70 साल में 700 फ़िल्में करने वाली इस अभिनेत्री को मनचाहा अंत तक नहीं मिला।

फिल्म इंडस्ट्री के आर्टिस्ट के लिए कहा जाता है कि चाहे उन्हें लाखों लोग पसंद करते हो लेकिन अपनी निजी जिंदगी में वो अकेलेपन से जूझते हैं और ऐसे कई आर्टिस्ट हैं जो अकेलेपन में ही दम तोड़ गए। इन्हीं में से एक आर्टिस्ट वो है जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी फिल्म इंडस्ट्री को दी।

उन्होंने 70 साल इस इंडस्ट्री में गुजारे और 700 से ज्यादा हिंदी, मराठी, गुजराती फिल्मों में काम किया। उन्होंने लीड एक्ट्रेस के रोल किए। उन्होंने स्टेप मदर के रोल किए, विलनिस रोल किए और उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा नाम कमाया। लिमका बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी उनका नाम दर्ज हुआ सबसे ज्यादा फिल्में करने के लिए।

लेकिन जब उनकी मौत आई तो वह घर में अकेली थी और दो दिनों बाद परिवार वालों को पता चला कि वह इस दुनिया से गुजर गई है। यह एक्ट्रेस और कोई नहीं बल्कि हमारी फिल्म इंडस्ट्री की नामी एक्ट्रेस ललिता पवार है। जिनकी डेथ 24 फरवरी 1998 में हो गई थी। बताया जाता है कि 90ज के दशक में जब ललिता पवार का काम कम हो गया था। उन्हें हेल्थ इश्यूज भी होने लग गए थे और दिखने में भी दिक्कत हो गई थी। तब वो मुंबई छोड़कर पुणे रहने चली गई थी। पुणे में उनका बंगला था। बस वही बंगला उनकी दुनिया थी। ललिता पवार अपने घर पर आने वाले लोगों से कहती थी कि वो ऐसी मौत चाहती है कि किसी को तकलीफ ना हो। बेड रिडन ना होना पड़े, दर्द नहीं देखना पड़े। बस चुटकी में मौत आ जाए और उन्हें अपने साथ ले जाए। ललिता पवार यह भी कहती थी कि मैंने अपनी पूरी जिंदगी फिल्म इंडस्ट्री को दी है। इसीलिए मैं चाहती हूं कि जब मैं जाऊं तो ललिता पवार जो स्क्रीन पर एक्ट्रेस है वैसी ही जाऊं। यानी कि मेरा पूरा मेकअप किया जाए। मुझे सजाया जाए और उसके बाद ही मेरा अंतिम संस्कार किया जाए। लेकिन मौत पर किसी का कंट्रोल कहां होता है। जिंदगी आप अपने हिसाब से प्लान कर सकते हो। बट मौत तो जब आनी होती है तभी आनी होती है। और ललिता पवार को भी नहीं पता था कि उनकी निधन ऐसे आएगी। 24 फरवरी ईयर 1998 को ललिता पवार के उस बंगलो से उनकी लाश मिली। उनकी लाश को तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया और पोस्टमार्टम किया गया।

डॉक्टर्स ने बताया कि ललिता पवार की डेथ तो दो दिन पहले ही हो गई थी। लेकिन किसी को पता ही नहीं चला कि वह इस दुनिया में नहीं रही। एक्चुअली ललिता पवार अपने बंगलों में कुछ दिनों से अकेली ही रह रही थी। क्योंकि उनके पति खुद हॉस्पिटल में एडमिट थे मुंबई में और उनका बेटा जय पवार वो भी मुंबई में अपने परिवार के साथ रहता था। कुछ ही दिनों बाद पति डिस्चार्ज होकर घर आने वाले थे। इसीलिए ललिता पवार घर पर ही थी। वो खुद भी काफी हेल्थ इश्यूज से जूझ रही थी। उनके थ्रोट कैंसर का ट्रीटमेंट चल रहा था और इसके अलावा भी 81 एज थी उनकी और कुछ इश्यूज उनकी हेल्थ में भी थे। 24 फरवरी को ललिता पंवार का बेटा जय पवार उनको कॉल करता है और उनसे बात करने की कोशिश करता है।

लेकिन घर पर कोई फोन ही नहीं उठाता है। बेटा परेशान हो जाता है। कुछ देर बाद फिर कॉल करता है। कोई कॉल नहीं लेता है। जिसके बाद बेटा ललिता पवार के एडवोकेट जो पुणे में ही रहते हैं उन्हें कहता है कि घर जाकर देखो मम्मी कहां है। कोई फोन नहीं पिक कर रहा है। एडवोकेट जब घर जाता है तो देखता है कि दरवाजा अंदर से बंद है और कोई खोल नहीं रहा है। जिसके बाद पुलिस को बुलाया जाता है।

पुलिस दरवाजा खोलती है और देखती है कि अंदर ललिता पवार बेसुद पड़ी है। जिसके बाद उन्हें पुणे के सेसॉन हॉस्पिटल ले जाया जाता है और डॉक्टर्स उन्हें डेथ डिक्लेअ कर देते हैं। ललिता पवार इस तरह से अकेलेपन में गुजर जाएगी यह किसी ने नहीं सोचा।

जिस एक्ट्रेस ने अपनी जिंदगी के 70 साल फिल्म इंडस्ट्री को दिए। उन्होंने साइलेंट फिल्मों से अपने करियर की शुरुआत की और आगे चलकर वो 90ज तक की फिल्मों में एक्टिव रही। लेकिन पर्सनल लाइफ में वह अकेली थी और अकेली ही चली

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