ईरान के सबसे ताकतवर इंसान आया अली खामने अब नहीं रहे। अमेरिका और इजराइल ने एक साझा और बेहद सटीक ऑपरेशन में 86 साल के सुप्रीम लीडर को निधन की नींद सुला दिया है। ऐसे में आज हम ईरान के सुप्रीम लीडर आया अली खामनई के परिवार के बारे में जानेंगे।
लेकिन उससे पहले आपको दिखाते हैं खामनई की निधन का लाइव वीडियो जो कि अब सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। दरअसल यह हमला तब हुआ जब खामई अपने दो सबसे भरोसेमंद साथियों अली शमखानी और मोहम्मद पाकपुर के साथ एक गुप्त ठिकाने पर मीटिंग कर रहे थे।
ने इस हमले का फुटेज जारी कर दुनिया को हैरान कर दिया है। जिसमें दिखाया गया है कि कैसे 30 बंकर बस्टर बमों ने पूरे परिवार समेत खामनाई का नामोनिशार मिटा दिया। ईरान ने इस शहादत की तुलना इमाम हुसैन से की है और अमेरिका से भयानक बदला लेने की कसम खाई है। इजराइल की खुफिया एजेंसी काफी वक्त से खामनई के सलाहकार अली शमखानी का पीछा कर रही थी। जून 2025 में शमखानी एक हमले में बाल-बाल बचे थे। लेकिन वहीं उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई।
शनिवार को जैसे ही शमखानी खामनई से मिलने तेहरान के एक सेफ हाउस पहुंचे, अमेरिका और इजराइल को उनकी पक्की लोकेशन मिल गई। बिना वक्त गवाए आसमान से मौत बरसानी शुरू कर दी गई। शमखानी के जरिए ही दुश्मन खामन के पाताल वाले बंकर तक पहुंचने में कामयाब रहे। खामनाई को बचाने के लिए उन्हें जमीन के काफी नीचे एक अवैध बंकर में रखा गया था।
लेकिन अमेरिका ने इस बार कोई कसर नहीं छोड़ी। एक या दो नहीं बल्कि पूरे 30 बंकर बस्टर बम एक साथ गिराए गए। यह बम कंक्रीट की मोटी दीवारों को छेद कर अंदर फटते रहे। धमाका इतना जबरदस्त था कि बंकर के अंदर मौजूद खामोनई उनकी बेटी दामाद और मासूम पोते-पोतियों में से कोई भी नहीं बच सका। सॉम के फुटेज में उस जगह को धुआधुआं होते देखा जा सकता है।
खबरों के मुताबिक घोषणा करने से पहले ट्रंप को खामनई के शव की तस्वीरें और वीडियो दिखाए गए ताकि कोई शक ना रहे। तो चलिए अब बात कर लेते हैं आयातुल्ला अली खामन के परिवार के बारे में। आयतुल्लाह अली खामने ईरान के सर्वोच्च नेता थे। 1989 से लेकर 2026 तक उन्होंने देश की राजनीति, सेना, सुरक्षा और विदेश नीति [संगीत] पर अपना गहरा असर रखा। उनकी पत्नी का नाम मंसूर है। खोजास्ते हैं बगैर जादे हैं। वह एक धार्मिक परिवार से आती है और लंबे वक्त तक उनके साथ रही। अली खामन के कुल छह बच्चे थे। चार बेटे और दो बेटियां। सबसे बड़ा बेटा मुस्तफा खामन धार्मिक शिक्षित है और क्लीरिक के रूप में जाना जाता है। यानी धार्मिक पंडित के रूप में। दूसरे बेटे का नाम है मुस्तबा खामनई।
राजनीति और धार्मिक दोनों ही रूपों में काफी प्रभावी माने जाते रहे हैं। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि वह पिता के बाद ईरान की कमान संभालने वाले हैं। तीसरा बेटा है मसूद खामन। धार्मिक स्टडीज से जुड़ा रहा और अपने पिता के साथ काम करता रहा। चौथा बेटा है मैसम खामन। सबसे छोटा बेटा भी क्लीनरिक की भूमिका निभाता है और परिवार की धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाता है। बेटियों की बात करें तो बेटियों का नाम बोशरा और होला खामनई है। वो आमतौर पर मीडिया से दूर रहती थी और राजनीतिक गतिविधियों में कम दिखाई देती थी।
खामनानई का परिवार सिर्फ घर वाला परिवार नहीं था। उनके बेटे खासकर मुस्तफा खामन ईरान के धार्मिक राजनीतिक तंत्र में अहम भूमिका निभाते थे। परिवार ने ईरान के राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक नेटवर्क को लंबे समय तक सपोर्ट दिया।
