ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजकिन से व्लादमीरपुतिन यानी रूस के राष्ट्रपति ने बात की है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान से कहा है कि हम साथ खड़े हैं और हमले में मारे गए लोगों के प्रति रूस ने संवेदना जताई है। पुतिन ने तुरंत रोकने पर जोर दिया है और आप जानते हैं कि यह बातचीत ऐसे में और महत्वपूर्ण हो जाती है। जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी बेस पर हमले को लेकर रूस ईरान की मदद कर रहा है।
इंटेलिजेंस इनपुट में मदद कर रहा है। उन्हें तकनीकी जानकारीभी मुहैया करवा रहा है। राजीव रंजन के पास वापस चलते हैं। बड़ी खबर है मसूद प्रजेशकिन ईरान के राष्ट्रपति हैं। उन्हें व्लादमीर पुतिन फोन करते हैं। फोन पर बातचीत होती है। रूसी राष्ट्रपति रूस खुद एक में इस समय उलझा हुआ है। लेकिन ये रूसवी राष्ट्रपति का फोन आना इस पूरे इक्वेशन को बदलता भी है और ईरान के साथ जो समर्थन आ रहा है उसे भी दिखाता है। राजीव आप बिल्कुल बिल्कुल सही कह रहे हैं।
ईरान के वक्त के साथ क्या मुसीबत के वक्त में केवल चीन और रूस ही दो बड़े देश हैं जो खुल के सामने आके खड़े हैं। अब यहां देखने वाली बात होगी कि जो बातचीत हुई है, बातचीत का दायरा क्या है और क्या ईरान यह रूस जो है क्या आगे बढ़कर कुछ और मदद की पेशकश करता है? क्या इस तरह की जो बातें निकल गई? क्या कुछ हथियार की सप्लाई की बात भी करता है? यह बात भी किसी राजीव रूस अभी किस तरह की मदद कर रहा है ईरान को? क्या खबरें हैं? इंटेलिजेंस इनपुट की भी बात थी।
बेसिस की जानकारी दे रहा है। किस तरह से मदद इस समय रूस कर रहा है? क्योंकि वो साथ मिलके लड़ तो नहीं रहा है पर क्या मदद मिल रही है? देखिए देखिए जो जानकारी मिल मिल पा रही है उसके मुताबिक रूस की मदद बहुत बड़ी मदद हैकि अमेरिका के कह रहे एयरक्राफ्ट की ना नहीं बात कर रहे हैं बल्कि जो जो खाड़ी देशों में बेसिस है वहां पर जो ईरान के और जो हमले कर रहे हैं उसकी सटीक जानकारी जो है रूस के द्वारा मुहैया कराई जा रही है और ऐसा दावा किया गया है क्योंकि ईरान की बात करें तो उसके पास कोई अपना कोई सेटेलाइट अभी कोई एक्टिव नहीं है।
उसके एयर पावर भी नहीं है। एयर डिफेंस सिस्टम नहीं है। और ऐसे हालात में ईरान जो है लगातार जो है अमेरिका और इजराइल और उसके जो बेसिस है वहां ठिकाने उस पर सटीक हमला कर रहा है। तो ये जानकारी उसको रूस की तरफ से मुहैया कराई जा रही है कि एक कोऑर्डिनेट है और यहां पर आप हमला कीजिए तो यहां नुकसान होगा तो ये रूस की तरफ से ऐसा कहा जा रहा है मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है और यही वजह है कि ईरान के मिसाइल की बात करें या की बात करें उसको इतनी सफलता मिल रही है। हम ठीक है बिल्कुल ईरान को इस समय जो तमाम तरह की जानकारियां है वो भी अमेरिका रूस जो है वो इस वक्त मुहैया करवा रहा है।
अशोक सजनार एक आपसे प्रतिक्रिया और एयर वाइस मार्शल श्रीवास्तव आपसे भी इस वक्त इसका कितना महत्व है? इससे क्या चीजें बदल सकती हैं? रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पजेशियन को फोन किया है। जी मेरे ख्याल से यह बहुत महत्वपूर्ण डेवलपमेंट है दोनों देशों का साथ में आना क्योंकि हम जानते हैं जो विश्व मंच पर जैसे यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में या अदर वाइज तो उन्होंने सपोर्ट दिया है। परंतु उसके अलावा ना तो चीन की इतनी कुछ क्षमता है जो डायरेक्टली आकर वो सहायता करें और करना भी नहीं चाहते क्योंकि उनके अपने जो संबंध है अमेरिका के साथ और अभी वो देख रहे हैं चाहे चीन का अगर मैं कहूं क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने वहां पर जाना है।
