एयर इंडिया का बोइंग विमान से दुर्घटना का शिकार हुआ था पिछले महीने और अब उसकी रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट आने में करीब एक महीने लग गए। ब्लैक बॉक्स की जांच हुई और अलग-अलग जो भी पैरामीटर होते होंगे उनको फॉलो करते हुए आधी रात को आधी रात को रात को 2:30 बजे एक रिपोर्ट जारी की जाती है और रिपोर्ट में यह कहा जाता है कि पायलट ने फ्यूल ऑन ही नहीं किया था। अ फ्यूल ऑन करना। अगर किसी भी पायलट ने ट्रेनिंग की है और वह विमान के कॉकपेट में बैठता है तो सबसे पहले वो यही चेक करता है कि जो फ्यूल का स्विच है उसने ऑन किया है या नहीं किया है। लेकिन रिपोर्ट यह कह रही है कि दोनों पायलट्स ने ऑन ही नहीं किया।
चलिए हम मान लेते हैं कि एक पायलट से यह गलती हो सकती है। क्या दोनों ने सचमुच ऐसा ही किया? चेक नहीं किया। वह दोनों कर क्या रहे थे? यह तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट के पीछे भी बहुत सारी ऐसी मिस्ट्री है जिस पर लोग कयास लगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है। आज इन सब चीजों को धीरे-धीरे एक-एक करके डिकोड करने की कोशिश करेंगे। मेरे सहयोगी पंकज प्रसून मेरे साथ हैं। पंकज ये जो रिपोर्ट आई है यह रिपोर्ट आपने भी पढ़ी। और इसके अलावा जो पायलट एसोसिएशन है एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया उसने भी अपनी एक रिपोर्ट दी है और उसकी रिपोर्ट कुछ अलग कहानी कहती है। सरकार की रिपोर्ट कुछ अलग कहानी कहती है।
इस पूरे मामले में इतनी कास्परेसी क्यों हो रही है? अच्छा अनुपम मैं आपसे और दर्शकों से चंद सवाल पूछता हूं। ईमानदारी से दिल पर हाथ रखकर जवाब दीजिएगा। आखिरी बार आपने किसी भी तरह की सरकारी रिपोर्ट को रात 2:30 बजे जारी होते कब देखा था? शायद कभी नहीं। कोई भी गवर्नमेंट रिपोर्ट आजाद भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि कोई सरकारी रिपोर्ट जारी हुई है रात को 2:30 बजे। दूसरा सवाल इस प्रीिलिमिनरी रिपोर्ट में किसी ऑथराइज सिग्नेटरी कोई क्यों नहीं है? हम जब भी किसी तरह की रिपोर्ट जारी होती तो किसी ना कोई ना कोई सिग्नेचर करके वो जारी करता है ना। हम आप बताइए क्यों नहीं किसी का सिग्नेचर है प्राथमिक जांच रिपोर्ट पर? नहीं जवाब इस देश को देना है।
तीसरा 2:30 बजे वह वक्त है जब अमेरिका में ऑफिस आवर शुरू होता है और भारत के लोग गहरी नींद में रहते हैं। क्या अमेरिका को ध्यान में रखकर यह रिपोर्ट जारी किया गया? हम अच्छा जब आप मैं इसलिए ये सवाल कर रहा हूं जब आप ये बात कह रहे हैं तो कुछ मैंने भी पढ़ा है तो मैं चाहता हूं कि मैं भी दर्शकों के सामने वो बात रखूं। अब इसमें क्या सच्चाई है? क्या नहीं है यह तो बेहतर सरकार बताएगी और बोइंग बताएगा। कुछ लोग यह कह रहे हैं कि बोइंग बड़ा नाराज चल रहा था भारत की सरकार से और उसको खुश करने के लिए 2:30 बजे ये रिपोर्ट जारी की गई रात में और सबसे महत्वपूर्ण बात कि भारत सरकार रिपोर्ट जारी करती उससे पहले वाशिंगटन पोस्ट में इसके ये लीक रिपोर्ट छपने लगी थी।
