ईरान पर हमला करने के लिए ट्रंप ने जितने भी कारण गिनाए वो सब फालतू के थे। दुनिया को बचाने के नाम पर ट्रंप ईरान का तेल लूटने चले थे। लेकिन ईरान ने ट्रंप का प्लान फेल कर दिया। ईरान के पास वो तो नहीं है कि जिससे अमेरिका तक हमला कर सके।
लेकिन अमेरिका के सहयोगियों को ईरान जमकर फोड़ रहा है। इसी से ट्रंप की ऐसी किरकिरी हो रही है कि ट्रंप इस समय अलबलाए घूम रहे हैं और अब ट्रंप खत्म करने की बात करने लगे हैं। लेकिन क्या यह इतना आसान है? क्योंकि आप देखिए ट्रंप ने यह कहा है कि जल्दी खत्म होगा। ईरान कह रहा है कि कब खत्म होगा? यह ईरान तय करेगा। ट्रंप ने कहा कि तेल सप्लाई रोकी तो 20 गुना ज्यादा हमला होगा। ईरान कह रहा है कि हम 10 साल के के लिए तैयार हैं। भाई। ट्रंप रहे हैं तो ईरान और ज्यादा फोड़ रहा है। ट्रंप कह रहे हैं ईरान ने में हमने लक्ष्य हासिल कर लिया है।
ईरान कह रहा है कि अमेरिका से बात की गुंजाइश ही नहीं है। इजराइल भी कह रहा है कि खेल अभी खत्म नहीं हुआ है। उधर ईरान पर ट्रंप और पुतिन से बात कर रहे हैं। चीन ने ईरान को दो शिप भेज दिए हैं जिसमें हैं। यह भी कहा जा रहा है। यानी ट्रंप अब ईरान से एग्जिट के लिए फड़फड़ा रहे हैं। अपने बड़बोलेपन में ट्रंप ने दुनिया को की आग में झोंक तो दिया।
लेकिन अब उनको यही नहीं समझ में आ रहा कि इससे निकलना कैसे है क्योंकि वो प्लान बी बना के ही नहीं गए थे। उन्होंने सोचा था ईरान चार दिन में निपट जाएगा। यहां ईरान ठोके जा रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि ट्रंप अब कह रहे हैं कि उन्होंने चार लोगों के कहने पर ईरान पर हमला किया। अरे बॉस को खेल बना दिए हो क्या? तय ही नहीं कर पा रहे हो कि किस लिए किए? कभी कहते हो इजराइल जो है वो करने वाला था इसलिए हमको घुसना पड़ा। आप कह रहे हैं कि मेरे ही चार लोग बोल दिए इसलिए मुझे घुसना पड़ गया। कैसा नेता है? कैसा देश है? जी। ट्रंप के बैकफुट पर आते ही चीन और रूस एक्टिव हो गए। ट्रंप ने पुतिन से बात की। पुतिन ने कहा कि वो रुकवाने में मदद कर सकते हैं। बताइए ट्रंप को चाहिए था नोबेल पीस प्राइज। वादा करके आए थे कि मैं आऊंगा।
दो मतलब दो चार हफ्ते में जो है वो रूस यूक्रेन का रोक दूंगा। रूस यूक्रेन का युद्ध तो रुका नहीं। यहां पुतिन कह रहे हैं कि लाओ मैं तुम्हारा रोक देता हूं। तुम मेरा क्या रोकोगे? चीन ने मौके का अलग फायदा उठाना शुरू कर दिया। दो शिप ईरान की तरफ रवाना कर दी। उससे अमेरिका के अलग होश उड़े हुए हैं।
कुल मिलाकर ट्रंप भले ही रुकवाने की बातें कर रहे हो लेकिन रुकने के लक्षण नहीं दिख रहे बॉस। क्योंकि ईरान ने तय कर लिया है कि कहां कब खत्म होगा? यह डिसाइड करना अमेरिका के बस में नहीं है। ईरान कब रुकेगा? ट्रंप की कैसे फजीहत हो रही है? क्यों ट्रंप का ठीकरा दूसरों पर फोड़ रहे हैं? रूस और चीन का क्या प्लान है? आज आपको सब बताऊं। लेकिन उससे पहले एक झलक देखिए।