रूस की जहां तक बात है उनका अपना चार साल से ऊपर युद्ध चल रहा है यूक्रेन के ऊपर और कुछ खबरें आई है। हमने यह देखी है जो फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्ट जो यहां पर भारत में आए उन्होंने कहा जो पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन का पलरा थोड़ा भारी दिखाई देता है तो अगर वो वहां के राष्ट्रपति कह रहे हैं तो मैं उसको कंप्लीटली उसको वो नहीं करूंगा रिजेक्ट नहीं करूंगा उनकी असेसमेंट को तो अगर ऐसी बात है चाहे बराबरी का हो वहां पर रूस और यूक्रेन का परंतु फिर भी रूस की क्षमता उससे थोड़ी कम हो जाती है परंतु फिर भी उसके पास पॉसिबिलिटी है और ईरान ने बहुत सहायता की है।
ईरान के राष्ट्रपति को तो खेमे तो बटे हुए हैं वहां पे भी अमेरिका और रूस के बीच नगमा इसमें रूस का बड़ा अपना स्वार्थ इनवॉल्व है उनको देखिए दो चीजें रूस हमेशा दे सकता है ईरान को एक तो उनकी जो कम्युनिकेशन डैमेज की गई है जिससे कि वो कमांड एंड कंट्रोल जो अफेक्ट होता है ये लगता है कि रूस ने कमांड एंड कंट्रोल को रीस्टब्लिश करने में ईरान की मदद की होगी जो टेक्नोलॉजिकल हेल्प है और दूसरी बात ये है कि जो आप टारगेटिंग इन की हम लोग बात करते हैं कि जो अमेरिकन एसेट्स है उनके कोऑर्डिनेट्स देना लेकिन जब आपकी आपके वहां तक पहुंचते हैं या आपकी वहां तक पहुंचती है तो उसको नेविगेट करने के लिए आपको जीपीएस जैसे सिस्टम की जरूरत पड़ती है जो तीन देशों के पास है।
हमारे पास भी है अपना नाविक है जीपीएस का वहां संदर्भ में वहां ग्लोनस है तो ग्लोनस से अगर वो ग्लोनस की सहायता देते हैं तो टारगेटिंग जो है वो बहुत एक्यूरेट हो जाती है प्रसाइज हो जाती है तो ये दो अगर मदद आपको मिलती है कम्युनिकेशंस में टारगेटिंग इंटेलिजेंस में और टारगेट तक नेविगेट करने में क्योंकि हम जो टारगेट्स की बात कर रहे हैं वो 1000 किलोमीटर से ले 1500 किलोमीटर तक दूर हो सकते हैं तो वहां पर आपको लगती है।
अगर आप अपने वेपन की प्रशिक्षण बढ़ाना चाहते हैं और तीसरी बात और बाकी जो मोराइल की बात है और जगह खड़े होने की बात है वो तो है और शायद 1336 का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट जो है वो रूस ने बनाया है ईरान ने ड्यूरिंग द कॉन्फ्लिक्ट और उसकी प्रोडक्शन कैपेसिटी बहुत ज्यादा है। सर्च कैपेसिटी बहुत ज्यादा है। मैं आपके दर्शकों से एक बात और साझा कर लूं।
जहां तक एमुनेशंस का चाहे वो आपके ग्राउंड एमिनेशन हो, एयर एमुनेशन हो, एयर टू एयर मिसाइल्स हो या बैलस्टिक हो इन सबकी क्रूज मिसाइल्स हो सबकी सर्च कैपेसिटी हम बोलते हैं टाइम में वो रूस से ज्यादा यूरोप और अमेरिका के पास नहीं है। रूस के पास बहुत ज्यादा कैपेसिटी है। इसीलिए वो अकेले होल्ड आउट कर सका और जो मैंने आपसे पहले बात कही थी डेप्थ ऑफ मैगजीन क्योंकि यूक्रेन चल रहा है और बहुत सारा आपने जो एमिनेशनंस है प्लेटफ्स तो है एमिशन आपने जो है वो यूक्रेन को प्रोवाइड किए टू कंटेन एंड कंट्रोल रशिया वो सारे के सारे अब आपको अफेक्ट करेंगे। तो इनमें जो क्वांटिटेटिव कैपेसिटी होती है उसको करने के लिए सर्च कैपेसिटी की कभी जरूरत नहीं पड़ी अमेरिका को।
