सोचिए आप एक बहुत बड़े बैंक के ब्रांच मैनेजर हैं। आपके हाथों से रोज करोड़ों रुपए का लेनदेन होता है। लेकिन अचानक एक दिन आपके मन में भयानक लालच आ जाए और आप सीधे सरकार के ही ₹590 करोड़ गायब करने का एक मास्टर प्लान बना लें। आप एक ऐसा शातिर जाल बुने कि सरकारी खजाने का पैसा चुपचाप आपकी पत्नी और साले की कंपनी में चला जाए और किसी को भनक तक ना लगे। और जब तक लोगों को पता चले तब तक आप बैंक की नौकरी छोड़कर गायब हो जाएं।
अब यह कोई हॉलीवुड की सस्पेंस या चोरी वाली फिल्म की कहानी नहीं है बल्कि हमारे ही देश के एक नामी बैंक की असली और चौंकाने वाली घटना है जिसने पूरे बैंकिंग सिस्टम को हिला कर रख दिया है। , इस फ्रॉड का मास्टरमाइंड कोई बाहर का हैकर नहीं बल्कि बैंक का अपना ही एक पूर्व ब्रांच मैनेजर है। आइए इस पूरे खतरनाक खेल को बहुत आसान भाषा में समझते हैं।
इस पूरे ₹590 करोड़ के फ्रॉड के पीछे मुख्य दिमाग चंडीगढ़ ब्रांच के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि का था। इस खेल में उसका साथ दिया बैंक के ही एक पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर अभय ने। इन दोनों ने मिलकर एक ऐसा प्लान बनाया जो पहली नजर में बिल्कुल परफेक्ट लग रहा था। उन्होंने हरियाणा सरकार के अलग-अलग विभागों के बैंक खातों से पैसा निकाला और उसे एक ऐसी कंपनी के खाते में डाल दिया [संगीत] जिसका नाम स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स था। अब आप सोचेंगे कि यह कंपनी किसकी थी? यह कंपनी किसी और की नहीं बल्कि रिभव ऋषि की पत्नी स्वाति सिंगला और उसके साले अभिषेक [संगीत] सिंगला की थी। इस कंपनी में 75% शेयर स्वाति के पास थे और 25% अभिषेक के पास। जांच में पता चला है कि इन सरकारी खातों से लगभग ₹300 करोड़ सीधे इस स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स [संगीत] कंपनी में ट्रांसफर किए गए। अपना काम पूरा करने के बाद रिभव और अभय दोनों ने करीब 6 महीने पहले चुपचाप बैंक से इस्तीफा दे दिया। इस शातिर चोरी का खुलासा बहुत ही हैरान करने वाले तरीके से हुआ। [संगीत] हरियाणा सरकार के एक विभाग ने बैंक से अपना खाता बंद करने और बचा हुआ पैसा दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने को कहा। जब बैंक के मौजूदा अधिकारियों ने प्रक्रिया शुरू की तो उनके होश उड़ गए। सरकारी रिकॉर्ड में जो रकम लिखी थी और बैंक खाते में जो असल बैलेंस था उन दोनों में जमीन आसमान का अंतर था। इसके बाद जब हरियाणा सरकार के दूसरे खातों की भी जांच की गई तो वहां भी करोड़ों रुपए गायब मिले। [संगीत] मामला सामने आते ही हरियाणा के एंटी करप्शन ब्यूरो यानी एसीबी ने तुरंत जांच शुरू कर दी। एसीबी के डायरेक्टर जनरल एएस चावला ने बताया कि उन्होंने मुख्य आरोपी रिभव ऋषि, उसकी पत्नी स्वाति, साले अभिषेक और पूर्व मैनेजर अभय चारों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में एक बहुत बड़ा झोल यह भी सामने आया कि IDFC फर्स्ट बैंक की ब्रांच [संगीत] चंडीगढ़ में थी, सरकारी विभाग हरियाणा में थे और जिस एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में पैसा भेजा जा रहा था, उसकी ब्रांच पंजाब के मोहाली में थी। तीन अलग-अलग शहरों के इस अजीब कनेक्शन ने अधिकारियों को भी हैरत में डाल दिया है। इस पूरे हंगामे और फ्रॉड के बीच बैंक ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। बैंक ने अखबारों में एक बड़ा बयान जारी करते हुए बताया कि उन्होंने जांच पूरी होने का इंतजार नहीं किया। उन्होंने कस्टमर फर्स्ट की अपनी पॉलिसी निभाते हुए हरियाणा सरकार को ₹583 करोड़ वापस लौटा दिए हैं। बैंक का कहना है कि यह उनके उसूलों की बात है और सरकार ने भी इस तेजी के लिए बैंक की तारीफ की है। तो यह थी उस ₹590 करोड़ के घोटाले की पूरी कहानी। [संगीत] यह घटना साबित करती है कि सिस्टम में बैठा कोई अपना ही जब बेईमानी पर उतर आए तो वह कितना बड़ा नुकसान कर सकता है। आपको क्या लगता है? क्या हमारे देश में बैंक अधिकारियों पर और भी कड़ी नजर रखनी चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा। अगर वीडियो पसंद आया हो तो लाइक और शेयर करें। फिलहाल मुझे दीजिए इजाजत। [संगीत] नमस्कार।
