ईरान ने मानी अमेरिका की शर्त, रुक जाएगी लड़ाई?

इजराइल ईरान युद्ध के बीच शांति समझौते के लिए अमेरिका ने ईरान के सामने जो सबसे बड़ी शर्त रखी थी वो परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से बंद करना था।

अब के बीच ईरान ने इसे मान लेने की बात कही है। ईरान के उप विदेश मंत्री का कहना है कि अमेरिका अगर उसे कोई प्रस्ताव देता है तो परमाणु कार्यक्रम बंद कर देगा। तो क्या है पूरी जानकारी जानते हैं इस रिपोर्ट में। अमेरिका और इजराइल से के बीच ईरान ने यह बड़ा ऐलान किया है। ईरान के उप विदेश मंत्री खातिब जैद ने तेहरान से न्यूक्लियर प्रोग्राम खत्म करने की पेशकश की है।

खातिब जैद का कहना है कि अमेरिका अगर हमें एक अच्छा प्रस्ताव देता है तो हम अपना प्रोग्राम खत्म कर लेंगे। स्काई न्यूज़ अरबिया ने खातिब जैद के हवाले से यह रिपोर्ट प्रकाशित की है। यह पहली बार है जब आधिकारिक तौर पर ईरान ने अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरीके से खत्म करने की पेशकश की है। वहीं ईरान समझौते के तहत अब तक सिर्फ यूरेनियम संवर्धन को कम करने की बात करता रहा है। लेकिन अब उसने पहली बार पूरे कार्यक्रम को ही खत्म करने की पेशकश की है।

आपको बताते चलें कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौता कराने में मिडिल ईस्ट के 12 देश जुटे हुए हैं। सीएनएन के एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि यह 12 देश लगातार अमेरिका से संपर्क साध रहे हैं। तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान इसे लीड कर रहे हैं। वहीं फिदान ओमान और सऊदी के साथ मिलकर लगातार अमेरिका पर दबाव भी बढ़ रहा है। इससे पहले न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक सूत्र के हवाले से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

इसमें कहा गया था कि अमेरिका और ईरान समझौते को लेकर सीक्रेट तरीके से बातचीत कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के एक विशेष दूत स्टीव विटक के मुताबिक ईरान के पास वर्तमान में 460 किलो यूरेनियम संवर्धित है। ईरान इसके लिए 11 परमाणु बम बना सकता है।

ईरान के पास जो यूरेनियम है वह 60% तक संवर्धित है। एक को तैयार करने के लिए यूरेनियम को 90% संवर्धित करना होता है। वहीं अमेरिकी हमले से पहले ईरान और अमेरिका ने पहले ओमान और फिर जिनेवा में समझौते को लेकर बातचीत की थी। अमेरिकी दूत विटक के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराखची ने इस मीटिंग में सिर्फ यूरेनियम संवर्धन को कम करने की बात की थी। अराखची के साथ इस मीटिंग में ईरान के उपविदेश मंत्री खातिब जैद भी मौजूद थे। वहीं अमेरिका की तरफ से बैठक में स्टीव विटक और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनेर भी शामिल थे।

वहीं 28 फरवरी को शुरू हुए इस अभियान में अमेरिकी मिसाइलों, ड्रोन और इजराइली लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। हमले में तेहरान समेत कई शहरों में सैन्य ठिकानों, मिसाइल लॉन साइट और कमांड सेंटर को निशाना बनाया गया। वहीं बताया गया कि इस दौरान ईरान के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को भी टारगेट किया गया जिसमें सुप्रीम लीडर आया अली खामनेई की मौत हो गई और यह सबसे बड़ा झटका माना गया ईरान के लिए।

वहीं अमेरिका और इजराइल का कहना है कि यह कार्यवाही ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी मिसाइल क्षमताओं को रोकने के लिए की गई है। दोनों देशों का दावा है कि ईरान की गतिविधियां क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन रही है। तो क्या ईरान और इजराइल के बीच चल रहा यह जंग रुक जाएगा। क्या अमेरिका इसको रोकने में सफल हो पाएगा?

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