स्वर्ग का असली पता मिल गया? विज्ञान का सबसे डरावना सच !

क्या आपने कभी सोचा है कि जिस स्वर्ग या जन्नत की बातें हम बचपन से कहानियों और धर्म ग्रंथों में सुनते आ रहे हैं वो असल में अंतरिक्ष में कहीं मौजूद हो सकता है? क्या विज्ञान ने उस जगह का सटीक पता लगा लिया है जहां मौत के बाद इंसान की आत्मा जाती है? ।

हम हमेशा सोचते हैं कि विज्ञान और धर्म दो अलग-अलग पटरिया हैं जो कभी आपस में नहीं मिलती। लेकिन हार्व यूनिवर्सिटी में फिजिक्स पढ़ा चुके एक मशहूर वैज्ञानिक ने दावा किया है कि स्वर्ग [संगीत] कोई कोरी कल्पना या सिर्फ आस्था का विषय नहीं है। बल्कि यह हमारे इसी ब्रह्मांड में एक असली और भौतिक जगह है। उन्होंने ना सिर्फ स्वर्ग के वजूद की बात कही है बल्कि अंतरिक्ष में उसकी एकदम एग्जैक्ट लोकेशन भी बताई है। इस वैज्ञानिक का नाम है डॉक्टर माइकल गुलन। यह कोई आम इंसान नहीं है बल्कि हावर्ड में फिजिक्स के लेक्चरर रह चुके हैं और जानेमाने साइंस कम्युनिकेटर हैं। डॉक्टर माइकल का कहना है कि जिस जगह को हम स्वर्ग या पैराडाइज कहते हैं वो असल में कॉस्मिक होराइजन के उस पार मौजूद हो सकती है।

अब आप सोच रहे होंगे कि यह कॉस्मिक होराइजन क्या भला है? इसे बहुत आसान भाषा में समझिए। ब्रह्मांड इतना बड़ा है कि हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। एडविन हबल नाम के एक महान वैज्ञानिक ने एक नियम दिया था जिसे हबल लॉ कहते हैं। इसके मुताबिक कोई गैलेक्सी हमारी धरती से जितनी दूर है वो उतनी ही ज्यादा तेजी से हमसे दूर भाग रही है। ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है और वह भी लाइट की स्पीड से।

तो कॉस्मिक होराइजन अंतरिक्ष का वो आखिरी छोर या बॉर्डर है जहां तक की रोशनी हमारी धरती तक पहुंच सकती है। इसके पार देखना हमारे लिए नामुमकिन है। डॉक्टर माइकल के मुताबिक स्वर्ग इसी कॉस्मिक होराइजन के दूसरी तरफ मौजूद है। अगर हम दूरी की बात करें तो उन्होंने बताया है कि यह जगह हमारी धरती से करीब 46 अरब प्रकाश वर्ष दूर है। यह दूरी इतनी ज्यादा है कि इंसान की बनाई कोई भी मशीन या हमारी सोच भी वहां तक नहीं पहुंच सकती। लेकिन डॉक्टर माइकल इतने यकीन के साथ यह बातें क्यों कह रहे हैं? इसके लिए उन्होंने अल्बर्ट आइंस्टीन की थ्योरी का सहारा लिया।

आइंस्टीन की थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी कहती है कि इस कॉस्मिक होराइजन पर जाकर समय पूरी तरह से रुक जाता है। मतलब उस पॉइंट के बाद ना कोई बीता हुआ कल है, ना आज है और ना ही कोई आने वाला कल। वहां सिर्फ टाइमलेसनेस है। यानी समय का ठहराव है। और जरा सोचिए हमारे धर्म ग्रंथों में स्वर्ग की क्या परिभाषा है? एक ऐसी जगह जो अनंत है जहां समय का कोई अंत नहीं है। एक और दिलचस्प बात यह है कि हमारा ब्रह्मांड करीब 13.8 अरब साल पुराना है।

लाइट एक सेकंड में 3 लाख कि.मी. का सफर तय करती है। तो हम सिर्फ वहीं तक देख सकते हैं जहां से लाइट को धरती तक पहुंचने का समय मिला हो। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जहां तक हम नहीं देख सकते वहां ब्रह्मांड खत्म हो गया। डॉक्टर माइकल का कहना है कि कॉस्मिक होराइजन के पार एक पूरा का पूरा नया ब्रह्मांड मौजूद है और वहां ऐसी चीजें हैं जो शायद बिग बैंग से भी पहले की हैं। हालांकि डॉक्टर माइकल के इस दावे से सभी वैज्ञानिक सहमत नहीं हैं। कनेक्टिकट कॉलेज में एस्ट्रोनॉमी के प्रोफेसर डॉ. एलेक्स जिया निनानास का कहना है कि कॉस्मिक होराइजन कोई असली या फिजिकल जगह नहीं है जहां जाकर आप खड़े हो सके।

यह सिर्फ एक लिमिट है, एक दायरा है जिसके पार हम देख या कम्युनिकेट नहीं कर सकते। कई वैज्ञानिकों का मानना है कि स्वर्ग की बात करना मेटाफिजिक्स या दर्शनशास्त्र का हिस्सा है ना कि प्योर साइंस का। लेकिन डॉक्टर माइकल गुलन अकेले ऐसे वैज्ञानिक नहीं है जो विज्ञान और अध्यात्म को जोड़कर देख रहे हैं। कई बड़े वैज्ञानिकों का मानना है कि बिग बैंग को ही सब कुछ मान लेना और उसके पहले कुछ नहीं था। ऐसा सोचना विज्ञान के लिए भी सही नहीं है। तो आपको क्या लगता है?

क्या सच में हमारे ब्रह्मांड के उस अनदेखे हिस्से में स्वर्ग मौजूद है जहां समय रुक जाता है या फिर यह सिर्फ विज्ञान की एक जटिल थ्योरी को धर्म से जोड़ने की कोशिश है।

Leave a Comment