मैंने पहली रिपोर्ट भारत सरकार ने जारी की वहां से नहीं पढ़ा। पहला वाशिंगटन पोस्ट से पढ़ा है। रात को 1:30 बजे 2:30 बजे रिपोर्ट जारी करती है भारत सरकार और उससे पहले यह किसी विदेशी मीडिया में लीक हो जाता है। मजाक है देश के साथ? कभी सोचा है ऐसा होता है कभी? पंकज जी आपको थोड़ी देर चाहते हैं। देखिए इस पूरे मामले में जो सवाल उठ रहे हैं पहले हम वह सवाल बता देते हैं। सवाल यह उठ रहा है कि रात को 2:30 बजे रिपोर्ट क्यों जारी की गई? जब भारत के लोग सो रहे थे और अमेरिका में ऑफिस का टाइम था।
उस वक्त ये रिपोर्ट क्यों जारी हुई? प्राथमिक जांच रिपोर्ट में जो अभी तक बातें सामने आई। प्राथमिक जांच रिपोर्ट में किसी का हस्ताक्षर क्यों नहीं है जो पंकज जी बता रहे थे? मतलब यह सारे वो सवाल हैं जिसका जवाब लोग ढूंढ रहे हैं। पूछ रहे हैं सरकार से। भारत में रिपोर्ट जारी होने से पहले यह रिपोर्ट विदेशी मीडिया में कैसे लीक हो जाती है? क्या भारत सरकार पहले विदेशी मीडिया को देती है और फिर रिपोर्ट जारी करती है? विदेशी मीडिया से अप्रूवल लेती है? ये तमाम ऐसे सवाल हैं। हादसे के 1 महीने बाद ब्लैक बॉक्स डिकोड हुआ। क्यों हुआ? यह भी एक गंभीर सवाल है। अब हम वापस आते हैं पंकज जी के पास और जैसे एक और बात बता देते हैं कि पिछली बार सही बात है कि कभी नहीं सुना गया कि आधी रात को आधी रात को कोई रिपोर्ट जारी हुआ और यह भी नहीं सुना गया कि दोनों इंजन चंद सेकंड के भीतर एक के बाद एक ही बंद हो जाएं। यह ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब सरकार से लोग पूछ रहे हैं।
अब हम आते हैं पंकज जी, मैं आपको एक रिपोर्ट दिखाना चाहता हूं। यह है एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया। इन्होंने पांच पॉइंट ऐसे छह पॉइंट ऐसे रखे हैं जो यह कहते हैं और ये क्या कहते हैं? ये कहते हैं कि हमें इस रिपोर्ट पर डाउट है। विद अस। या गुड इवनिंग। फर्स्टली वी आर सरप्राइज़्ड दैट द स्टेटमेंट वाज़ रिलीज़्ड इन द मिडिल ऑफ़ द नाइट एट अराउंड 1:30 एंड इट कैरीज़ नोबडीज़ सिग्नेचर। नोबडी इज़ रेस्पोंसिबल फॉर दैट। इट्स अ वेरी इरिस्पांसिबल वे ऑफ़ पुटिंग आउट अ सच एन इंपॉर्टेंट रिपोर्ट। वी हैव ऑलवेज मेंटेंड दैट यू शुड हेव सम काइंड ऑफ़ ट्रांसपेरेंसी। एंड दी अह पर्सनल इनवॉल्व्ड इन दीज़ इन्वेस्टीगेशन शुड बी स्पेशलिस्ट। दे शुड बी पायलट्स। दे