आपको बता दें कि खामई की बीवी का जीवन एक रहस्यमय कहानी की तरह रहा है। वह ईरान की सबसे अदृश्य महिला कहलाती थी। यानी एक हिडन औरत क्योंकि वह राजनीतिक या सामाजिक कार्यक्रमों से पूरी तरह दूर रही। लेकिन एक रेयर इंटरव्यू में उन्होंने खामोई के साथ अपने निकाह, परिवार और जीवन के बारे में खुलासा किया था।
यह इंटरव्यू पहली बार 1993 में एक ईरानी मैगजीन में अंग्रेजी में पब्लिश हुआ था और बाद में फारसी में ऑनलाइन वायरल हुआ। मंसूरी ने इंटरव्यू में बताया था कि उनका निकाह 1964 में हुआ था। यह कोई लव मैरिज या रोमांटिक मुलाकात नहीं थी बल्कि धार्मिक परिवारों की परंपरा के मुताबिक अरेंज्ड मैरिज थी।
खामनई की मां खदीजे मर्दामादी ने मंसूरी के घर जाकर उनका हाथ मांगा था। उस वक्त मंसूरी सिर्फ 17 साल की थी और खामनई एक साधारण मौलवी थे जो रजा शाह बहलवी के संतान मोहम्मद रजा शाह बहलवी के शासन के खिलाफ विरोधी गतिविधियों में एक्टिव हो रहे थे। मंसूरी का जन्म 1947 में मशहद शहर के एक धार्मिक और कारोबारी परिवार में हुआ था। उनके पिता मोहम्मद इस्माइल खाजस्ते बगैर जहांदे के एक सक्सेसफुल बिजनेसमैन थे। निकाह के बाद खामनई की राजनीतिक गतिविधियों के कारण शाह की पुलिस ने उन्हें कई बार गिरफ्तार किया।
जेल के दौर में मंसूरी ने अकेले छह बच्चों की परवरिश की। वह जेल में खामनई से मिलने जाती थी और दोनों एक दूसरे के दुख दर्द बांटते थे। मंसूरी ने कभी घर की मुश्किलें यासमस्याओं का जिक्र नहीं किया बल्कि सिर्फ अच्छी खबरें सुनाकर उनका मनोबल बनाए रखा। उन्होंने बतायाथा कि मेरा सबसे बड़ा रोल घर में शांति बनाए रखना था ताकि वह अपना काम सुकून से कर सके। मंसूरी खुद भी क्रांति में एक्टिव रही। वह सरकार विरोधी पर्चे बांटने, संदेश पहुंचाने और दस्तावेज छिपाने में मदद करती थी। लेकिन इन्हें उन्होंने बताने लायक नहीं बताया।
जेल के दौर ने उनके निकाह को और मजबूत बनाया। जहां इश्क और सपोर्ट का रिश्ता गहरा हुआ। मंसूरी ने खामनाई को एक स्नेही और समझदार शौहर बताया। उन्होंने कहा कि काम से थके हारे घर लौटने के बावजूद खामनाई काम की समस्याओं को घर से दूर रखते थे। घरेलू कामों में मदद के बारे में बताया था कि उनके पास समय नहीं है और ना ही मैं ऐसी उम्मीद करती हूं।
खामनाई उनसे सिर्फ एक खुशहाल, शांत और हेल्दी परिवार चाहते थे। हिजाब के बारे में मंसूरी का कहना था कि घर के बाहर के लिए चादर सबसे अच्छा आवरण है। घर के अंदर अलग है। लेकिन कपड़े हमेशा इस्लामी मर्यादा के मुताबिक होने चाहिए। उन्होंने यह भी बताया था कि वह सरकारी कर्मचारी नहीं है। लेकिन मुस्लिम महिला के रूप में वो अन्य बहनों की तरह जिम्मेदारियां निभाती हैं।
