एयर इंडिया के विमान बिंग 787 ड्रीमलाइनर के हादसे को लेकर अब कई थ्योरी सामने आने लगी हैं पर सवाल यह है कि आखिर अचानक प्लेन के इंजन ने काम करना कैसे बंद कर दिया जो टीम इसकी जांच कर रही है वह अब इसे 2020 में लंदन के गैट्विक में हुई एक घटना से जोड़कर दिख रही है जिसमें गैट्विक एयरपोर्ट से उड़ान भरने के फौरन बाद एयरबेस A321 के दोनों इंजंस ने काम करना बंद कर दिया था इस घटना में भी पायलट ने एटीसी को मेड ए कॉल दिया था और 11 मिनट बाद प्लेन की सुरक्षित लैंडिंग गैटविक एयरपोर्ट पर करा दी थी उस समय जांच में यह बात सामने आई थी कि उस प्लेन का फ्यूल कंटैमिनेटेड था उसमें पानी और जंग के अंश मिले थे तो क्या अहमदाबाद प्लेन क्रैश में भी यही हो सकता है क्या इस प्लेन के फ्यूल में कोई मिलावट थी हर एंगल से मामले की जांच हो रही है और अहमदाबाद प्लेन हादसे में 270 लोगों से ज्यादा की निधन हो चुका है यह आंकड़ा बढ़ रहा है क्योंकि बहुत से घायलों का इलाज चल रहा है 242 लोग क्रूज समेत इस प्लेन में सवार जिनमें से 241 की जान चली गई और जिस हॉस्टल पर जाकर यह हादसा हुआ वहां पे कई ट्रेनी डॉक्टर्स काल के मुंह में समा गए बहुत ही कम समय में और बहुत ही कम हाइट पर जाकर अचानक यह हादसा होता है किसी को भी अंदाजा नहीं था जो लोग इसका वीडियो शूट कर रहे थे आसपास जो रिहााइशी इलाके हैं जो उसका वीडियो बना रहे थे वो भी यह समझ नहीं पा रहे थे कि प्लेन इतना नीचे फ्लाई क्यों कर रहा है और अचानक जाकर तेज धमाका होता है ।
धुएं का गुबार दिखता है और तब समझ में आता है कि कितना बड़ा हादसा वहां पर हो गया है यह हादसा हो गया लेकिन इसके पीछे बहुत से सवाल छूट गए हैं और हर कोई इस वक्त जो दर्दनाक तस्वीरें और कहानियां सुन रहा है वो अंदर से बहुत दुखी है लेकिन बहुत से सवाल उसको घेर रहे हैं जिसमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह हादसा हुआ कैसे क्या हुआ होगा एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 के साथ वो आखिरी के कुछ सेकंड वो आखिरी के कुछ मिनट आखिर कॉकपिट में किस तरह की सिचुएशन होगी क्योंकि जो मे डे कॉल किया गया उसमें बताया गया कि उनको पावर या थस्ट नहीं मिल रहा है प्लेन ऊपर की तरफ नहीं जा रहा है उसके बाद संपर्क टूट जाता है बता दें कि प्रशांत जी खुद एक कमर्शियल पायलट रह चुके हैं।
4000 घंटे से ज्यादा फ्लाइंग का अनुभव इनको है ट्रेनर रह चुके हैं मतलब जो फर्स्ट ऑफिसर होता है जिसको आम भाषा में को पायलट हम लोग कहते हैं उनको भी ट्रेनिंग दे चुके हैं तो आइए उनसे बातचीत की शुरुआत करते हैं प्रशांत जी पूरी दुनिया में अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं बहुत तरह के सवाल हैं जो लेकिन जो सबसे बड़ा सवाल है वो यह है कि