शुड बी इंजीनियर्स, देयर शुड बी अदर फैट्स ऑफ़ सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट्स। हु शुड कम इन एंड कंट्रीब्यूट और शुड बी इनवाइटेड टू कंट्रीब्यूट। नाउ यू हैव पुट आउट समथिंग व्हिच इज मोर कन्फ्यूजिंग दैट वन इट स्टार्टेड ऑफ एंड इट क्लियरली इंडिकेट्स दैट द पायलट इज़ एट फ़ौल्ट विदाउट टेलिंग दैट द पायलट इज़ एट फ़ौल्ट एंड दी एंटायर मीडिया हैज़ टेकन इट अप सो मच सो दैट पीपल आर इवन सेइंग इट्स अ डेलीबरेट एक्ट ऑफ साइबोटाज अह स्लश यू नो सुसाइड दिस इज़ व्हाट वी वर सेइंग इज़ इरिस्पांसिबल एंड दिस वुड लीड टू अ फर्दर स्पेकुलेशंस अमंग द पब्लिक। उन्होंने कहा है कि AI171 का जो एक्सीडेंट हुआ और उसमें जो रिपोर्ट आई है उस पर हमें डाउट है। यह जो आप रिपोर्ट देख रहे हैं वो आपके पास भी रिपोर्ट पहुंच चुकी होगी जिसमें कहा गया है कि लैक ऑफ ट्रांसपेरेंसी ऑफ इन्वेस्टिगेशन ये कहा गया है।
उन्होंने कहा गया है कि वॉल स्ट्रीट जर्नल को यह लीक हुई जुलाई 10 को आर्टिकल जो रिपोर्ट जारी की गई है वो रिपोर्ट दरअसल 10 जुलाई को ही वॉल स्ट्रीट जर्नल में छप चुकी थी। इसके अलावा कुछ बुलेटिन मेंशन किए गए हैं। इसके अलावा जब पायलट को इसमें दोषी माना गया है, वह पायलट एसोसिएशन एसोसिएशन कहता है कि इसका टोन गलत है। पायलट को इसमें दोषी ठहराया जाना इसका टोन गलत है। पंकज जी के पास चलते हैं। छह पॉइंट में सरकार के इस रिपोर्ट की पूरी कलई खोल कर रख दी गई है। और मैं बताता हूं आपको। यह पूरा रिपोर्ट लगता है पढ़ने से। मैंने खुद पढ़ा है और खास करके 12 नंबर पॉइंट मैंने आप शेयर भी किया है इस चीज को।
ये पूरा लैंग्वेज इस तरह का है। मानो पायलट जो है और कोपायलट उनप सारा दोष मढ़ने की कोशिश है। और बीबीसी रिपोर्ट जारी होने के एक आध घंटे बाद पूरा पायलटों को आरोप लगाते हुए एक रिपोर्ट जारी कर देती है। अपने यहां वो यह दोनों पायलट के बारे में पता है। मैं देख रहा था कि यह कौन है? क्या वो गलती कर सकते हैं कि नहीं? 10,000 आवर्स प्लाइंग एक्सपीरियंस था दोनों को मिलाकर। हम और अंतिम शब्द याद कीजिए जो इस रिपोर्ट मेंशंड है कि एक पायलट जो है तुरंत कहता है कि तुमने इंजन क्यों बंद किया? और विदिन फ्रैक्शन ऑफ सेकंड इसके सवाल खत्म होने के पहले को पायलट कहता है मैंने नहीं बंद किया है और उसके बाद ये क्रैश होता है। बताइए मरने के पहले जो स्पॉनटेनियस रिमार्क्स है कि मैंने बंद नहीं किया है। कोई साजिश करता है इस तरह सोच के बता सकता है। बोल बोलता है। अच्छा नहीं जो भी ह्यूमन साइकोलॉजी पढ़ने वाले हैं उनसे पूछिए। वो बोलेगा एक मान लिया करे। अरे तुमने ये क्यों किया? मैंने नहीं किया है। अब्राहम मर गए।