देखिए डॉनल्ड ट्रंप ने आज यह कहकर सबको हैरान कर दिया कि ईरान युद्ध जल्दी ही खत्म होने वाला है। लोग बात करने लगे कि अचानक ट्रंप जल्दी खत्म करने की बात कैसे कर रहे हैं बॉस? क्योंकि ईरान पर हमला करके ट्रंप ने ग्लोबल इकॉनमी में उथल-पुथल मचा दी। ऑयल सप्लाई प्रभावित हो रही है। मार्केट हो रहे हैं और इसकी सारी जिम्मेदारी ट्रंप के ऊपर आ रही है। क्योंकि का फैसला तो ट्रंप का था। ईरान ने थोड़े कहा था कि आओ हम पर हमला कर दो। जब युद्ध से हो रहे नुकसान की सारी जिम्मेदारी ट्रंप पर आ गई तो वो जल्दी खत्म करने की बातें करने लगे। लेकिन दुनिया को ट्रंप की बातों पर भरोसा नहीं हो रहा।
ट्रंप जो भी कह रहे हैं वो मार्केट को शांत रखने के लिए कह रहे हैं। वहीं ईरान पर किस लिए हमला किया ये भी ट्रंप क्लियर नहीं कर पा रहे। जो चाहते थे वो हुआ नहीं और जो हो रहा है वो ट्रंप ने सोचा नहीं था। इसलिए अब ट्रंप की हालत खराब हो रही है। आप ट्रंप को सुनिए आपको समझ में आ जाएगा मामला। दे ग टेक ओवर द मिडिल ईस्ट एंड दे ग ट्राई एंड डिस्ट्रॉय इजराइल। सो वी स्टॉप इट वि गुड टाइमिंग एंड वी प्राउड टू बी इन्व्स बीड सून डोनल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि सून यह खत्म होगा कैसे तुमने क्या हासिल किया जो वेरी सून खत्म कर दोगे? ईरान कह ही नहीं रहा है कि अभी खत्म करेंगे। हालांकि ट्रंप के इन बड़बोले बयानों से भी कम से कम शेयर मार्केट को थोड़ी राहत मिली।
आज शेयर मार्केट थोड़ा सुधर गया। यह सोच के कि ट्रंप है ठीक है कह रहे होंगे। इतना ही नहीं अब तो युद्ध खत्म करने के लिए ट्रंप ईरान से बात करने को भी तैयार है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत की संभावना है। वो ईरान से बात करने को तैयार है। लेकिन ये शर्तों पर डिपेंड करता है।
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सुना है कि तेहरान भी बात करना चाहता है। ये क्लासिक ट्रंप स्टाइल का बयान है बॉस। जिसमें वो बात करने की इच्छा भी जता रहे हैं। साथ ही यह भी कह रहे हैं कि तैरहरान भी बात करना चाहता है। क्यों भाई? अभी तो कुछ दिन पहले ट्रंप कह रहे थे कि ईरान बात करना चाहता है लेकिन हम बात नहीं करेंगे क्योंकि बहुत देर कर दी ईरान ने। हम तो मारेंगे।
ईरान ने ऐसे होश ठिकाने पर लाए डोनल्ड ट्रंप और अमेरिका के कि अब वो कह रहे हैं कि हां मैं बात करूंगा। मैं सुन रहा हूं। तहरान बात करना चाहता है। क्यों बात करोगे भाई? मत करो ना। चीता बनके घूम रहे थे। घूमो चीता बनके। सच्चाई ये है कि ईरान ने अमेरिका को उसकी औकात याद दिला दी। जो दुनिया में कोई नहीं कर पाया वो ईरान ने किया है। बॉस। डॉनल्ड ट्रंप और अमेरिका को फंसा के छोड़ दिया है कि हम तो मरेंगे लेकिन तुमको भी नहीं छोड़ेंगे।
ट्रंप की बातों में झोल है बॉस। एक तरफ कह रहे हैं कि जल्दी खत्म हो जाएगा। वो ईरान से बात करने के लिए तैयार हैं। दूसरी तरफ उनके रक्षा मंत्री आज ही ईरान को बड़ी धमकी दे रहे हैं। पीट हेक्सेथ ने कहा कि ईरान को निर्णायक रूप से हराने तक हमले जारी रहेंगे। आज ईरान पर सबसे भयंकर हमले का दिन था।