उस आखिरी 60 सेकंड में क्या हुआ होगा आखिर यह प्लेन क्रैश क्यों हो गया क्योंकि बोइंग को तो बहुत ही मजबूत और बहुत ही रिसर्च और बहुत ही बड़ी तैयारी के बाद बनाया गया विमान माना जाता है पूरे विश्व भर में बोइंग की अपनी एक कैपेबिलिटी है एक धाक है एक समय में इसको राष्ट्राध्यक्ष भी इस्तेमाल किया करते थे तो आज अचानक ऐसा क्या हो गया उन आखिरी 60 सेकंडों में क्या हुआ होगा मैम जैसा आपने बताया कि बोइंग 787 इसको ड्रीम लाइनर कहा जाता है जी ये काफी सेफ एयरक्राफ्ट माना जाता है स्पेशली जो लंबी सफर की जो फ्लाइट्स होती हैं जिनको हम इंग्लिश में लॉन्ग हॉल फ्लाइट्स कहते हैं उसमें ये अमूमन ये जहाज काफी यूज होता है एयर इंडिया के पास ये 2014 से हैं और मेरे इंफॉर्मेशन के अनुसार 30 से ज्यादा जहाज एयर इंडिया के पास ये अभी करंट एकिस्टिंग फ्लट में है जी जैसा आपने बताया कि इसमें अनुभव का एक बहुत इंपॉर्टेंट रोल होता है आपने मेरा भी एक परिचय दिया कि इतने घंटे पायलट का जो होता है बहुत जरूरी होता है।
इस दुखद घटना में मुझे बहुत शर्म के साथ ये कहना पड़ रहा है कि द कॉकपिट एक्सपीरियंस इन दिस एयरक्राफ्ट वास ऑलमोस्ट 9000 आवर्स जी कैप्टन सब्रवाल और उनके फर्स्ट ऑफिसर को दोनों मिला के मैं आपको बता रहा हूं हम तो इसके बावजूद ये घटना हो जाना दे दैट मींस दैट ये कुछ ना कुछ गलत हुआ है अब आपके सवाल पे अगर मैं आऊं आप कह रहे हैं कि आखिरी 60 सेकंड में ये क्या हुआ देखिए मल्टीपल थ्योरीज हैं इस पूरे इस एपिसोड को सब्सटेंशिएट करने के लिए देयर कैन बी अ टेक्निकल फौल्ट देयर कैन बी अ वाइल्ड लाइफफ़ इशू आल्सो वी विल नॉट रूल आउट अ पायलट एरर जिसको हम ह्यूमन एरर कहते हैं तो ये सारी चीजों का समूह भी हो सकता है जो कि इस पूरे दुखद घटनाओं का जिसको कहते हैं कि हम वजा रहा है हम बिल्कुल और प्लेन के पायलट के जो आखिरी शब्द थे मतलब जब उन्होंने मेड डे कॉल किया आपसे हम जानना चाहेंगे कि मेड मे डे कॉल क्या होती है ये कब की जाती है और ये कितनी कॉमन है लेकिन रिकॉर्डर से जो शब्द सामने आए हैं वो पायलट के जो आखिरी शब्द थे वो मैं पढ़ देती हूं मे डे मे डे मे डे नो पावर नो थस्ट गोइंग डाउन तो आपने सुना यह मेड एडे कॉल जो पायलट ने की एटीसी को और उसके बाद यह कहा गया कि जब वापस संपर्क की कोशिश की गई तो संपर्क टूट चुका था।
हमारे साथ कैप्टन प्रशांत ढला जी हैं आखिरी दो मिनट में कॉकपिट में क्या हुआ होगा देखिए मैम मैं इस मीडिया कॉल के बारे में थोड़ा आपके दर्शकों को बताना चाहूंगा मे डे कॉल जो होती है वह पायलट तब देता है जब उसके पास एक अलर्ट फेस हो जाता है हम अलर्ट फेस का मतलब यह है कि अब उसको एटीसी को फुल प्रायोरिटी देनी जरूरी है हम अब चीजें पायलट के हाथ से निकलने वाली हैं वो एक