हम अब यह बताइए यह पहले से प्री प्लान होगा। साजिश पायलट की होगी। मैं नहीं मानता और अगर साजिश करना होता ना तो वो मरने के पहले तीन बार मेडी मे करके नहीं बोलते कि थ्रस्ट नहीं मिल रहा है। और सवाल तो ये पायलट को दोष देना बंद कीजिए। पहली बात सेकंड में ये सब कुछ हुआ। जब 10 सेकंड में सब कुछ हुआ तो उसने मेडे का कमांड दिया कि वो आपस में बातचीत कर रहे थे। दोनों में तो बहुत विरोधाभास बयान है ना। दोनों में बहुत विरासभास दिखता है। नहीं देखिए वो मैं टाइम बताता हूं। 8:08 में सारा कुछ हुआ है। सिर्फ सेकंड्स का फर्क है। इसलिए जो भी मैं बोलूंगा 8:08 हो जाए। 8:08 में 39 सेकंड्स में लिट ऑफ होता है। 42 सेकंड में मैक्सिमम स्पीड 180 नोट्स इंडिकेटेड स्पीड मीटर पे बताता है। 43 यानी 2 सेकंड बाद इंजन वन फेल मूव्ड अप एंड रन कट ऑफ। मतलब समझिए कि 39 में ये रन कर रहा है। 42 पे ये कर रहा है। 43 में पहला इंजन बंद होता है। सेकंड्स सब 8:08 हुआ। और 44 में इंजन टू स्विच ऑफ होता है। एक सेकंड के बाद एक इंजन दूसरा इंजन। 47 में आरटी इंगेज किया जाता है तुरंत नीचे और अचानक फिर से 52 में इंजन वन फ्यूल स्विच मूव फ्रॉम कट ऑफ टू रन। फिर आता है कट ऑफ मतलब वहां स्विच मतलब कि बंद होना होता है। मैं आम दर्शकों की भाषा में बता रहा हूं। और रन मतलब दोबारा चालू होना। मतलब 43 सेकंड में बंद हुआ। पहला इंजन 44 सेकंड में 8:8 मिनट 44 सेकंड में दूसरा इंजन बंद हुआ 8:52 पर पहला इंजन फिर से रन करने लगता है 54 सेकंड्स में एपीयू इंट डोर्स ओपन ये लिखा हुआ है उस रिपोर्ट में 856 में ये जो आप बात कर रहे हैं 54 टू 56 दो सेकंड के बीच में वो पायलट बोलता है इंजन क्यों बंद किया दूसरा कहता है नहीं बंद किया और एक सेकंड बाद मतलब कि 89 8:09 और 5 सेकंड में मेड डे कॉल बाय वन पायलट करता है और 11 8:09 11 सेकंड में प्लेन क्रैश कर जाती है। ये है पूरा टाइमलाइन जो कि रिपोर्ट में बताया गया है। अच्छा मुझे एक चीज समझ में नहीं आया कि पहला इंजन बंद हुआ। दूसरा इंजन बंद हुआ। फिर चालू हुआ है पहला इंजन। रन स्टेट में है। देखिए मैं बार-बार यह बोल रहा हूं कि पायलट इतने बेवकूफ नहीं है कि ऑफ इंजन पहले ऑफ करें और फिर ऑन करें और जाके वो खुद मर जाए। और ये एक्सपीरियंस पायलट थे।
इंटरनेशनल एक्सपीरियंस था। मैं देख रहा था दोनों का। मैं बार-बार बोल रहा हूं कि 32 सेकंड्स का यह पूरा घटनाक्रम है। चार और पांच सेकंड जब हुआ तो पहला और दूसरा इंजन बंद हुआ और 13 सेकंड में फिर से इंजन एक चालू होता है। मैं पूरा आपको टाइमलाइन भेज दूंगा जो इस रिपोर्ट में लिखी है। इसलिए ये पायलट को देखिए। प्लीज दोष देना बंद कीजिए। पायलट की गलती नहीं है। आज वो नहीं है इस दुनिया में। उनकी तरफ से सफाई देने