कभी-कभी हकीकत किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से भी ज्यादा हैरान करने वाली होती है। कर्नाटक के गोकर्ण की एक दुर्गम पहाड़ी पर पुलिस ने एक ऐसी गुफा में एक विदेशी महिला को उसकी दो नन्ही बच्चियों के साथ रहते हुए पाया जहां इंसानों का पहुंचना भी मुश्किल है और जिंदा रहना और भी ज्यादा। यह कोई साधारण मामला नहीं है ना ही यह सिर्फ एक रेस्क्यू ऑपरेशन की कहानी है बल्कि एक मां की आध्यात्मिक तलाश, कानूनी पेंच और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी एक बेहद संवेदनशील स्टोरी है।

9 जुलाई 2025 की शाम करीब 5:00 बजे गोकर्ण पुलिस का एक सामान्य गश्ती दल रमती हिल इलाके में पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने निकला था। लेकिन इस रूटीन पेट्रोलिंग ने एक अनोखा मोड़ ले लिया। जब जंगल के भीतर एक खतरनाक और लैंडस्लाइड प्रवण जोन में मौजूद गुफा से कुछ हलचल दिखी तो इंस्पेक्टर श्रीधर, एसआर और उनकी टीम ने जांच की और वहां जो देखा वो उससे हैरान रह गए।

गुफा के अंदर रह रही थी एक रूसी महिला 40 वर्षीय नीना कुटीना उनके साथ थी दो छोटी बेटियां प्रेमा सिर्फ छ साल की और आमा महज 4 साल की। नीना ने बताया कि वह गोवा से गोकर्ण सिर्फ एक कारण से आई थी। आत्मिक शांति की तलाश में। उनका कहना था कि वह शहरी जीवन की भीड़भाड़ से दूर ध्यान और साधना करना चाहती थी। इसीलिए इस गुफा को अपना आश्रम बना लिया। लेकिन पुलिस के लिए सवाल था क्या यह जगह दो मासूम बच्चियों के लिए सुरक्षित है? इस इलाके में पिछले साल बड़ा भूस्खलन हो चुका है और वहां जहरीले सांपों सहित खतरनाक वन्य जीव भी पाए जाते हैं।

पुलिस ने पहले समझाया फिर महिला को मनाया और आखिरकार सफलतापूर्वक मां बेटियों को गुफा से सुरक्षित नीचे लाया गया। महिला के अनुरोध पर उन्हें कुमटा तालुक के बंकी कोडला गांव में स्वामी योगत्ना सरस्वती के आश्रम में भेजा गया है। जहां 80 वर्षीय महिला संत स्वयं महिलाओं की सेवा करती हैं। मामला यहीं नहीं रुका। जब नीना कुटीना से वीजा और पासपोर्ट की जानकारी मांगी गई तो वह टालमटोल करने लगी। बाद में काफी समझाने और समझौते के बाद उन्होंने माना कि उनके दस्तावेज शायद गुफा में ही कहीं खो गए हैं। एक संयुक्त तलाशी अभियान चलाया गया और पासपोर्ट और वीजा डॉक्यूमेंट्स जंगल में मिले।
जांच में सामने आया है कि नीना का बिजनेस वीजा 2017 में ही समाप्त हो चुका था और 2018 में मिली एग्जिट परमिट के बावजूद वो भारत में अवैध रूप से रह रही थी। इस वीजा उल्लंघन को देखते हुए महिला और उनकी बेटियों को करवार में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित वुमेन रिसेप्शन सेंटर में भेजा गया है। जहां वह फिलहाल सुरक्षा में है। अब उत्तर कन्नड़ में पुलिस अधीक्षक ने एफआरआरओ बेंगलुरु को पत्र लिखकर महिला और उसके बच्चों को रूस डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जल्द ही परिवार को बेंगलुरु में एफआरआरओ अधिकारियों के सामने पेश किया जाएगा और आगे की कार्यवाही तय की जाएगी।
एक मां की तलाश तो आत्मिक शांति की थी। लेकिन रास्ता ऐसा चुन लिया जो ना सिर्फ कानून के खिलाफ था बल्कि बच्चों की जान पर भी भारी पड़ सकता था। अब अगली मंजिल क्या होगी यह तय करेगा कानून। लेकिन इस कहानी ने कई सवाल छोड़ दिए हैं। खासकर तब जब एक आस्था बच्चों की सुरक्षा से टकरा जाए।