कम्युनिकेशन स्ट्रेटजी यूज़ कर रहा है टू दी एयर ट्रैफिक कंट्रोल कि मेरे साथ ये घटना हो रही है इस पॉइंट पे जब हम कैप्टन सबवाल की अगर हम आपने रिकॉर्डिंग जैसे बताया उसमें उन्होंने नो थ्रस्ट बोला देखिए हमारे दर्शक नो पावर नो थ्रस्ट गोइंग डाउन सो थ्रस्ट इज समथिंग व्हिच ड्राइव्स दी मशीन हम अब इसमें जो हमारा एयरक्राफ्ट होता है पूरा जो एयरक्राफ्ट बना होता है उसमें चार फोर्सेस एक्ट कर रहे होते हैं लिफ्ट थ्रस्ट ड्रैग और वेट जी तो थ्रस्ट जो होता है वो इंजन ड्राइव करता है इंजन से थ्रस्ट बनती है सो दैट मींस अगर पायलट ये कह रहा है नो थ्रस्ट दैट मींस उसको वो आगे पुश करने वाली जो क्षमता होती है जो थ्रस्ट जनरेट करती है वो नहीं मिल पा रही है और वो ये भी कहता है नो लिफ्ट लिफ्ट एक ऐसा फोर्स है एयरक्राफ्ट को जो उसको ऊपर की तरफ लेके जाता है जी सो लिफ्ट भी नहीं हो पा रही क्योंकि थ्रस्ट नहीं हो पा रहा हम दैट मींस या तो एयरक्राफ्ट का ड्रैग ज्यादा है और एयरक्राफ्ट का वेट ज्यादा है सो दिस इज व्हाट ही इज़ ट्राइंग टू टेल दी एटीसी कि जी मेरे को ना लिफ्ट मिल पा रही है और ना ही मैं थ्रस्ट जनरेट कर पा रहा हूं ये उसका कहने का उसका उसका अर्थ था इस पूरी एटीसी कन्वर्सेशन का हम आफ्टर दैट इट्स देयर वाज़ नो कांटेक्ट विद हिम पोस्ट दैट कॉल तो यह नॉर्थ होस्ट या इंजन फेलोर की जो घटना है इसके क्या-क्या कारण होते हैं उस पर मैं आपसे डिटेल में बात करूंगी लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि जब दोनों पायलट्स को यह पता चल चुका होगा कि अब बात हमारे हाथ से निकल चुकी है हाइट भी उतनी नहीं थी तो क्या सिचुएशन वहां पर रही होगी उनके लिए कितना स्ट्रेसफुल रहा होगा और एक पायलट की जब ट्रेनिंग होती है या जो उसका अनुभव होता है तो ऐसी आपात परिस्थिति से निपटने के लिए क्या-क्या ऑप्शंस उनके पास होते हैं वो कैसे हैंडल करते हैं वो कैसे मैनेज करते हैं वो जानते हैं कि 250 पैसेंजर्स की जान उनके कंधों पर है देखिए मैं पहले इस सवाल बहुत इंपॉर्टेंट सवाल आपने रेज किया है मैं इसमें जरूर ये बात बोलना चाहूंगा दैट देयर इज नो सॉरी इन एिएशन जी एिएशन में इतने स्प्लिट सेकंड डिसीजंस लेने होते हैं कि आपको मौका नहीं मिलता है।
इस केस में भी ऐसा ही हुआ जैसे ही यह विमान टेक ऑफ करता है उसके बाद इन पायलट को कुछ रियलाइज होता है अब देखिए मैम इसमें हमें थोड़ा सा टेक्निकल पे जाना पड़ेगा जो कि हम सब्सटैंशिएट कर पा रहे हैं कि जहाज का जो व्हील्स हैं जिसको हम गियर कहते हैं गियर वो नीचे ही है हम रूल बुक ये कहता है एसओपी ये कहता है कि जब आप टेक ऑफ करते हैं टेक ऑफ करने के 50 से 100 फीट के बाद आपको लैंडिंग गियर अप करना होता है मतलब ये जो व्हील्स दिख रहे हैं इसको गियर कहा जाता है टेक्निकल शब्दों में और जैसे ही प्लेन टेक ऑफ करता है आमतौर पर कितने फीट के बाद इसको क्लोजिंग का प्रोसीजर ऑन हो जाता है 50 टू 100 फीट के के दरमियान आपको लैंडिंग गियर अप कर देना है।