पिछले 24 घंटे से ईरान आग में धक रहा है। ईरान अब अकेला और कमजोर पड़ता जा रहा है। ईरान के खिलाफ हमलों में कोई ढील नहीं दी गई है। लेकिन अमेरिका जितनी धमकी दे रहा है, उतना ही ईरान पलट के फोड़ रहा है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगियों और अमेरिकी एसेट्स पर ईरान भयंकर और से हमले कर रहा है। जहां तक ट्रंप के जल्दी खत्म करने की बात है तो इस पर भी ईरान ने ट्रंप को क्लियर कट कह दिया। वो कह रहा है कि खत्म करने का फैसला सिर्फ हम करेंगे।
मतलब ईरान करेगा। अमेरिकी सेना को खत्म नहीं करेगी। 10 साल तक हमला करने के लिए का स्टॉक हमारे पास है। तब तक युद्ध करेंगे जब तक अमेरिका हार नहीं मानता। इस इलाके का समीकरण और भविष्य हमारे हाथ में है। अमेरिका से बातचीत की कोई संभावना अब नहीं बची है। यानी ईरान क्लियर कह रहा है कि तुम नहीं बताओ कि युद्ध कब खत्म होगा। अब हम बताएंगे कि युद्ध कब खत्म होगा। लड़ना था ना तुमको। लड़ो।
हम तो 10 साल लड़ने के लिए बैठे हैं। तुम दुनिया के फूफा बने घूमते हो ना कि तुम अमेरिका हो। बहुत बड़ी इकॉनमी हो। तुमको ज्यादा नुकसान होगा। हमको तो तुम मारने ही पे तुले हो। मार दो। युद्ध में ईरान को भले ज्यादा नुकसान हुआ हो लेकिन अब ईरान ने इसे अपने वजूद की लड़ाई बना लिया है।
और ईरान सिर्फ धमकी नहीं दे रहा है। कंडीशन भी रख रहा है कि अगर युद्ध बंद करना है तो अमेरिका गारंटी दे कि भविष्य में कभी हमला नहीं करेगा। और पूरी तरह से सीज फायर हो। अब तक रॉकेट और ड्रोन से अमेरिका और इजराइल के पसीने छुड़ा रहे ईरान ने अब युद्ध में महाविनाशक भी निकाल दिए। ईरान की सेना ने पहले ही खुला ऐलान कर दिया था कि वो अब अपनी घातक और हैवी से दुश्मन पर शुरू करेगा। और आज ईरान ने अपनी से इराक के कुर्दिस्तान में अमेरिका के सबसे बड़े मिलिट्री बेस पर का दावा किया है।
ईरान की सेना ने का जो वीडियो जारी किया उसमें एक के बाद एक पांच टारगेट की तरफ लॉन्च होती नजर आ रही है। ईरानी सेना ने से हमले का एक और वीडियो जारी किया है। जिसमें एक के बाद एक कई अनजान लोकेशन से लॉन्च होती नजर आ रही है। ईरान ने दावा किया कि अब वह इज़राइल के ठिकानों और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना के सभी ठिकानों को भारी-भरकम से तबाह कर देगा। ईरान यह भी दावा कर रहा है कि उसके पास और दूसरे हथियारों का इतना बड़ा भंडार है कि वो अगले 10 साल तक लड़ सकता है। इसे साबित करने के लिए ईरान ने अपनी अंडरग्राउंड फैक्ट्री का एक वीडियो जारी किया है जिसमें एक से बढ़कर एक के लिए तैयार नजर आ रही हैं। मिसाइल को लांचर में लोड करके रखा गया है ताकि एक इशारा मिलते ही अंडरग्राउंड भंडार से बाहर लाया जा सके। तो ईरान भी ये दिखा रहा है कि हमको हल्के में मत लेना। इतना सब कुछ है मेरे पास। अब सवाल है कि ये अभी का वीडियो है या पहले का वीडियो है? ये कैसे पता चलेगा?
