राजस्थान के अजमेर से एक बड़ी खबर सामने आई है। जहां डॉक्टर विकास दिव्य कीर्ति जो दृष्टि आईएएस के संस्थापक हैं। उनके खिलाफ अदालत ने आपराधिक शिकायत पर संज्ञान लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक वायरल वीडियो में न्यायपालिका और न्यायाधीशों के खिलाफ आपत्तिजनक और मानहानिक टिप्पणियां की। कोर्ट ने माना कि यह टिप्पणियां ना तो संवैधानिक आलोचना के दायरे में आती हैं और ना ही अकादमिक स्वतंत्रता के तहत माफ की जा सकती हैं।
मंगलवार को अजमेर के अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मैजिस्ट्रेट मनमोहन चंदेल ने वकील कमलेश मंडोलिया द्वारा दायर शिकायत पर सुनवाई करते हुए कहा कि डॉक्टर दिव्य कीर्ति की टिप्पणी पूरी न्यायपालिका की गरिमा और अधिकार को ठेस पहुंचाने वाली है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई साधारण आलोचना नहीं बल्कि एक अपमान पूर्ण और जानबूझकर किया गया हमला है। कोर्ट ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 3532, 3562 और 3563 तथा आईटी एक्ट की धारा 66 ए बी के तहत मामला बंधरा पाया है और डॉ. दिव्य कीर्ति को 22 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का भी आदेश दिया है। साथ ही अजमेर पुलिस को मामले की आगे जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।
यह आदेश एक वायरल वीडियो के खिलाफ दायर शिकायत पर आया जिसका शीर्षक है आईएएस वर्सेस जज हु इज मोर पावरफुल बेस्ट गाइडेंस बाय विकास दिव्य कीर्ति सर। वकील कमलेश मंडोलिया ने दावा किया कि इस वीडियो में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विवादास्पद बातें कही गई हैं। वायरल वीडियो में डॉ. विकास दिव्य कीर्ति ने उच्च न्यायपालिका को लेकर विवादास्पद टिप्पणियां की थी। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट जज बनने के लिए लॉबिंग करनी पड़ती है, मिठाई बांटनी पड़ती है और फिर भी फाइलें आगे नहीं बढ़ती। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक शक्ति एक भ्रम है।
इन बयानों को लेकर न्यायपालिका की गरिमा और उसकी स्वायत्तता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मंडोलिया का कहना है कि यह बातें सिर्फ जजों और वकीलों का नहीं बल्कि पूरे न्यायतंत्र का अपमान करती हैं और इससे जनता खासकर आईएएस की तैयारी कर रहे युवाओं के मन में न्यायपालिका के प्रति अविश्वास पैदा होता है। डॉ. दिव्य कीर्ति ने इन आरोपों से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि वह उस YouTube चैनल से जुड़े नहीं हैं जिसने यह वीडियो अपलोड किया और यह हो सकता है कि किसी तीसरे पक्ष ने वीडियो को कांट छांट कर अपलोड किया हो। उनका दावा है कि अगर यह बातें उन्हीं की भी हो तब भी यह सिर्फ आमजन के बीच फैले मुद्दों पर टिप्पणी है और किसी व्यक्ति विशेष को निशाना नहीं बनाया गया। डॉ. दिव्य कीर्ति ने इस मामले में अपनी सफाई देते हुए कहा कि वायरल वीडियो उनके आधिकारिक YouTube चैनल से प्रकाशित नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वीडियो में उनकी बातें शामिल हैं भी तो भी वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 एक ए के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आती हैं। डॉ. दिव्य कीर्ति ने यह भी कहा कि उनका बयान किसी विशेष व्यक्ति के खिलाफ नहीं था। हालांकि कोर्ट ने इन दलीलों को अभी स्वीकार नहीं किया है और कहा कि वीडियो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, वायरल हो चुका है और इसमें न्यायपालिका की छवि के साथ खिलवाड़ किया गया है। कोर्ट ने साथ में यह भी जोड़ा कि न्यायपालिका को अपमानित करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।
अब देखना होगा कि 22 जुलाई को कोर्ट में क्या होता है और क्या डॉक्टर दिव्य कीर्ति को आगे किसी आपराधिक कारवाही का सामना करना पड़ेगा या नहीं। फिलहाल इस मुद्दे पर आपकी क्या राय है हमें कमेंट करके जरूर बताएं। नमस्कार, मैं हूं मानक गुप्ता। अगर आपको हमारा यह वीडियो पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर जरूर करें और हां, हमें सब्सक्राइब और फॉलो करना ना भूलें ताकि आप देश और दुनिया की कोई खबर मिस ना करें। तो जुड़े रहिए हमारे साथ और देखते रहिए न्यूज़ – Generated with https://kome.ai