वाला नहीं है कोई। लेकिन याद रखिए कि उनका परिवार है और वह जब इस तरह की बातें सुन रहा है ना वो सब्रवाल साहब जो थे मेन पायलट कभी उनकी हिस्ट्री देख लीजिए। मुझे क्या लगता है मैं जो मैं आपको ईमानदारी से बता रहा हूं अनुपम कि दुनिया में आप कहीं भी जाइए और पता कीजिए कि ब्लैक बॉक्स रिकवर होने के बाद उसे डिकोड करने में कितना समय लगता है? किसी भी सिविल एिएशन एक्सपर्ट से पूछिएगा किसी भी से। वो बोलेंगे ज्यादा से ज्यादा 24 से 48 घंटे। हम हमारे यहां एक महीने लगे हैं। 1 महीने अब आई है उसकी रिपोर्ट। अभी मैं मैं आप आपको उस पॉइंट की तरफ आपका ध्यान खींचना चाहता हूं जो सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं। हम उस पर भी चाहते हैं कि उस पर भी अपने दर्शकों को जानकारी देते रहे। मैं देख रहा हूं एक पोस्ट जिसमें लिखा गया है कि जर्मन विंग्स फ्लाइट 9525 एक घटना हुई थी।
एक फ्लाइट दुर्घटना हुई थी 24 मार्च 2015 जब को पायलट आंद्रयास लुबज ने सुचारू रूप से विमान को फ्रेंच पाल में दुर्घटनास्त कर लिया था वो तो वो तो सुसाइड मिशन में था वो तो देखिए इससे उसका कोई मतलब नहीं वो क्या था कि पायलट कुछ अपना मेंटल ट्रॉमा था कनेक्शन जोड़ मेंटल ट्रॉमा था और उसने जाके क्रैश करवा दिया यह तो पायलट कोई एक जाके क्रैश करवा दे वो अलग बात है लेकिन इस तरह इंजन सेलवर हो अगर किसी को सुसाइडर मिशन पर रहना भी होता ना, अगर मरना भी होता है, वो जाकर टकरा देता किसी चीज से। यह पहला इंजन बंद करो, खोलो, फिर दूसरा इंजन बंद करो। फिर ऐसे नहीं करता है कोई सुसाइडर मिशन।
यह साफसाफ मैं बताऊं आपने जो पहली बार जो कहा था ना कि बोइंग अमेरिकी कंपनी है। अमेरिका लगातार प्रेशर बना रहा है और मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि भारत के अंदर का कोई आदमी उस प्रेशर में आ गया है और इसलिए 2:30 बजे रिपोर्ट जारी की गई है। अमेरिका के सूटेब हुए टाइमिंग है और भारतीय परटों को दोषी देकर पूरा यह मामला रफादफा करने की कोशिश है और बोइंग में जो कमियां हैं हम उसको कवर अप करने की कोशिश है। मैं बार-बार सुबह से ये बात बोल रहा हूं कि ये सबसे महंगा कवर अप ऑपरेशन हो सकता है भारत के एिएशन इतिहास का। हम्म और ये कवर अप ऑपरेशन है और ये जो तो ये तो भारत कौन जवाब लेगा? लोगों की जान से खिलवाड़ है। बिल्कुल 270 जाने चली गई हैं। अमेरिकी कंपनी है बोइंग उसका प्रेशर मल्टी मिलियन डॉल इन्वेस्ट करने के लिए तैयार है कि हमारे बोइंग की बदनामी ना हो। और फिर इस तरह की रिपोर्ट आती है जो कि वेग रिपोर्ट है। कई सवालों का जवाब नहीं देती। आज तक दोनों इंजन कभी फेल नहीं हुआ है बोइंग का।
