार्मोनल जो ईरान का इलाका है वहां से गुजरना इंपॉर्टेंट है अगर वहां से नहीं गुजरा तो वो फंस जाएगा और इसमें कहीं ना कहीं भारत की रिफाइनरीज को प्रॉब्लम आएगी तो ऐसे में जब उनसे दो लोगों से बात हुई तो उसके बाद तुरंत भारत के दोनों टैंकर्स को हारमो से गुजरने की इजाजत दी गई और माना जा रहा है कि अगले कुछ घंटों में ये दोनों जो है जो टैंकर ऑयल टैंकर है।
ये हमारे भारतीय सीमा में दाखिल हो जाएंगे। बहुत सेफली दाखिल हो जाएंगे। एक तरह से बहुत बड़ी डिप्लोमेटिक जीत है। जब पूरा ईरान अपने आसपास के सभी पड़ोसी देशों पर लगातार हमले कर रहा है। बहुत-ब शुक्रिया नीरज हमारे साथ जुड़ने के लिए जो बात आप कह रहे थे श्याम सर कि ये डिप्लोमेटिक विन है। ये यस मैं इसको यही मानता हूं क्योंकि ये जो शिप्स हैं ये निकल तो जाएंगे पर सारी इंश्योरेंस कंपनी सारे जो कंपनीज़ हैं वो थोड़ी इसको ले पाएंगी। यह शिपिंगो का है। शिप अगर है तो ठीक है। लेकिन बाकी शिप्स कंपनी जो है वो नहीं और रियलिटी पे ये देखा जाए तो लंगर डाले खड़े हैं लोग बाहर दोनों तरफ ओमान की खाड़ी में भी और गल्फ के अंदर भी।
क्रॉसिंग करना बड़ा मुश्किल है। ईरान ने क्लियर कर दिया है। वैसे ईरान होता कौन है क्लियर करने वाला? ये तो इंटरनेशनल स्टेट है। यूनाइटेड नेशन मैं ये समझना चाहूंगा टिकू सर क्योंकि ये इस वक्त इस जंग में एक बड़ी डेवलपमेंट है कि हिंदुस्तान के दो शिप को। चलिए दो ही शिप को इजाजत मिली। लेकिन ईरान ने कहा कि वो वहां से गुजरे हमें कोई दिक्कत नहीं है। तो बाकी को क्या मैसेजिंग देने की कोशिश की है ईरान?