लैंडिंग गियर 50 टू 100 फीट बट ये 600 फीट तक गया और उसका लैंडिंग गियर जो था वो ऑन ही था उसके टायर्स दिख रहे थे आप वीडियो में भी देखिए राइट दैट मींस कि कुछ ना कुछ कॉकपेट में एक कन्फ्यूजन स्टेट ऑफ़ माइंड था देयर माइट बी अ वार्निंग गिवन टू द पायलट देयर माइट बी अ कॉशन गिवन टू द पायलट यह स्टेट ऑफ द आर्ट एयरक्राफ्ट्स हैं उसको कुछ ना कुछ इंडिकेशन मिली है पायलट को जो कि उन्होंने गियर को डिले करा है ही माइट बी वेरी स्मार्ट ही इज़ अ ट्रेनर ही एंड उन्होंने ये डिसीजन विलफुली भी लिया होएगा कि उन्होंने लैंडिंग गियर छोड़ दिया उसको आल्सो देयर कैन बी अ रीज़ दैट उनका क्योंकि एकदम टेक ऑफ करते ही जैसे हमने आपने ये बात बताई कि बहुत टाइम क्रिटिकल ये डिसीजन था उनके पास इतना समय नहीं था इस पूरे सिचुएशन का यू नो फैक्ट फाइंडिंग करने का अपनी चेक लिस्ट निकालने का मैं दर्शकों को एक बहुत इंपॉर्टेंट बात बताना चाहता हूं कि एक पायलट जो कि फ्लाइट कंडक्ट करते हैं उनके पास एक चेक लिस्ट होती है जी दो लोग कॉकवेट में इसलिए दिए गए हैं कि वो चेक लिस्ट चैलेंज और रिस्पांस पे चलती है उसके बिना आप जहाज को ना ही आप इंजन स्टार्ट कर सकते हैं ना ही आप जहाज को टैक्सी कर सकते हैं सिमिलरली टेक ऑफ के बाद भी आप एक चेक लिस्ट यूज़ करते हैं अच्छा एक नॉर्मल प्रोसीजर चेक लिस्ट होती है एक एबनॉर्मल चेक लिस्ट होती है जैसे अगर जहाज में कुछ इशज़ आ जाते हैं तो यू आर सपोज टू रेफर टू द एब्नॉर्मल चेक लिस्ट जिसमें सारी चीजें लिखी होती हैं कि आपके जहाज में इंजन में कोई इशू है तो आप उस भाग में जाते हैं।
आपकी हाइड्रोलिक्स में इशू है तो आप उस चेक लिस्ट का उस पन्ने पे जाते हैं तो ऐसे करते-करते जहाज में केवल 20 से 22 सिस्टम्स होते हैं अलग-अलग पायलट के पास इस घड़ी में टाइम नहीं मिला होएगा कि वो उन चीजों को रेफर कर ले इस पे भी सेफगार्ड की जाती है जिसको हम पायलट ट्रेनिंग्स कहते हैं उसको कहते हैं मेमोरी आइटम्स कुछ आइटम्स पायलट को बाय मेमोरी आनी चाहिए कि अगर ऐसी सिचुएशन वो हैंडल करता है तो उसको किस तरह से कौन से डिसीजंस लेने हैं सो देयर इज अ पॉसिबिलिटी ये तो इन्वेस्टिगेशन का पार्ट है जब सीवीआर और डीएफडीआर का संक्षेप में हम इसको निकालेंगे तब हमें पता लगेगा कि भई उन्होंने करेक्टिव एक्शंस लिए कि नहीं लिए ये टेक्निकल फौल्ट था या किस तरीके से ये सारी चीजें हुई जी एक और खास बात कि जो वीडियो हमें दिख रहा है प्लेन का यह एक रेफरल पिक्चर है मैं आपको बता दूं जो असल वीडियो आप देख रहे हैं एक तो ऑब्जरवेशन ये है कि इसका जो गियर था वो ऑन ही था मतलब जो टायर्स थे वो दिख रहे थे एक निश्चित हाइट पर जाकर इन टायर्स को अंदर कर दिया जाता है और दूसरा फ्लैप अप था जी तो इसको लेकर भी मीडिया में चर्चा है खासतौर पर अमेरिकन मीडिया में जो इस हादसे को इस थ्योरी के साथ।
