चीन सरकार ने क्यों दिया था आमिर खान को ‘नेशनल ट्रेजर ऑफ इंडिया’ का अवॉर्ड ?

सबसे ज्यादा धंधा आपको अगर कहीं से मिला है, पैसा कमाई हुई है, वो चाइना से हुई है। नहीं नहीं इंडिया से हुई है। मेरी सबसे ज्यादा कमाई इंडिया से हुई है। चाइना में एक फिल्म मेरी बहुत चली है दंगल। दो फिल्में एक सीक्रेट सुपरस्टार और एक दंगल। लेकिन मेरी कमाई तो यहीं से भाई। चाइना में बहुत बड़ा स्टार आपको माना जाता है। जी जी वो मेरी फिल्मों को बहुत पसंद करते हैं। जी। आप तो चाइनीस जैसे दिखते भी नहीं है।

आजकल लोग पूछ रहे हैं कि भाई टर्की दुश्मन वहां ये गए थे। चाइना ने पाकिस्तान से सपोर्ट किया। ये चाइना में ही बड़े स्टारहैं। अब मैं क्या करूं? उस वक्त जब दंगल लगी थी, सीक्रेट सुपरस्टार लगी थी तब तक तो हमारी कोई तकलीफ भी नहीं थी चाइना के साथ। चाइना के साथ हमारी दोस्ती थी। और चाइनीस गवर्नमेंट ने आपको अवार्ड दिया नेशनल ट्रेजर ऑफ इंडिया। हां। उन्होंने मुझे अवार्ड दिया है। नेशनल ट्रेजर ऑफ इंडिया।

लेकिन आप यह सोचिए उन्होंने ये नहीं कहा नेशनल ट्रेजर ऑफ़ चाइना। उन्होंने कहा नेशनल ट्रेजर ऑफ इंडिया। तो वो भी मानते हैं कि मैं इंडिया का नेशनल ट्रेजर हूं। लेकिन चाइना तो आजकल हमारा दुश्मन बना हुआ है ना। जी जी आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। जो जो हमारेखिलाफ होगा मैं हमेशा हिंदुस्तान के साथ खड़ा रहूंगा।

हमारे आर्म्ड फोर्सेस के साथ खड़ा रहूंगा और हमारे देश के साथ खड़ा रहूंगा। आज देखिए इंटरनेशनल कम्युनिटी कम्युनिटी को यह समझना बहुत जरूरी है कि भाई उन्होंने हमारे इनोसेंट सिविलियंस को एक टेररिस्ट एक्ट से मारा है। यह पूरी दुनिया को समझना चाहिए कि पहल उन्होंने की है। उन्होंने हमारे इनोसेंट लोगों को मारा है। यह कोई तरीका है? ये इंसानियत पे हमला है। उनको तो शर्म आनी चाहिए कि उन्होंने ऐसा किया। कोई भी मजहब यह नहीं कहता कि आप इनोसेंट लोगों को मारो। और यह टेररिस्ट जो कर रहेहैं, मैं उनको इस्लामिक मानता ही नहीं हूं। वो मैं तो उनको मुसलमान नहीं मानता हूं। क्योंकि इस्लाम में लिखा है कि आप जब किसी को भी आप किसी भी इनोसेंट आदमी को नहीं मार सकते। आप औरतों पे हाथ नहीं उठा सकते। आप बच्चों पे हाथ नहीं उठा सकते। ये सारी चीजें इन हमारे मजहब में है। इस इस्लाम में है। तो ये जो कर रहे हैं वो मजहब के खिलाफ जा रहे हैं। गलत कर रहे हैं वो। जनता में से एक जो सवाल हम ले सकते हैं। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर हुआ था और हमारे इंडियन एयरफोर्स ने लाइक वी सेड कि पाकिस्तान के टेररिस्ट बेस कैंप्स उड़ादिए थे। उड़ा दिए थे। हां। एंड इसमें सर हमें बहुत गर्व फील हुआ था। बिल्कुल। बट उस टाइम आपको क्या महसूस हुआ? आपने क्या फील किया? मुझे वही फील हुआ जो आपको फील हुआ। आपको मुझे बड़ा गर्व है हमारी सेना पर। हमारे आर्म्ड फोर्सेस पर। मुझे बड़ा गर्व है। तो आपको नहीं लगता कि वहां जाके बॉर्डर पर उनकी हौसला अफजाई करनी चाहिए? मैं गया हूं। शायद आप लोगों को पता नहीं है यह बात। जब कारगिल का युद्ध हुआ था और हम जीते थे कारगुल का युद्ध तो मैं इकलौता इंसान था। जो मुझे याद है मुझे नहीं पता और कोई गया कि नहीं।