आप देखिए कि अमेरिका और इजराइल के ताबड़तोड़ हमलों के बाद भी ईरान उन्हें चकमा देकर कैसे भारीभरकम मिसाइल भी आसानी से लॉन्च कर दे रहा है। दरअसल ईरान ने अलग-अलग इलाकों में अंडर ग्राउंड फैक्ट्री बना रखी है।
जरूरत पड़ने पर वीरान इलाकों में बनी इन सीक्रेट फैक्ट्री से लॉन्चर लेकर बाहर निकलते हैं और दुश्मन पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर देते हैं। आप देखिए कि ईरान की जिस नेवी को ट्रंप पूरी तरह तबाह करने का दावा करते नहीं थक रहे। ईरान की उस नेवी ने भी इजराइल और अमेरिका के ठिकानों पर l और से के वीडियो जारी किए। जिसमें अनजान लोकेशन से मौजूद ईरान के शिप से मिसाइल और लॉन्च होते नजर आ रहे हैं। ईरान का दावा है कि उसकी नेवी ने कुवैत में अमेरिकी सेना के बेस को निशाना बनाया है। यानी मोटे तौर पर डोन्ड ट्रंप झूठ पे झूठ बोलकर अपने प्रतिद्वंदी पर मेंटल प्रेशर बना रहे थे। लेकिन वो इतना झूठ बोल चुके हैं कि सबको उनकी टैक्टिक समझ में आ गई। अब कोई उनके झूठ में फंसता नहीं है। ईरान सिर्फ l ही नहीं दाग रहा। दुश्मन को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए उसने में लोड होने वाले वॉरहेड का वजन भी बढ़ा दिया है। ईरान की सेना ने कह दिया है कि वह अपनी में 1000 से 2000 किलो तक के लगा रहा है। जिससे और घातक हो गई है। ईरान के पास खुर्रम शहर फोर और फतह टू जैसी एडवांस है। एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि अगर ऐसी घातक 1000 किलो के वॉरइड के साथ किसी टारगेट पर गिर गई तो पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह होने की बहुत ज्यादा गारंटी होती है। आमतौर पर में 500 किलो तक के वॉर हेड लगे होते हैं। ऐसे में 1000 से लेकर 2000 किलो तक के वॉर हेड वाली मोटे कंक्रीट वाली सतह को भी भेज देगी। और हमने आपको कहा था कि ईरान शुरू में पुराने हथियार पुराने यूज़ कर रहा है। अब वो निकाल रहा है नया नया माल। ईरान ने अब अपनी का दम दिखाकर अमेरिका की नींद उड़ा दी। जबकि पहले ही ईरान के शाही ड्रोन अमेरिका और इजराइल के ठिकानों को धुआं कर रहे हैं। ईरान ने अपने घातक से दुश्मन के ठिकानों पर हमले का भी वीडियो जारी किया। जिसमें एक के बाद एक कई ड्रोन तय टारगेट की तरफ उड़ान भरते नजर आ रहे हैं। ईरान ने उन्हीं ड्रोन की मदद से इजराइल के हाइफा में उसकी सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी पर हमले का दावा किया है।
आज भी ईरान ने में यूएई की ऑयल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचाने का दावा किया। ईरान ने इन्हीं ड्रोन हमलों में 11 दिनों में ट्रंप और नेतन याहू को बैकफुट पर धकेल दिया। ऐसे में ईरान की तरफ से के इस्तेमाल से अमेरिका और इजराइल की टेंशन बढ़ना तय माना जा रहा है। अगर ऐसे ही ईरान से चलती रही उधर अमेरिका l देता रहा और दोनों एक दूसरे को फोड़ते रहे तो रुकेगा कैसे? ट्रंप ने ईरान से बात करने और खत्म करने की बातें तो की लेकिन आज ही इजराइल के प्रधानमंत्री नितिन याू ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है।
इजराइल का सैन्य अभियान ईरान की हड्डियां तोड़ रहा है। हम ईरानी लोगों को जुर्म से आजादी दिलाना चाहते हैं। ईरान अगर खतरनाक और खतरनाक चला रहा है। तो इजराइल भी ईरान को फोड़ने में पीछे नहीं है। इजराइल से भी लगातार ईरान पर हो रहे हैं। यह तस्वीरें ईरान की राजधानी तेहरान की हैं।
जहां बड़ी संख्या में लोग देश को नया सुप्रीम लीडर मिलने का जश्न मनाने रहे थे। ईरान के सरकारी टीवी पर इसका टेलीकास्ट हो रहा था। तभी अचानक वहां से कुछ दूरी पर तेज की आवाज सुनाई दी। लेकिन ईरान का भी आप जज्बा देखिए कि लोग अटैक के बाद पैनिकिक में नहीं आए। भागे-भागे नहीं वो और नारे लगाने लग गए। यानी डॉनल्ड ट्रंप कह रहे थे कि इस तेहरान में रिजीम चेंज होगा। रिजीम चेंज होगा। वहां पब्लिक सड़क पर खड़ी हो गई खामनाई के बेटे के लिए कि भाई ये हमारा नया सुप्रीम लीडर आ गया है।
