तुरंत रोको ! ईरान-यूएस लड़ाई पर बोल पड़ा चीन! रूस भी ट्रंप पर बुरी तरह भन्नाया।

मिडिल ईस्ट इस समय इतिहास के सबसे मोड़ पर खड़ा है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त सैन्य हमलों के कुछ ही घंटों के बाद तेहरान ने ट्रुथफुल प्रॉमिस फोर के तहत जो जवाबी कार्रवाई की है, उसने पूरे क्षेत्र को की आग में झोंक दिया है। ईरान के और ने न केवल बल्कि खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमराने की कगार पर है।

इसी बीच ईरान के दो सबसे खास दोस्तों चीन और रूस की ओर से प्रतिक्रिया आ गई है। इसलिए पहले जानते हैं कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव पर चीन और रूस ने क्या कहा। अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर किए गए सैनी हमलों को लेकर चीन बेहद चिंतित है।

चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, चीन सैन्य कारवाही को तत्काल रोकने, तनावपूर्ण स्थिति को और बढ़ने से रोकने, संवाद और बातचीत को फिर से शुरू करने और मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों का आह्वान करता है। दूसरी ओर रूस ने अमेरिका और इसराइल द्वारा किए गए हमलों पर गुस्सा जाहिर किया है। रूस ने इस हमले को गैर जिम्मेदाराना करार देते हुए एक संप्रभु और स्वतंत्र संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश के खिलाफ जानबूझकर सोची समझी और बिना उकसावे की की गई बताया। जो अंतरराष्ट्रीय कानून के मूलभूत सिद्धांतों और मानदंडों का सीधा उल्लंघन है। रूस ने कहा यह निंदनीय है कि यह हमले एक बार फिर से नई वार्ता प्रक्रिया की आड़ में किए जा रहे हैं। जिसका उद्देश्य दिखावटी तौर पर ईरान के आसपास की स्थिति का दीर्घकालिक सामान्यकरण सुनिश्चित करना है। यह सब रूस को दिए गए उन आश्वासनों के बावजूद हो रहा है जिनमें कहा गया था कि इसराइल ईरान के साथ सैन्य टकराव में शामिल होने में कोई दिलचस्पी नहीं रखता।

रूस ने कहा कि हम तत्काल राजनीतिक और कूटनीतिक मार्ग पर लौटने का आह्वान करते हैं। रूस हमेशा की तरह अंतरराष्ट्रीय कानून आपसी सम्मान और हितों के संतुलित विचार पर आधारित शांतिपूर्ण समाधानों को आगे बढ़ाने में सहायता करने के लिए तत्पर है। रूस ने कड़े शब्दों में कहा कि हमलावरों के इरादे स्पष्ट हैं। संवैधानिक व्यवस्था को ध्वस्त करना और उस देश के नेतृत्व को हटाना जिसे वे पसंद नहीं करते क्योंकि उसने बल और लगातार पड़ते दबाव के आगे कभी घुटने नहीं टेके और झुकने से इंकार कर दिया।

इधर इसराइल ने अपने नागरिकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। देश के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं और अस्पतालों को जमीन के नीचे बने बंकरों में शिफ्ट कर दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय यानी वाइट हाउस ने कहा है कि वे इसराइल की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और ईरान को इस दुस्साहस की भारी कीमत चुकानी होगी। वर्तमान हालात यह है कि मिडिल ईस्ट अब एक ऐसे बारूद के ढेर पर है जहां एक और गलत कदम वैश्विक महाविनाश का कारण बन सकता है। एक तरफ अमेरिका और इसराइल अपनी सुरक्षा का हवाला दे रहे हैं।

दूसरी ओर रूस और चीन इसे पश्चिमी साम्राज्यवाद की कोशिश बता रहे हैं। पूरी दुनिया की नजरें अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक पर टिकी है। इजराइल और अमेरिका ने शनिवार को ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में कई लोगों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है।

हमलों के तुरंत बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए कम से कम आठ देशों को निशाना बनाया। इन देशों में अमेरिकी मिलिट्री और एयरबेस बने हुए हैं। बहरीन, कतर, इसराइल, दुबई समेत कई ठिकानों पर ईरान ने ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। इसके बाद शाम को फिर से ईरान ने मिसाइलों की एक नई लहर लॉन्च कर दी और ताबड़तोड़ कहर बरबाया। इन हमलों के बाद ईरान ने कहा है कि जो मिसाइलें अभी तक दागी गई थी, वो तो स्क्रैप मिसाइलें थी। असली और खतरनाक हथियार जल्द ही दिखाएंगे। जी हां, ईरान ने रवा किया है कि खाड़ी देशों और अमेरिकी ठिकानों पर दागी गई मिसाइलें।