उसके बाद मैंने एकदिन, दो दिन, तीन दिन नहीं मैंने आठ दिन बिताए कारगिल में। मैं लेह में लैंड हुआ हूं। सर मैं लेह में लैंड हुआ हूं और वहां से लेके श्रीनगर तक जो सड़क जाती है फॉर एट डेज आई वाज़ ऑन द रोड और मैं हर रेजीमेंट से मिला हूं। मैं एसआईएम राइफल से मिला हूं। राजपूताना राइफल से मिला हूं। लद्दाख स्काउट से मिला हूं। जितने मतलब अभी भी तो सारे रेजीमेंट्स के मुझे नाम भी याद नहीं है। लेकिन जितने रेजीमेंट्स थे उस आठ दिनों में मैं सिर्फ जवानों से मिला हूं और मैंने उनकी हौसला अफजाई मैं करने गया था कि आपने युद्ध हमारे लिए जीता है। आपने हमारी हिफाजत कीहै।

मैं आपको प्रणाम करता हूं और मैं आपका शुक्रगुजार हूं। ये मैंने किया है। मैं शायद इकलौता हूं और कोई गया भाई मुझे बताइए। और आप कई लोग गए हैं वहां पर उन्होंने गाना गाया डांस किया फिर वापस आ गए लेकिन जब आप गए थे तब भी मुझे शिकायत याद है मुझे कहा गया कि आप ऑफिसर से नहीं मिले। जी जी मेरी एक रिक्वेस्ट थी रजत जी।

आर्मी के हाई कमांड से मैंने एक रिक्वेस्ट की थी कि मैं ये 8 दिन बिताऊंगा जवानों के साथ बिताऊंगा। तो ऑफिसर तो जाहिर है रहेंगे वहीं लेकिन मुझे पूरा वक्त जवानों के साथ गुजारना है। तो इसीलिए मैंने यह एकरिक्वेस्ट की थी कि मैं सिर्फ जवानों के साथ गुजारना चाहता हूं। उसके साथ ऑफिसर्स भी हम लोग साथ रहेंगे। और अभी मैं वो बात फिर आई दिमाग में फिर चली गई। गजनी हो गया यार। चलिए वो बात मुझे आएगी दोबारा लेकिन दिन आप रहे के साथ रहे और कारगिल के आने हां मुझे याद आया मुझे याद आया देखिए ये बहुत बड़ी बात सर मैं ये बहुत बड़ी बात बोलने जा रहा हूं और आप मेरी बात से सहमत होंगे। मैं गया था वहां पे उनकी हौसला अफजाई करने। 8 दिन मैं जब रहा उनके साथ तो मुझे रियलाइज हुआ कि हमारी जो इंडियन आर्मी है जो हमारे जवान हैं उनको हौसला अफजाई कीजरूरत ही नहीं है। वो इतने मुश्किल टेरेन में रहते हैं। इतने मुश्किल टरेन में उनका काम है और उस मुश्किल टेरेन में वो हमारा डिफेंस करते हैं। लेकिन उनका जो हौसला है वह इतना कमाल का है, उनके चेहरे पे मुस्कुराहट है। बिल्कुल वो एकदम कॉन्फिडेंट है और एकदम खुश हैं। तो उनका जो मोराल मुझे लगा मैं मोराल बूस्ट करने जा रहा हूं। नहीं उन्होंने मेरा मोराल बूस्ट किया।

एम आई राइट, सर? आप बिल्कुल सही कह रहे हैं क्योंकि जो देशभक्ति है वो दिल से होती है। बिल्कुल। दिमाग से नहीं होती। और आपका जो आपका जो ऑडियंस कनेक्ट है जी वोदिल से होता है। दिमाग से नहीं होता। बिल्कुल बिल्कुल। अब इससे बड़ा किसी को देशभक्ति का क्या प्रूफ चाहिए कि एक इंसान का 140 करोड़ लोगों से दिल का कनेक्शन और वहां मैं एट आठ दिन आठ दिन में था और मुझे इतना अच्छा लगा। मैं उनके साथ मैंने खाना खाया। मैं उनके साथ बैठा मैं और उनके जिंदगी के बारे में पूछा। एक तो मैं एकदम बॉर्डर पर बंकर में मैंने रात बिताई है। रात मैंने बिताई है। छह छह या आठ वहां पर सोल्जर्स थे। तो मैंने रात भर वहां बॉर्डर पे एक बंकर में मैंने रात बिताई है।

आई डोंट थिंक किसी ने ऐसा किया है।अब क्या है? अब क्या है? ये आप पूछ रहे हैं रजत जी। तो मैं जवाब दे रहा हूं। लेकिन क्या अच्छा लगता है कि मैं जगह-जगह जाके बोलूं कि भाई मैंने ये किया, मैंने वो किया। मेरा वो नेचर ही नहीं है। मैं अपने दुनिया में रहता हूं। मैं काम करता हूं। मैं बोलता नहीं हूं। तो लेकिन आप अब सवाल पूछ रहे हैं तो मैं बोल रहा हूं। और ये अच्छा हुआ आप ये सवाल पूछ रहे हैं। तो ये सारी चीजें निकल के बाहर आ रही है। मुझे भी याद आ रहा है। मुझे तो आदत सी हुई है सवाल पूछने की। नहीं नहीं और बड़े अच्छे सवाल पूछते हैं आप। मुझे आपका शो बड़ा पसंद है। बड़ा मजाआता है।

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