एक महीने बाद ब्लैक बॉक्स रिकॉर्ड हुआ है। मीडिया विदेशी मीडिया पहले लीक कर दी जाती है। किसी का सिग्नेचर नहीं आता है कि ताकि कल को यह रिपोर्ट गलत भी निकले ना तो कोई यह नहीं कहे कि इसके साइन से जारी हुआ। दिलचस्प यह है कि जो हमारे नागरिक उड्डयन मंत्री हैं उनका एक टीवी चैनल पर बयान चल रहा था जिसमें वह कह रहे हैं कि अभी हम इस मामले की जांच करवा रहे हैं। रिपोर्ट की जांच करवा रहे हैं। ये अब बताइए पहले सरकार रिपोर्ट लाती है। फिर उस रिपोर्ट की जांच करती है। वो फिर जांचकर्ता की फिर से जांच होगी कि उसने सही से जांच की है कि नहीं। मैं बोल रहा हूं ना ये कवर ऑफ ऑपरेशन है। ये ढकने का मैं बताऊं ईमानदारी से कुछ चंद सवाल जो भारत के लोगों को कभी नहीं मिल सके। मौलाना साद कहां गया? आज तक पता चल सका वो कवर ऑफ ऑपरेशन था। हर्षद मेहता शेर घोटाला कांड उसने जो प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ब्लेम लगाए थे कि फलाने फलाने ने पैसा दिया। हर्षद मेहता मर गया। उस रिपोर्ट का क्या हुआ? आज तक नहीं आया। कुछ रिपोर्टें इस देश में कभी जारी नहीं होती। और खास करके जब मास्टर्स और बड़े लोग इनवॉल्वड हो। हम जैसे छोटे लोग को दबा के रास्ते से हटा के बहुत कुछ किया जा सकता है। और खास करके जब मल्टी मिलियन डॉलर्स का स्टेक है और मैं आपको एक महत्वपूर्ण बात बताता हूं। सीआईए की एजेंट साउथ एशिया एक्सपर्ट उसने हादसे के दो दिन पहले कहा था कि भारत में एक बड़ा विमान हादसा होने वाला है। उसका ट्वीट अवेलेबल है। और आज तक पूछताछ नहीं हुई। किसी ने जहमत नहीं उठाई।
मालिक से कौन पूछता है? यहां तो हम जैसे नौकर है ना जो मर जाते हैं। क्या होता है? 270 टीवी मीडिया तुम एक काम करो। तुम सिर्फ यह खबर दिखाओ कि हाय हाय देखो बेचारे की बेटी मर गई। हाय हाय देखो नई नई शादी हुई थी। अभी तक मां से वो हाथ हाथ की मेहंदी नहीं हुई। इसी चीज में तो असली चीज तो कोई पूछ ही नहीं रहा है। कि क्या हुआ? कैसे हुआ? और पायलट की गलती नहीं थी। जितने भी एिएशन एक्सपर्ट है सारे कह रहे हैं कि नहीं कुछ तो झोल है दया। और कौन है वह भारत के अंदर मौजूद शख्सियत जो बिक गया है जो दबाव में आ गया है। कितने डॉलर्स की डील हुई है वो इनको बचाने के लिए और अपने मरे हुए पायलट जो जिनको शहीद का दर्जा मिलना चाहिए था उस पर इल्जाम देने के लिए वो कभी नहीं केस लड़ेगा और इस तरह इस पूरे मामले को कवर अप कर दिया जाएगा। तो ऐसे इल्जाम म रहे हैं कि अब यह बताइए कि उस पायलट का अपना परिवार होगा। उसको मतलब इस वक्त तो मुआवजा मिलना चाहिए था। इंश्योरेंस कंपनी में क्लेम की की होगी परिवार ने। वह सब कुछ रुक जाएगा इस रिपोर्ट के देखने के बाद। वो तो इसलिए तो मैं और मैं एक और पॉइंट बता रहा हूं। और एक और पॉइंट बता रहा हूं।
