खामेनेई के मारे जाने पर भारतीय नेताओं ने क्या कहा ?

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनई के मारे जाने के बाद भारतीय नेताओं की तरफ से भी बड़ा बयान सामने आया है। भारत के कई नेताओं ने अयातुल्लाह अली खामने के निधन पर शोक जताया है। इसके अलावा आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर के श्रीनगर और उत्तर प्रदेश के राजधानी लखनऊ में भी शिया समुदाय ने सड़कों पर उतर कर जबरदस्त प्रदर्शन किया। तो किन नेताओं ने क्या बयान दिया है वह आपको बताते हैं।

सबसे पहले बात करते हैं जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की जिन्होंने ईरान और इजराइल के बीच चल रहे जंग पर हैरानी जताई और अयातुल्लाह अली खामनई केमारे जाने पर शोक जताया है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मैं ईरान में हो रहे घटनाक्रम को लेकर बहुत चिंतित हूं। जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामिनई की भी शामिल है।

मैं सभी समुदायों से अपील करता हूं कि वे शांत रहें, शांति बनाए रखें और ऐसे किसी भी काम से बचें जिससे तनाव या अशांति हो। हमें यह भी पक्का करना चाहिए कि जम्मू और कश्मीर में जो लोग दुख मना रहे हैं उन्हें शांति से दुख मनाने दिया जाए। पुलिस और प्रशासन को बहुत संयम बरतना चाहिए और बल या रोक लगाने वाले तरीकों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

जम्मू और कश्मीर सरकार ईरानमें अभी जम्मू और कश्मीर के रहने वालों जिनमें छात्र भी शामिल है कि सुरक्षा और भलाई पक्का करने के लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रही है। तो उमर अब्दुल्ला की तरफ से दो टूक कह दिया गया कि जम्मू कश्मीर में जो लोग दुख मना रहे हैं अयातुल्ला अली खामनई के मारे जाने का शोक मना रहे हैं उन्हें रोकने के लिए पुलिस प्रशासन की तरफ से कोई भी कोशिश ना की जाए। इसके अलावा पीडीपी चीफ और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की तरफ से भी अयातुल्लाह अली खामिनई के निधन पर बयान सामने आया है।

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि आज इतिहास में एक बहुत ही दुखद और शर्मनाक मोड़ आया है। जब इजराइल और यूएसए ईरान के प्यारे नेता अयातुल्ला अली खामिनई की हत्या पर शेखी बगार रहे हैं। इससे भी ज्यादा शर्मनाक और चौंकाने वाली बात यह है कि मुस्लिम देशों ने साफ और छिपे हुए तौर पर इसका समर्थन किया है।

जिन्होंने जमीर के बजाय सुविधा और फायदे को चुना। इतिहास इस बात का सबूत होगा कि किसने न्याय के लिए लड़ाई लड़ी और किसने जालिमों की मदद की। ईरान के लोगों के साथ दुआएं। अल्लाह उन्हें जुल्म और नाइंसाफी करने वाली ताकतों पर ताकत और जीतदे। जम्मू कश्मीर के नेताओं के अलावा आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह का भी बयान सामने आया है। संजय सिंह ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि जिनके पूर्वज भारत से हैं, वह अयातुल्लाह खामिनई ईरान के सुप्रीम लीडर बने। उनका जाना एक युग का अंत है। भारत ने एक भरोसेमंद दोस्त खोया है। खामिनेश जी को विनम्र श्रद्धांजलि।

ईरान भारत का परंपरागत मित्र है। उसने पाकिस्तान के खिलाफ वोट किया। हमेशा भारत का साथ दिया। भारत को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान की। इस संकट की घड़ी में भारत सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।वरना वैश्विक तानाशाह अमेरिका की तानाशाही का दायरा दुनिया भर में बढ़ता जाएगा। वेनेजुएला के बाद ईरान कहां तक फैलेगा इजराइल अमेरिका का आतंक? आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के अलावा कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ ने शेर के जरिए अयातुल्लाह अली खामिनई के निधन पर शोक व्यक्त किया। इमरान प्रतापगढ़ ने लिखा कि सितम की तेग से गर्दन वफा सियारों की कटी है बरस सरय मैदा मगर झुकी तो नहीं। वहीं लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी के ऑफिशियल अकाउंट से अयातुल्लाह अली खामिनई के निधन पर शोक व्यक्त किया गया है।

आरजेडी ने अपने पोस्ट में लिखा कि अयातुल्लाह अली खामिनई की हत्या के उद्देश्य से किया गया ईरान पर हमला पूरी मानवता के विरुद्ध हमला है। हजारों बेकसूरों ने अपनी जान गवाई है।

अयातुल्लाह अली खामिनई की शहादत के साथ भारत ने अपना एक दोस्त खो दिया है। इराक, लीबिया, सीरिया, अमेरिका ने जहां भी हमला किया उन देशों को और वहां के नागरिकों के जीवन को अमेरिका ने बर्बाद कर दिया। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनई के निधन पर यूबीडी शिवसेना की नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी पोस्ट किया है। प्रियंका चतुर्वेदी ने कहाकि अयातुल्लाह अली खामनई सिर्फ ईरान के सुप्रीम लीडर ही नहीं थे बल्कि शिया मुस्लिम कम्युनिटी के हेड में से एक थे। आने वाले समय में उनकी मौत का क्या नतीजा होगा यह एक अनचाहा तमाशा होगा जिसे समझना मुश्किल होगा। गौरतलब है कि इजराइल और अमेरिका ने साझा ऑपरेशन में आया अली खामने को मारा है।

जिसके बाद से लगातार देश और दुनिया के तमाम हिस्सों में प्रदर्शन जारी है। भारत के भी कई हिस्सों में लगातार प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। जम्मू कश्मीर के श्रीनगर और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी शिया समुदाय ने सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन किया।

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