कोरबा में युवती की इज्जत के साथ हुआ खिलबाड़ डायल 112 का ड्राइवर भी शामिल।

यह सिर्फ कोरबा की एक रात की कहानी। कहानी नहीं है। यह देश की सच्चाई बनती जा रही है। हर दिन, हर हफ्ते, हर राज्य से और की खबरें सामने आ रही हैं। घटनाएं कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही हैं।

सवाल यह है कि आखिर लड़कियां और बेटियां सुरक्षित कहां है? छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से आई यह खबर झकझोर देने वाली है। 19 साल की एक युवती के साथ कथित तौर पर पांच लोगों ने सामूहिक किया। आरोपियों में डायल 112 सेवा की गाड़ी का ड्राइवर भी शामिल बताया जा रहा है। वही सेवा जो संकट में लोगों की मदद का भरोसा है। घटना 8 जनवरी की रात की है।

आरोप है कि पांच आरोपियों में से एक पीड़िता का परिचित था जिसने फोन कर उसे मिलने बुलाया था। इसके बाद युवती को बांकी मोगरा इलाके के एक सुनसान घर में ले जाया गया। जहां ड्राइवर और चार अन्य आरोपियों ने बारी-बारी से उसके साथ दरिंदगी की। वारदात के बाद आरोपी उसे बेहोशी की हालत में छोड़कर फरार हो गया। यह सिर्फ एक अपराध नहीं सिस्टम पर लगा एक गहरा दाग है। जहां वर्दी और आपातकालीन सेवाओं से सुरक्षा की उम्मीद की जाती है।

वहीं उसी तंत्र से जुड़ा एक नाम जब दरिंदगी में सामने आए तो भरोसा ही नहीं इंसाफ भी घायल होता है। पीड़िता किसी तरह खुद को संभालते हुए अपने घर पहुंची और परिवार को पूरी घटना बताई। परिजन तुरंत उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे और फिर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार को सिविल लाइंस थाना में इस मामले की शून्य एफआईआर दर्ज की गई जिसे बाद में जांच के लिए बांकी मोगरा थाना स्थानांतरित किया गया। कोरबा के पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने बताया कि डायल 112 सेवा के निजी ड्राइवर सहित दो आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है। जबकि तीन अन्य आरोपियों की तलाश अब भी जारी है। थाना सिविल लाइन क्षेत्र में एक जीरो का मामला दर्ज किया गया। एक लड़की आई थी जिसके द्वारा धारा 370 बीएएनएस के तहत अपराध दर्ज होने की बात बताई गई।

जिस संबंध में अपराध दर्ज किया गया है और साथ ही दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। एक तरुण और एक भवन साहू करके। इनके द्वारा जो बताया गया प्राथमिक तौर पर उसमें पांच लोगों के शामिल होने की बात बताई गई है। इस एक मामले के पीछे छिपी सच्चाई और भी डरावनी है। देश के अलग-अलग हिस्सों में आए दिन ऐसी खबरें सामने आ रही हैं। कहीं नाबालिग बच्चियां, कहीं कॉलेज छात्राएं, कहीं कामकाजी महिलाएं, दिन हो या रात, घर हो या सड़क, स्कूल हो या अस्पताल, किसी जगह सुरक्षा की गारंटी नहीं दिखती।

पुलिस आंकड़े और सरकारी दावे चाहे जो कहे जमीनी हकीकत यह है कि अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं। सवाल सरकार से है अगर सख्त कानून है तो डर क्यों नहीं है? अगर योजनाएं हैं तो सुरक्षा क्यों नहीं है और अगर न्याय व्यवस्था मजबूत है तो पीड़िताएं आज भी खामोश क्यों कर दी जाती हैं? कोरबा मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लिया है और बाकी की तलाश जारी है। लेकिन यह कार्यवाही काफी नहीं है। बलात्कार, यौन हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अपराध आज किसी एक राज्य या शहर की समस्या नहीं रह गई।

यह एक राष्ट्र संकट बन चुकी है। हर नई घटना पिछली से ज्यादा सवाल छोड़ जाती है। क्या डर खत्म हो गया है? या फिर कानून सिर्फ कागजों में सख्त है। जमीन पर नहीं। जब तक हर मामले में तेज, पारदर्शी और कड़ी सजा नहीं होगी, तब तक ऐसे अपराध रुकने वाले नहीं हैं। अब सवाल यह नहीं कि अगली घटना कहां होगी? सवाल यह है कि अगली बारी किसकी होगी? अगर हर बलात्कार के बाद सिर्फ एफआईआर, गिरफ्तारी और औपचारिक बयान ही जवाब है तो फिर सरकारें किस बात की सुरक्षा का दावा करती हैं?

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