जब कैमरा रोल होता था वह मुस्कुराती थी जब स्क्रीन पर आती थी तो किरदारों को जिंदा कर देती थी लेकिन जब वह कैमरा बंद होता तो उनकी मुस्कुराहट के पीछे एक ऐसी कहानी छुपी होती जो ना कभी किसी ने सुनी ना किसी ने पूछी यह कहानी है अरुणा ईरानी की जिसने दो बार रोग को हराया लेकिन कभी दुनिया को इसका एहसास तक नहीं होने दिया आज हम उस कहानी को उजागर करेंगे जिसे उन्होंने सालों तक छुपा कर रखा सिर्फ इसलिए कि वह कमजोर ना दिखे अरुण ईरानी एक ऐसा नाम जिसने हिंदी सिनेमा में 60 के दशक से 2000 तक हर पीढ़ी को अपने अभिनय से चौंकाया है 300 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुकी कॉमिक रोल से लेकर नेगेटिव रोल्स तक उन्होंने हर रंग को जिया बॉम्बे टू गोवा अनोखा रिश्ता बेटा सुहाग फर्जी जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने सराहा लेकिन पर्दे के पीछे एक और अरुणाई रानी थी जो अंदर ही अंदर कुछ और लड़ाईयां लड़ रही थी।
वह साल 2015 था उम्र भले ही 60 पार थी लेकिन दिल में अब भी वही जुनून था अभिनय का कैमरे का जिंदगी का लेकिन तभी एक मेडिकल चेकअप में पता चला कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है लोगों को जब यह खबर मिलती है तो सबसे पहले वह डरते हैं पर अरुणा ने उस डर को खुद में ही समेट लिया उन्होंने किसी को नहीं बताया ना मीडिया को ना इंडस्ट्री को ना फैंस को डॉक्टर्स ने लम निकाल दिया लेकिन ट्रिटमेंट लेने की सलाह दी पर अरुणा ने साफ मना कर दिया उन्हें डर था कि उनके बाल झड़ जाएंगे और एक एक्ट्रेस के तौर पर उनका लुक ही उनकी पहचान है उन्होंने ओरल मेडिसिन से ही इलाज करवाया जब आप अकेली बीमारी से लड़ रहे होते हैं तो वह बीमारी सिर्फ आपके शरीर पर असर नहीं डालती वह आपके मन आपके सपनों और आपकी पहचान को भी चोट पहुंचाती है।
अरुणा ईरानी ने यह सब अकेले झेला उन्हें कैमरा सामने बुलाता रहा लेकिन उनके अंदर का डर उन्हें बार-बार रोकता रहा वह मुस्कुराती रही लेकिन उनका शरीर धीरे-धीरे लड़ाई लड़ता रहा कई साल बीते और सब कुछ ठीक लगने लगा लेकिन 2020 में फिर एक बार रोग ने दस्तक दी इस बार शरीर उतना मजबूत नहीं था और दुनिया भी एक महामारी से लड़ रही थी और रोग दो अलग लड़ाई लेकिन एक ही इंसान को ललकार रही थी लेकिन इस बार अरुणा ईरानी ने फैसला किया कि वह ट्रिटमेंट लेंगी उन्होंने डर को चुनौती दी बाल झड़े लेकिन उम्मीद नहीं झड़ी कीमोथेरेपी के बाद उनके बाल चले गए लेकिन कुछ महीनों बाद जैसे ही बाल वापस आने लगे वैसे ही अरुणा का आत्मविश्वास भी लौटा उन्हें लगा कि अब वह सिर्फ एक एक्ट्रेस नहीं है वह एक योद्धा है और फिर उन्होंने फैसला लिया अब इस कहानी को दुनिया से छुपाया नहीं जाएगा अरुणा ईरानी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में पहली बार अपनी इस कैंसर यात्रा का जिक्र किया लोग हैरान रह गए अरे यह तो कभी बताया ही नहीं क्योंकि उन्होंने उस दौर में भी एक्टिंग नहीं छोड़ी थी वो मुस्कुराती रही किरदार निभाती रही और निजी दर्द को दिल में छुपाए रखी उन्होंने अब कहा अगर डॉक्टर ट्रिटमेंट सजेस्ट करते हैं तो लेना जरूरी है मैंने दूसरी बार इसे अपनाया और आज मैं जिंदा हूं अरुणा ईरानी ने कभी रोग पर सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं किया कभी इमोशनल वीडियो नहीं डाला क्यों क्योंकि उनके लिए एक यह प्राइवेट लड़ाई थी वह चाहती थी कि उनकी पहचान सिर्फ एक बीमार महिला के रूप में ना हो बल्कि एक ऐसी औरत के रूप में हो जिसने चुपचाप जीत हासिल की।
आज भी भारत जैसे देशों में रोग को लेकर डर शर्म और गलतफहमियां हैं लोग सोचते हैं अब यह ठीक नहीं हो पाएगा अब जिंदगी खत्म लेकिन अरुणा ईरानी की कहानी बताती है कि सही इलाज आत्मबल और सकारात्मक सोच किसी भी बीमारी को मात दे सकती है बीमारी को छुपाना जरूरी नहीं लेकिन हर किसी की हिम्मत का तरीका अलग होता है इलाज में लापरवाही नहीं करनी चाहिए डर से भागने से अच्छा है इलाज को अपनाना रोग अब लालाज नहीं है।
समय पर इलाज और सकारात्मक सोच इसे हराने में मदद करती है जब आप अंदर से मजबूत होते हैं तो आपकी मुस्कान भी ताकत बन जाती है अरुणा ईरानी ने हमें एक ऐसी कहानी दी है जिसमें ना रोना है ना हार मानना बस चुपचाप लड़ते जाना है वो कहती है मैं जिंदा हूं और अब जिंदगी को और भी ज्यादा प्यार करती हूं उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि पर्दे पर भले ही वह सौतन या नकारात्मक किरदार बनी हो लेकिन असल जिंदगी में वह एक बहुत बहादुर योद्धा हैं अगर अरुण की यह कहानी आपके दिल को छू गई हो तो इस वीडियो को शेयर जरूर कीजिए क्योंकि शायद आपकी एक क्लिक किसी और को हिम्मत दे दे और हां जिंदगी में कोई भी बीमारी हो याद रखिए हम कमजोर नहीं होते बस कभी-कभी थक जाते हैं और फिर उठ जाते हैं।
