ईरान की लड़ाई में कूदेगा पाकिस्तान ? सऊदी का ऐलान, ईरान हैरान !

ईरान के खिलाफ में कूदेगा पाकिस्तान। सऊदी का डिफेंस एग्रीमेंट के इस्तेमाल का ऐलान। हमलों से घबराया सऊदी। मुनीर संग चर्चा। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल हमले का आज आठवां दिन है। यानी आठ दिनों से अब तक हमले नहीं रुके हैं। और आगे भी यह हमले कब तक जारी रहेंगे? फिलहाल नहीं कहा जा सकता है।

28 फरवरी को शुरू हुई इस में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनई की हो गई। अमेरिका, इजराइल 3 दिन में 5000 से ज्यादा बम गिरा चुके हैं। इससे ईरान में 1200 से ज्यादा लोगों की भी हो चुकी है। ये हमले अभी भी तेज हो रहे हैं। ना सिर्फ इजराइल और अमेरिका की तरफ से बल्कि ईरान की तरफ से भी।

ईरान से किए जा रहे हमलों की चपेट में तमाम मुस्लिम देश भी हैं जिनमें सबसे ऊपर सऊदी का नाम आ रहा है। सऊदी अपने आप को एक खतरे में महसूस कर रहा है और अब वो पाकिस्तान की तरफ देख रहा है कि पाकिस्तान जो उसका रक्षा साथी है वो उसके साथ आकर इस जंग में कूद जाए। सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ अपने जॉइंट स्ट्रेटेजिक डिफेंस एग्रीमेंट के इस्तेमाल करने का ऐलान कर दिया है। इसकी घोषणा सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने कर दी है।

उन्होंने पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्स फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। हमने किंगडम पर ईरानी हमलों और हमारे जॉइंट स्ट्रेटेजिक डिफेंस एग्रीमेंट के फ्रेमवर्क के अंदर उन्हें रोकने के लिए जरूरी उपायों पर चर्चा की।

हमने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की कारवाईयां क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करती हैं और उम्मीद जताई है कि ईरानी पक्ष समझदारी से काम लेगा और गलत अंदाजे से बचेगा। तो क्या ईरान के खिलाफ जंग में अब पाकिस्तान कूद जाएगा?

क्या सऊदी का साथ देना पाकिस्तान की मजबूरी हो चुकी है? और अगर इस जंग में पाकिस्तान कूदता है तो पाकिस्तान का क्या हाल होगा? ईरान का जो अमेरिका इजराइल के साथ चल रहा है उसमें पॉसिबिलिटीज ये बन रही है कि अब सऊदी अरेबिया भी फुल रूपे उसके अंदर शामिल हो जाएगा।

लगातार जिस प्रकार से सऊदी के ऊपर हमले किए जा रहे हैं और सऊदी के भी जो अमेरिकन एसेट है अमेरिकन एसेट के अलावा जो तेल कंपनियां हैं डर ये भी लग रहा है सऊदी को कि हमारे जो सिविलियंस है उनको भी टारगेट किया जा सकता है और जो सऊदी का शाही परिवार है उसको भी टारगेट किया जा सकता है। तो ऐसे में स्थिति यह है कि जो सऊदी के रक्षा मंत्री हैं उन्होंने पाकिस्तान के साथ जो डिफेंस पैक्ट हुआ था उसके लागू होने की घोषणा कर दी है और वो पाकिस्तान के मुनीर से भी मिले हैं। अब प्रश्न उठता है कि क्या पाकिस्तान इस वॉर में शामिल होगा?

अकॉर्डिंग टू अगर हम डिफेंस पैक्ट की बात करें तो पाकिस्तान के पास में कोई रास्ता नहीं है कि वो शामिल ना हो। और पाकिस्तान सबसे ज्यादा बेहतर लोकेशन में है जो ईरान के नियर बाय है। और यह बात पहले से मानी भी जा रही थी कि ईरान के साथ जब वॉर होगा तो इस तरह के हालात बनेंगे कि पाकिस्तान को भी इस वॉर में जाना पड़ेगा और इसी को लेकर लगातार अमेरिका भी पाकिस्तान के साथ में बेटर रिलेशंस बना रहा था। तो यह संभावना मैं मान के चल रहा हूं कि पाकिस्तान के पास में कोई विकल्प नहीं है ईरान के अगेंस्ट में जाने का और चाहे तो हम कह सकते हैं कि सऊदी के फेवर में चाहे वो अमेरिका के फेवर में लेकिन पाकिस्तान को जाना ही होगा पाकिस्तान के पास में नो ऑप्शन।

सऊदी अरब और पाकिस्तान ने पिछले साल सितंबर में एक रक्षा समझौता किया था। इस रक्षा समझौते के तहत एक देश पर हमला दूसरे देश पर हमला माना जाएगा। और अब सऊदी अरब के रक्षा मंत्री ने इस समझौते के इस्तेमाल का ऐलान भी कर दिया है। अब सऊदी के रक्षा मंत्री ने आसिम मुनीर से ऐसे वक्त में मुलाकात की है जब सऊदी अरब शाही परिवार को डर सता रहा है कि ईरानी उन्हें निशाना कभी भी बना सकती हैं। क्योंकि ईरान इस वक्त बौखलाया हुआ है। खावेन की मौत के बाद ईरान अब भी रुकने का नाम नहीं ले रहा और वो यह कह रहा है कि वो हर वार का पलटवार तो करेगा ही। मिडिल ईस्ट आई अखबार में लिखा है कि हाल ही उथल-पुथल में पाकिस्तान को एक बहुत ही नाजुक स्थिति में डालने का काम किया है।

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल के मिलकर किए गए हमलों और उसके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनई की मौत के बाद तेहरान ने सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देशों को निशाना बनाकर जवाबी कारवाई करने का काम किया। इसलिए पाकिस्तान में हाल ही में रियाद के साथ दस्तखत किए गए स्ट्रेटेजिक डिफेंस एग्रीमेंट में शामिल जिम्मेदारियों के बारे में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

वहीं यूनाइटेड अरब अमीरात के नेशनल डिफेंस कॉलेज में सिक्योरिटी और स्ट्रेटेजिक स्टडीज के एसिएट प्रोफेसर जाहिद शाहब अहमद ने मिडिल ईस्ट आई से कहा कि पाकिस्तान स्टैंड बाय मोड में है और सऊदी अरब को मदद देने से मना करने की स्थिति में भी नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर लड़ाई लंबी चलती है तो सऊदी अरब पाकिस्तान से मिलिट्री मदद मांग सकता है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्री का इस्लामाबाद दौरा मदद मांगने को ही दिखाता है। अब देखना होगा कि पाकिस्तान किस स्थिति में आकर सऊदी की मदद करता है और क्या ईरान इसका पलटवार करेगा।

Leave a Comment