विजय रूपाणी वाला पॉइंट कोई नहीं बोल रहा है। विजय रूपाणी उस फ्लाइट में सवार थे। और इसके बाद सोशल मीडिया पे जाइए। एआई 171 क्रैश विजय रूपाणी और देखिए कैसे-कैसे सवाल हो रहे हैं वहां पर। मैं देखिए मैं बार-बार बोल रहा हूं कि जितने भी सिविल एिएशन एक्सपर्ट्स से मैं सुबह से सुन रहा हूं। सब ने कहा कि ये रिपोर्ट किसी मैच्योर ने नहीं बताया। और मैं एक बताऊं इसमें कोई एक्सपीरियंस पायलट नहीं था इस पूरे रिपोर्ट को तैयार करने में। कोई लाइन पायलट भी नहीं था। हम पूछे जाके क्यों नहीं था? क्योंकि एक टीम बैठती है ना पूरी रिपोर्ट को तैयार करने के लिए। इतना महत्वपूर्ण बात है यह कि पूरी जांच रिपोर्ट बन रही है और पायलट को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है और उस लाइन का कोई व्यक्ति इस जांच रिपोर्ट को तैयार करने में नहीं है। अब जवाब दीजिए। अब ये जवाब चंद सवाल है। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। और इस सवाल का जवाब हैं। क्या आपको लगता है? मैं अपने दर्शकों से ही अब यह सवाल छोड़ कर जाता हूं उनके ऊपर ही कि क्या आपको लगता है दर्शकों कि एक ऐसा पायलट जिनके पास मतलब एक हर पायलट के पास कम से कम 5000 घंटा फ्लाइट उड़ाने का एक्सपीरियंस था। दोनों पायलट को देखें तो 10,000 घंटे से ज्यादा का अनुभव था इनके पास।
बड़े-बड़े विमान मतलब एआई 171 से भी बड़े विमान में को पायलट की जिम्मेदारी निभा चुके थे। और फिर वो ऐसी गलती करेंगे कि एक दर्शक ने एक और सवाल एक दर्शक ने एक और सवाल पूछा है। कहा कि रिपोर्ट में लिखी हुई है कि 8:08 42 सेकंड 12 कंट्रोल वे मूव टू कट ऑफ लेकिन उससे पहले ही आरएटी इज ऑलरेडी डिप्लॉयड इमीडिएटली आफ्टर टेक ऑफ नीचे आरटी को कैसे पता था कि वहां पर कट ऑफ होने वाला है? वह किसी दर्शक ने पूछा है। बहुत सारे सवाल हैं। देखिए कभी इसका जवाब ढूंढने की कोशिश कीजिए। बहुत कुछ मिलेगा इसमें और मैं बार-बार ये बोल रहा हूं कि ये कवर अप ऑपरेशन नहीं होना चाहिए।
इसकी ईमानदारी से जांच होनी चाहिए। चलिए पंकज जी बहुत-बहुत शुक्रिया आपका हमारे साथ जुड़ने के लिए। अब दर्शकों के ऊपर यह सवाल मैं छोड़कर जाता हूं। आपको क्या लगता है? बहुत फेयर तरीके से यह रिपोर्ट तैयार की गई है। क्या आपको इस रिपोर्ट पर यकीन है? देखिए भारत की सरकार हम चाहते हैं कि भरोसा इतना मजबूत होना चाहिए कि रिपोर्ट आए तो लोगों को यह भरोसा हो। लेकिन इसमें बहुत सारे लूप होल्स एक्सपर्ट ही निकाल रहे हैं। एक्सपर्ट निकाल रहे हैं। खुद मंत्री ये नहीं कह रहे हैं कि हां इस ये रिपोर्ट ओके है। खुद नागरिक उड्डन मंत्री नहीं कह पा रहे हैं। तो आप सोच कर देखिए। दूसरे कैसे कह सकते हैं कि यह रिपोर्ट हम मानते हैं।
