लड़ाई में तबाह हो रही इजरायल-ईरान की इकोनोमी, खाली हो जाएंगे खजाने |

ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष सिर्फ सैन्य नहीं अब आर्थिक संकट में भी बदलता जा रहा है। इजराइल और ईरान के बीच जारी लड़ाई जान लेने और सैन्य हमलों तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसकी गूंज दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी हिला कर रख चुका है। एक ओर इजराइल बढ़ते सैन्य खर्च से जूझ रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ ईरान पर उसके तेल निर्यात और ऊर्जा ढांचे पर भारी हमले हो रहे हैं। अब सवाल यह है कि यह लड़ाई आर्थिक रूप से कौन और कब तक झेल पाएगा? इस युद्ध में इजराइल पानी की तरह पैसा बहा रहा है।

ऐसे में इसकी जीडीपी में गिरावट आ सकती है। पूर्व इजराइली रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल रीम एमिनाक के मुताबिक इजराइल का रोजाना युद्ध लड़ने में 725 मिलियन डॉलर यानी करीब 6000 करोड़ खर्च हो रहे हैं। इसमें केवल मिसाइल, जेट ईंधन, बमबारी और सैनिक तैनाती जैसे सीधे खर्च शामिल है। पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान और प्रोडक्टिविटी में गिरावट को भी जोड़ा जाए तो असल खर्च इससे कई ज्यादा है।

इजरायली वित्त मंत्रालय ने 2025 में जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान 4.3% से घटाकर 3.6% कर दिया। वहीं 2025 में पहले से तय बजट घाटे की सीमा 4.9% से बढ़ सकती है। वहीं रिपोर्ट की मानें तो अमिनाज ने बताया कि इजराइल ने शुरुआती दो दिनों में करीब 1.45 अरब डॉलर यानी $1000 करोड़ उससे ज्यादा खर्च कर दिए। इनमें हमले और बचाव दोनों तरह के खर्च शामिल हैं।

इसमें से ₹500 मिलियन डॉलर से ज्यादा की रकम बमबारी और जेट ईंधन जैसे हमलों पर खर्च हुए। बाकी पैसा मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर और सैनिकों को जुटाने जैसे रक्षा कार्यों पर खर्च हुआ। अब बात कर लेते हैं कि ईरान की आर्थिक स्थिति कैसी रही है।

ईरान जो पहले ही अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंधों की वजह से कमजोर अर्थव्यवस्था से जूझ रहा था। अब सीधे इजराइली हमलों का निशाना बन रहा है। ईरान के लिए सबसे बड़ा झटका तब लगा जब इजराइल के हवाई हमलों ने खार्ग द्वीप पर उसके तेल टर्मिनल को निशाना बनाया। जो ईरान के 90% क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट का केंद्र है।

इसके कारण ईरान का तेल निर्यात 282,000 बैरल प्रतिदिन से गिरकर 1,20,000 बैरल प्रतिदिन रह गया। इसके अलावा साउथ पार्स गैस फील्ड जो कि देश की 80% गैस जरूरतें पूरी करता है, वह भी आंशिक रूप से बंद हो चुका है। शहरी रिफाइनरी और तेहरान के बाहर के रिफ्यूल डिपो पर भी हमले किए गए। 2018 से अब तक उसकी मुद्रा रियाल 90% से ज्यादा गिर चुकी है।

आधिकारिक महंगाई दर 40% से ऊपर पहुंच गई। विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 33 अरब डॉलर है जो लंबी लड़ाई के लिए तो काफी नहीं लगता। ईरान का सालाना रक्षा बजट लगभग $ अरब डॉलर है जो जीडीपी का 3 से 5% बनाता है।

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