हालांकि हमें उस थ्योरी में बहुत ज्यादा नहीं पड़ना चाहिए क्योंकि ब्लैक बॉक्स आ चुका है बहुत जल्दी असल सच्चाई और पूरी डिकोडिंग जो है वो सामने आ जाएगी लेकिन जो इंटरनेशनलली चर्चा है क्योंकि बोइंग एक अमेरिकन कंपनी भी है और वहां पे वो लोग इसको इस तरह इंटरप्रेट करने की कोशिश कर रहे हैं कि शायद ये कोई मैनुअल एरर रहा होगा कि टायर क्यों नहीं इसके मतलब गियर अप क्यों नहीं हुआ और फ्लैप ऊपर की तरफ क्यों थे कब फ्लैप ऊपर की तरफ होते हैं जी तो जैसा मैंने आपको पहले बताया कि पहले लैंडिंग गियर ऊपर जाएगा फिर फ्लैप्स अप होएंगे अच्छा तो इस केस में थोड़ा सा जो सीक्वेंस ऑफ इवेंट्स हैं वो उल्टा हो गया इसमें लैंडिंग गियर नीचे रह गया और फ्लैप्स हमें वो डेबरी बता रही है अभी हमें हम ये भी असर्टेन नहीं कर पाए हैं कि वो फ्लैप्स एक्चुअली में अप थे कि नहीं थे वीडियो से भी क्लियर नहीं है जो वीडियोस देखे जी तो वो विंग का सेक्शन दिखा है हमें डेबरी में उसमें ऐसा नजर आ रहा है कि फ्लैप्स अप हो गए हैं तो देयर दिस दिस थ्योरी व्हिच यू आर सेइंग इन द इंटरनेशनल मीडिया इज़ बिकॉज़ ऑफ़ द कॉमनैलिटी ऑफ़ वर्ल्ड वो फ्लैप्स अप और गियर अप यह दोनों चीज़ देखिए मिलती जुलती हैं तो एक थ्योरी यह भी कह रही है कि पायलट ने गलती से फ्लैप्स अप कर दिए गियर अप करने के बजाय व्हिच आई थिंक इज़ इज़ वेरी डिफिकल्ट टू से बिकॉज़ जैसे मैंने आपको बताया कंबाइंड एक्सपीरियंस बहुत ज्यादा था दोनों ट्रेंड थे पहली फ्लाइट नहीं थी ये उनकी कई बारी इससे पहले वो फ्लाइंग कर चुके थे तो देयर कैन बी एन इशू के वो स्ट्रेस लेवल्स इतने ज्यादा हो गए कॉकपिट में कि उन्होंने लैंडिंग के नीचे छोड़ दिया बिकॉज़ ऑफ़ सम अदर फेलियर कोई टेक्निकल इशू हो सकता है ।
हाइड्रोलिक्स में फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम में वो फ्लैप्स अपने आप ऊपर चले गए देखिए यह सारा कुछ कंप्यूटराइज होता है एक जहाज में 500 से ज्यादा कंप्यूटरटर्स होते हैं इसके बाद 1000 से ज्यादा माइक्रो कंप्यूटरटर्स होते हैं 4000 से ज्यादा माइक्रो सेंसर्स होते हैं एयरक्राफ्ट में ये सारी चीजें पायलट को मैनेज करनी होती है उस अपनी स्क्रीन के ऊपर उसको इंफॉर्मेशन आती है तो देयर इज़ अ पॉसिबिलिटी कि वो फ्लैप्स अपने आप भी ऊपर गए हो बिकॉज़ ऑफ़ सम फेलियर हम् और द अदर साइड ऑफ़ द थ्योरी इज़ दैट पायलट इन एएडवंटली उसने फ्लैप्स ऊपर कर दिए गियर ऊपर करने के बजाय।