दरअसल उनका पुराना कबाड़ थी। लेकिन ईरान के इन हमलों में इसराइल को बड़ा नुकसान हुआ है। ईरानी सैनिक सूत्रों के अनुसार जवाबी कारवाही की पहली और दूसरी लहर में जिन मिसाइलों का उपयोग किया गया था वो 1990 और 2000 के दशक के शुरुआती तकनीक पर आधारित थी। ईरान का कहना है कि मिसाइलें अपनी एक्सपायरी डेट के करीब थी। इन्हें केवल दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को थकाने और उनकी लोकेशन ट्रेस करने के लिए इस्तेमाल किया गया। ईरान ने जानबूझकर अपनी सबसे आधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइलों को अभी तक सुरक्षित रखा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इसराइल ने तीसरी बार हमला किया तो फिर फतह टू जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें की जाएंगी।

ईरान का दावा है कि मिसाइलें ध्वनि की रफ्तार से 15 गुना ज्यादा तेजी से चलती हैं और दुनिया का कोई भी रडार इन्हें पकड़ नहीं सकता। ईरान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सत्ता परिवर्तन की बात कही है। जबकि ईरान ने ऐसा करने से मना कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने सत्ता परिवर्तन के बारे में ट्रंप को भेजे अपने संदेश पर कहा कि मिशन इंपॉसिबल है। हालांकि उन्होंने कहा कि वह तनाव कम करने में दिलचस्पी रखते हैं। लेकिन इस बारे में अभी तक कोई भी बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने दो टोक कहा कि पहले हमले रोके जाएं तभी बातचीत के बारे में विचार किया जा सकता है। सैयद अब्बास अरावची ने कहा कि इसराइल और अमेरिका का हमला उनके देश पर गैरकानूनी और नाजायज हमला है।

अराची ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर अपने देश पर अमेरिकी हमले के बाबत लिखा नेतन याू और ट्रंप का ईरान पर युद्ध पूरी तरह से बिना उकसावे के गैरकानूनी और नाजायज है। राक्षी ने यह भी कहा कि हमारी ताकतवर सेना उस दिन के लिए तैयार है और हमलावरों को वह सबक सिखाएगी जिसके वे हकदार हैं। उनके संदेश में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 2012 के एक ट्वीट का स्क्रीनशॉट था जिसमें कहा गया था कि अब जब ओबामा के पोल नंबर नीचे जा रहे हैं तो देखें कि वह लीबिया या फिर ईरान पर हमला करते हैं या नहीं वह हताश हैं।

स्क्रैप वाले इस बयान के बाद रक्षा विशेषज्ञों में बहस छिड़ गई है। कुछ का मानना है कि ईरान वास्तव में अपनी क्षमता छिपा रहा है। जबकि अन्य इसे केवल एक प्रोपगेंडा मान रहे हैं ताकि इसराइल आगे हमला करने से डरे। फिलहाल बहरीन और क़तर में गिरे मलवे की जांच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि वास्तव में पुरानी मिसाइलें थी या फिर आधुनिक।

हालांकि के समय में जैसी रणनीतियां बनती है, वैसे में ईरान का यह दावा सही भी साबित हो सकता है। मिडिल ईस्ट से इस वक्त एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है जिसने हर तरफ अब हड़कंप मचा दिया। खबर भी ऐसी है जिससे माना जा रहा है कि मिडिल ईस्ट में अब जंग थमने वाली तो बिल्कुल भी नहीं है। अब जंग और तेज होगी। खबर वर्तमान में सबसे बड़ी और बेहद संवेदनशील वैश्विक घटना है। कई अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी और सरकारी बयानों के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामन इजराइली हमले में मारे गए हैं। प्रेस टीवी के साथ-साथ ईरानी मीडिया ने भी इसकी पुष्टि कर दी है।

2026 के फरवरी के आखिरी में संयुक्त अमेरिका और इजराइल के सैन्य, हवाई हमलों में ईरान के प्रमुख सैन्य और राजनीतिक ढांचे को निशाना बनाए गए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनई की मौत हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इसकी कारवाई की पुष्टि की है और इसे न्याय बताया। जबकि इजराइयली अधिकारियों ने कहा कि हमले में उनके सहयोगी ढांचे और वरिष्ठ कमांडर भी मारे गए हैं।

बल्कि अब इजराइली मीडिया के साथ-साथ इजराइयली सेना ने भी अयातुल्लाह अली खामनाई की निधन की पुष्टि कर दी है। ईरानी सरकारी मीडिया ने भी बाद में खामनाई की मौत की पुष्टि की और इसके फलस्वरूप 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर दी गई है। यह कदम ना केवल ईरान में बल्कि पूरे पश्चिमी एशिया के राजनीतिक और सामाजिक माहौल में गहन प्रभाव पैदा कर रहा है।

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