वहां गिर रहा है। उनको फर्क नहीं पड़ रहा कि मारो मार ही ना दोगे। डॉनल्ड ट्रंप और अमेरिका सोचते थे कि किसी के ऊपर बम गिराओ खत्म करो मामला। उन्होंने ईरान जैसा जज़्बा देखा नहीं था। तैरान ही नहीं ईरान के कई शहरों में अमेरिका और इज़राइल के हमलों का ऊंट धुआं उठता दिख रहा है। लेकिन ईरान झुकने को तैयार नहीं है बॉस। ईरान ही नहीं इजराइल की सेना लेबनन पर भी अंधाधुंध हमले कर रही है।
आज भी इजराइल की सेना ने दक्षिणी लेबनन में एयर स्ट्राइक की जिसमें एक इमारत ध्वस्त होती नजर आई। इजराइल ने इसे ईरान की मदद कर रहे हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमला बताया। इजराइल की सेना ने ऐसे ही हमलों के कुछ और वीडियो जारी किए जिसमें कई इमारतें से ध्वस्त होती दिख रही हैं। यानी ईरान के खत्म होने की बात तो अब नए लेवल पर जा रहा है और अब तो ईरान युद्ध ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां से रूस और चीन की भी एंट्री होती दिख रही है। पुतिन और जिनपिंग अभी तक ईरान युद्ध पर खुलकर नहीं बोल रहे थे। लेकिन अंदर ही अंदर ईरान की मदद कर रहे थे।
कहा जा रहा है कि रूस चीन की मदद से ही ईरान अभी तक युद्ध में टिका हुआ है। यह बात ट्रंप को समझ में आ रही है। ट्रंप ने तो पुतिन को फोन भी कर दिया। ट्रंप और पुतिन के बीच काफी देर बात हुई है। पुतिन ने ट्रंप से कहा है कि वो युद्ध में मध्यस्थता के लिए तैयार है। आप सोचिए कि ट्रंप किस तरह से बेचैन है कि वो पुतिन से बात कह रहे हैं कि अब तू ठीक भाई तू ही सुलझा दे। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद से ही रूस ईरान की मदद कर रहा है। अब यह बात दुनिया के सामने आ गई है।
ईरान के विदेश मंत्री ने भी स्वीकार किया है कि रूस ईरान की मदद कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक संबंध है। रूस किस तरह से ईरान की मदद कर रहा है। इस पर एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस ईरान को इंटेलिजेंस सपोर्ट दे रहा है। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों की जानकारी दे रहा है। अमेरिकी एसेट्स की लोकेशन ईरान को बता रहा है। रडार, वॉरशिप और कम्युनिकेशन सिस्टम की जानकारी दे रहा है।
रूस की मदद से अमेरिकी ठिकानों पर ईरान सटीक हमले भी कर रहा है। यानी रूस अपने सेटेलाइट के जरिए ईरान की मदद कर रहा है। इसी वजह से ईरान बिल्कुल सटीक हमले कर रहा है। जिससे अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंच रहा है। उधर चीन भी अब में खुलकर सामने आ गया। ईरान और चीन के बीच तगड़े व्यापारिक संबंध हैं। ईरान का 90% कच्चा तेल चीन खरीदता है। यानी एक तरह से चीन अपनी एनर्जी सिक्योरिटी के लिए ईरान पर निर्भर है। ईरान पर अमेरिकी कंट्रोल का मतलब चीन के लिए परेशानी बढ़ना भी होगा। ईरान की मदद के लिए चीन से दो बड़े जहाज ईरान की तरफ रवाना हुए हैं।
इस खबर से अमेरिका में हड़कंप मचा हुआ है। इन जहाजों में क्या है? इसको लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक इन जहाजों में बड़ी मात्रा में मिलिट्री ग्रेड का केमिकल हो सकता है। इस केमिकल का इस्तेमाल रॉकेट बनाने में किया जा सकता है। बैलस्टिक मिसाइल में भी यह केमिकल इस्तेमाल होता है। जहाजों में चीन के हथियारों की खेप होने की बात भी कही जा रही है। चीन से निकले जहाजों पर अमेरिका और ईयू की नजर बनी हुई है। अब सवाल है कि क्या अमेरिका इन जहाजों पर हमला कर सकता है?
अगर अमेरिका ने हमला किया तो भाई ये तो चीन के जहाज हैं। वो चुप थोड़ी बैठेगा। अगर जहाज ईरान पहुंच जाते हैं तो ईरान को रीइंफोर्समेंट मिल जाएगी। यानी दोनों ही स्थिति में ईरान युद्ध जल्दी खत्म होने के आसार नहीं। रूस और चीन की एंट्री के बीच ईरान पर हमले को लेकर ट्रंप जिस तरह से और जितनी तरह की बातें कर रहे हैं उससे भी लोग हैरान हैं। ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं। लेकिन सोचिए कि ईरान की नेवी के दर्जनों शिप तबाह करने के बाद ट्रंप उसका मजाक उड़ा रहे हैं। कह रहे हैं कि अमेरिका से अमेरिकी सेना कह रही है कि शिप को डूबाने में ज्यादा मजा आता है। आप सोचिए कैसे लोग हैं यार।
एक निहत्ता शिप मार दिया। उसमें लोग मर गए। कह रहे हैं कि उसको पकड़े नहीं लेकिन डूबाने में ज्यादा मजा आता है ना इसलिए डूबा दिए। सुनिए जरा इस आदमी को द नेवी गंग एट द बॉटम द ओशन 46 शिप्स कैन यू बिलीव इट आई गेट लिटल अपसेट विथ पीपल आई सेड व्हाट क्वालिटी ऑफ़ शिप एक्सीलेंट सर टॉप द लाइन आई सेड व्ह वी जस्ट कैप्चर द शिप वी सिंस सोचिए एक देश की नेवी के दर्जनों शिप आप तबाह कर दें और फिर कहते हैं कि शिप डुबोने में डुबोने में मजा आता है।
इतना ही नहीं कल ही ट्रंप ने कहा कि चार लोगों की सलाह के बाद ईरान पर हमले का फैसला हुआ था। इसमें पहले हैं ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर। दूसरे हैं ट्रंप के विशेष दूत और करीबी स्टीव विटकॉफ, तीसरे हैं रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और चौथे हैं विदेश मंत्री मार्को रूबियो। ट्रंप ने कहा कि इन सभी ने बताया कि ईरान हमला करने वाला है। ईरान को रोकने के लिए हमने पहले हमला करने का फैसला कर दिया। सोचिए एक देश पर ट्रंप ने इसलिए कर दिया क्योंकि उन्हें चार लोगों ने सलाह दी थी। इन चार लोगों में इनका एक दामाद भी था और एक दोस्त था। ऐसे तो इनका देश चल रहा है। ट्रंप की फजीहत इस मामले में भी हो रही है कि ईरान में बच्चियों के स्कूल पर में गिराई गई। ईरान के खिलाफ युद्ध के पहले ही दिन यानी 28 फरवरी को एक गर्ल्स स्कूल में मिसाइल अटैक पर ट्रंप बुरी तरह गिर गए। इस हमले में 150 से ज्यादा स्कूली छात्राओं की हुई। अब जबकि ईरान ने टॉम हॉक से हमले का वीडियो जारी कर दिया है और जांच में वीडियो सही साबित हो चुका है। साथ ही यह भी पुष्टि हो चुकी है कि इस हमले में अमेरिका की सबसे पावरफुल मानी जाने वाली टॉम हॉक का इस्तेमाल किया गया।
तो ट्रंप से इस पर जवाब देते नहीं बन रहे हैं क्योंकि दुनिया भर के मानव अधिकार संगठन इसे इंटरनेशनल ह्यूमेनिटेरियन लॉ का गंभीर उल्लंघन बता रहे हैं। ईरान इसके लिए ट्रंप को क्रिमिनल बनाने की मांग कर रहा है। और जब टॉमहॉक से हमले पर ट्रंप से जवाब मांगा गया तो ट्रंप ने कह दिया कि अमेरिका ने कई देशों को टॉमक मिसाइल बेची है। ईरान के पास भी टॉम हॉक मिसाइल हो सकती है।
अमेरिका जैसा बेशर्म देश आपको शायद ही मिलेगा। और डॉनल्ड ट्रंप बेशर्मी के चरम पर हैं बॉस। कह रहे हैं दूसरे देशों को भी टॉमक बेचा है। ईरान के पास भी तो है। तो ईरान आप पर नहीं मार रहा है टॉमक। अपने घर अपने घर में मासूम बच्चियों पे मार दे रहा है। कैसे लोग हैं बॉस? बच्चे मार के उसके बाद भी जो है बेशर्मी से खड़े हैं। नजर मिला रहे हैं। कह रहे हैं दुनिया का भला कर रहे हैं।
